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नासिर मिस्बाही: घर जो दरिया के किनारे पे बना होता है

nasir misbahi famous ghazal ghar jo dariya ke kinaare pe bana hota hai
                
                                                         
                            


घर जो दरिया के किनारे पे बना होता है
उस को मा'लूम है तूफ़ान से क्या होता है

डर सताता है मुझे संग-ब-दस्तों का बहुत
जब मिरे हाथों में मिट्टी का घड़ा होता है

सब तिरे नाम की तस्बीह बताते हैं उसे
मुँह से मद-होशी में जो लफ़्ज़ अदा होता है

क्या कहा हँसती हुई आँख से आँसू बहना
ये तमाशा मिरी आँखों में सदा होता है

दिन तो कुछ आप से कुछ उन से बिता लेता हूँ
रात आती है तो मत पूछिए क्या होता है

मेरी रोती हुई आँखों को ज़रा ग़ौर से देख
ख़ून आँसू में मुरादों का मिला होता है

इक सुहागन ये बड़े मान से बोली 'नासिर'
हाथ से आरती छूटे तो बुरा होता है

7 घंटे पहले

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