आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

"शिक्षक" व छात्र

                
                                                         
                            कपहले-पहले शिक्षक का चाँटा लगा
                                                                 
                            
हो गये लाल-लाल गाल
रोते हुए अगर घर आते
माता -पिता जान जाते
शेतानी की बात भांप जाते
घर पर डांट फटकार करते
टीचर भी मनोयोग से करते भला
अव्वल होने का मिल जाये लाभ
अब बदला-बदला हुआ जमाना
छात्र घूमता और लगाता है कश
शिक्षक को अगर हो जाता है शक
कालेज से निकालने का सुनाता फरमान
"गोली"चला छात्र बनाता अपनी पहचान
अब नहीं करना चाहते शिक्षक का सम्मान

गुरु का करे सम्मान न हो अपमान

अरविन्द कुमार शर्मा

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर