Urdu Poetry: ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है!

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है!
हम तो इस जीने के हाथों मर चले
- ख़्वाजा मीर दर्द  

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मुझे ज़िंदगी की दुआ देने वाले
हँसी आ रही है तिरी सादगी पर
- गोपाल मित्तल

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तेरे बग़ैर भी तो ग़नीमत है ज़िंदगी
ख़ुद को गँवा के कौन तिरी जुस्तुजू करे
- अहमद फ़राज़

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कुछ दिन से ज़िंदगी मुझे पहचानती नहीं
यूँ देखती है जैसे मुझे जानती नहीं
- अंजुम रहबर

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कटती है आरज़ू के सहारे पे ज़िंदगी
कैसे कहूँ किसी की तमन्ना न चाहिए
- शाद आरफ़ी

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धोका है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
- राजेश रेड्डी

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Urdu Poetry: तुम हमारे किसी तरह न हुए

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