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विशेषज्ञ की सलाह: समय पर करें टमाटर के पौधों की छंटाई, बारिश के बाद करें छिड़काव

Sun, 11 Aug 2019 05:32 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 11 Aug 2019 05:32 PM IST
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Expert Advice For Farmers Dr Mohan Singh Tomato Cultivation Tomato Farming YSParmar University Solan
टमाटर - फोटो : अमर उजाला

टमाटर का सीजन चल रहा है और ऐसे में किसानों को टमाटर के पौधों को सुरक्षित रखने के लिए खास कदम उठाने जरूरी हैं। बारिश की वजह से टमाटर के पत्तों में सड़न रोग लग जाता है। इससे पत्ते हटाने जरूरी हो जाते हैं। यदि इन पत्तों की कटाई-छंटाई समय रहते न की गई तो पौधा सूख सकता है। इसलिए किसानों को सूख चुके पत्तों को हटा देना चाहिए। छिड़काव भी बारिश के बाद ही करें। इसके अलावा खेतों में पानी के निकास का उचित प्रबंध करें। पानी को खड़ा न रहने दें। 

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टमाटर में आजकल फल छेदक तथा माइट का आक्रमण हो सकता है। माइट की रोकथाम के लिए फेन्जाक्वीन मेजिस्टर 3.75 मिलीलीटर 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। फल छेदक की रोकथाम के लिए इन्डोक्साकार्ब या लैंडा साइलोथ्रिन 5 18.75 मिलीलीटर का घोल 15 लीटर पानी में बनाकर छिड़काव करें।
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नींबू प्रजातीय फलों तथा अनार में कैंकर रोग की रोकथाम के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 600 ग्राम तथा स्ट्रेप्टोसाइक्लीन 40 ग्राम का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। सेब में स्कैब, आल्टरनेरिया धब्बा, कोर रॉट, आकस्मिक पतझड़ तथा धब्बों की रोकथाम के लिए जिरम 600 मिलीलीटर प्रति 200 लीटर पानी या मैन्कोजेब फलोएबल 700 मिलीलीटर प्रति 200 लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें।
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सेब में करें कैल्शियम क्लोराइड का छिड़काव 
सेब में बीटर पिट की रोकथाम के लिए तथा पत्तों पर कड़ापन लाने के लिए फलों में कैल्शियम क्लोराइड का 800 प्रति 200 लीटर पानी के हिसाब से पत्तों पर छिड़काव करें। फूलों की खेती करने वाले किसान ग्लोडियोलस की कली रंग आने की अवस्था पर काटें तथा बाजार भेजने पर सुनिश्चित कर लें कि पौधों पर 2-3 पत्तों का जोड़ा बना रहे।

सेब की बिक्री धीमी है तो डर नहीं 
सेब की बिक्री धीमी है या फिर बाजार आपकी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल रहा तो घबराने की जरूरत नहीं। सेब के गुद्दे को संरक्षित कर इसे बाद में बेचा जा सकता है। इससे मोटी कमाई होने के आसार रहते हैं। इसके अलावा सेब, नाशपाती या अमरूद का इस्तेमाल जैम बनाने के लिए भी किया जा सकता है और जैम का इस्तेमाल हर मौसम में हो सकता है। 


ऐसे करें पशुओं का गलघोंटू से बचाव
बरसात में अक्सर पशुओं में गलघोंटू तथा लंगड़ा बुखार के लक्षण पाए जाते हैं। इसके बचाव के लिए पशुओं का टीकाकरण आवश्यक है। चरागाहों में आने वाले पशुओं में चिचड़ (टिक्स) और जुएं की अधिकता पाई जाती हैं। इससे बचाव के लिए जानवरों पर साइपरमेथ्रिन या एमीटरार घोल 2 मिलीलीटर 1 लीटर पानी का प्रयोग करें तथा इस घोल को एक सप्ताह उपरांत दोबारा दोहराएं। - विशेषज्ञ डॉ. मोहन सिंह डाक्टर यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी (सोलन) में नोडल ऑफिसर हैं। 

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