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परवीन शाकिर: लड़की! ये लम्हे बादल हैं गुज़र गए तो हाथ कभी नहीं आएँगे

parveen shaklr nazm ek dost ke naam ladki ye lamhe baadal hain
                
                                                         
                            


लड़की!
ये लम्हे बादल हैं
गुज़र गए तो हाथ कभी नहीं आएँगे
इन के लम्स को पीती जा
क़तरा क़तरा भीगती जा
भीगती जा तू जब तक इन में नम है
और तिरे अंदर की मिट्टी प्यासी है
मुझ से पूछ
कि बारिश को वापस आने का रस्ता कभी न याद हुआ
बाल सुखाने के मौसम अन-पढ़ होते हैं! 
 

3 घंटे पहले

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