जानें एलोवेरा की खेती का गणित, इस महीने लगाएं पौधे, कम लागत में साबित होगा मुनाफे का सौदा
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हर्बल और कॉस्टमेटिक उत्पाद व दवा कंपनियों की बढ़ती मांग के साथ एलोवेरा की खेती का व्यावसायिक महत्व काफी बढ़ गया है। इस खेती का मुख्य लाभ यह है कि इसके लिए कम पानी और रखरखाव की जरूरत होती है।
उत्पादन की लागत कम है और एलोवेरा खेती में अधिक शुद्ध लाभ है। इसमें विटामिन और खनिजों के साथ एंटीबायोटिक और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो एलोवेरा को एक सुपरफूड बनाता है। एलोवेरा एक बहुत ही हार्डी पौधा है, जिसे सूखे क्षेत्र में भी उगाया जा सकता है।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मुताबिक एलोवेरा गर्म मौसम की फसल है। इसकी खेती आमतौर पर शुष्क क्षेत्र में न्यूनतम वर्षा और गर्म आर्द्र क्षेत्र में सफलतापूर्वक की जाती है। यह पौधा अत्यधिक ठंड की स्थिति के प्रति बहुत संवेदनशील है। शुष्क क्षेत्र और कम पानी की ठहराव वाली मिट्टी के साथ भूमि का उपयुक्त चयन आवश्यक है।
जमीन को जुताई कर तैयार करना चाहिए। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने को अंतिम जुताई के दौरान लगभग 15 से 20 टन सड़े गोबर की खाद डालें। इसकी खेती रेतीली से लेकर दोमट मिट्टी तक विभिन्न प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। हालांकि रेतीली मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी है।
अच्छी काली मिट्टी भी उपयुक्त है। भूमि चयन में हमें उन जमीनों का चयन करना चाहिए जो जमीनी स्तर थोड़ी ऊंचाई पर हों। यह जलभराव की स्थिति के प्रति संवेदनशील है, खेत में जल निकासी की व्यवस्था हो। मिट्टी का पीएच 8.5 होना चाहिए।
नाली और डोली पर 40 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए
बेहतर विकास के लिए एलोवेरा के पौधे जुलाई-अगस्त में लगाए जाते हैं। सिंचित स्थिति में पौधों को सर्दियों के महीनों को छोड़कर पूरे वर्ष लगाया जा सकता है। नाली और डोली पर 40 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए। छोटा पौधा 40 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जाना चाहिए। रोपण घनत्व 50 हजार प्रति हेक्टेयर होगा और दूूरी 40 गुणा 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए।
एलोवेरा, राइजोम कटिंग व छोटे पौधे से प्रोपगैटेड किया जाता है। इसकी वंश वृद्धि के लिए भूमिगत राइजोम को खोदा जाता है। राइजोम को पांच-पांच सेंटीमीटर काटा जाता है, जिसमें न्यूनतम दो से तीन गांठें होनी चाहिए। अंकुरित होने के बाद इसे बेड या विशेष कंटेनर में लगाया जाता है। इसी तरह छोटे पौधे को मूल पौधे से अलग किया जाता है और 50 गुणा 45 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जाना चाहिए।
राइजो कटिंग की लंबाई व छोटे पौधे की लंबाई 12 से 15 सेंटीमीटर होनी चाहिए। ध्यान रहे कि पौधे का दो तिहाई हिस्सा जमीन के अंदर हो। एक बार अंकुरित होने के बाद उनकी मुख्य खेत में रोपाई करें।