किसानों के लिए अच्छी खबर, कम बारिश में भी उगेगा धान, 30 प्रतिशत बचेगा पानी, जानें फार्मूला
मानसून की बेरुखी के चलते उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश में सूखे के हालात बन गए हैं। इन राज्यों में धान रोपाई का कार्य अटक चुका है।
धान की रोपाई विधि अधिक अपनाई जाने के कारण किसानों के लिए लक्ष्य को पाना चुनौती बन गया। इस स्थिति में अनुसंधान वैज्ञानिकों ने सीधी धान बिजाई विधि (डीएसआर) से बिजाई करने का फार्मूला अपनाने का संदेश दिया है।
इस विधि पर बाकायदा आठ साल तक सफल ट्रायल लिए जा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं अनुसंधान केंद्र मैक्सिको की क्लाइमेट चेंज एंड एग्रीकल्चर फूड सिक्योरिटी (सीकैफ) परियोजना के तहत करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान स्थित रिसर्च प्लेटफार्म से धान की सीधी बिजाई करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल पानी की 30 प्रतिशत तक बचत होगी बल्कि उत्पादन भी रोपाई विधि से ज्यादा मिलता है।
पानी बचेगा, नहीं लगेगा बकानी रोग
सीएसएसआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ एचएस जाट, सीकैफ के वैज्ञानिक डॉ एसके ककरालिया व डॉ दीपक ने बताया कि धान की सीधी बिजाई से खेत की जुताई का खर्च व डीजल बचेगा। 30 प्रतिशत तक पानी की बचत होगी।
धान में बकानी रोग नहीं आएगा। रोपाई विधि की बजाय सीधी बिजाई करने पर फसल दस दिन पहले पकेगी। अगली फसल समय पर लगाई जा सकेगी। सूखे की स्थिति में 15 जुलाई तक इस विधि को अपना सकते हैं। कम अवधि में पकने वाली किस्में ही इस तरीके से लगाएं।
यह है डीएसआर का तरीका
वैज्ञानिकों ने बताया कि डीएसआर (सीधी बिजाई) विधि से प्रति एकड़ आठ से दस किलो प्रति एकड़ धान का बीज लगता है। बिना जुताई तपड़ खेत में जीरो ड्रिल मशीन से जिसमें इन्क्लाइट प्लेट होती है, उससे बिजाई करें। कंप्यूटर लेवलर से खेत समतल करके शून्य नमी में बिजाई कर सकते हैं तथा दूसरे तरीके से खेत में पहले पानी लगाकर फिर बत्तर आने पर।
बीज की गहराई दो से तीन सेंटीमीटर तक रखें। बिजाई के बाद पहले सात दिन तक हर तीसरे दिन पानी दें, जब तक पूरे बीज का जमाव ना हो जाए। फिर हर सात दिन पर सिंचित करें। जमीन में हेयर क्रेक आएं तभी सिंचाई करें। इस समय कम अवधि वाली किस्मों में पूसा बासमती-1509 व पीआर ग्रुप की 126, 124 व 127 किस्में अपना सकते हैं। यह पकने में 115 से 120 दिन का समय लेंगी।
तीन राज्यों में रकबा व उत्पादन
देश में वर्ष 2018 में धान का रकबा 43 मिलियन हेक्टेयर था। जिसमें करीब 111 मिलियन टन धान उत्पादन हुआ। इसमें से करीब 10.5 मिलियन टन चावल निर्यात होता है। जोकि ईरान, सउदी अरब, ईराक, कुवैत, यमन, यूके, यूएस व अमन आदि देशों में भेजा जाता है।
हरियाणा में वर्ष 2018 में धान का रकबा 1.19 मिलियन हेक्टेयर व उत्पादन 3.84 टन था। पंजाब में 2.75 मिलियन हेक्टेयर व उत्पादन 11 मिलियन टन था। पश्चिम उत्तर प्रदेश में रकबा 1.53 मिलियन हेक्टेयर व उत्पादन 3.8 मिलियन टन था। कुल चावल उत्पादन में इन तीनों राज्यों का करीब 18 मिलियन टन का योगदान रहा।