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धान की सीधी बिजाई करके पानी बचाया, घाटे का सौदा बनती जा रही खेती से मुनाफा कमाया

Mon, 05 Aug 2019 02:26 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चोपटा(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चोपटा(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 05 Aug 2019 02:26 PM IST
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agriculture, Saved water by direct seeding of paddy, earned profits from farming of deficit deal
हरियाणा के किसान - फोटो : अमर उजाला
वर्तमान समय में खेती करने के लिए सिंचाई के पानी की ज्यादा आवश्यकता होती है। कई बार मानसून की बेरुखी, नहरी पानी  की कमी और गिरते भूजल स्तर के कारण सिंचाई के पानी की कमी के कारण अक्सर फसल खराब हो जाती है और उत्पादन नगण्य हो जाता है। जिससे किसानों को खेती में घाटा लगता है।
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लेकिन गांव मोची वाली के प्रगतिशील किसान राम कुमार ओला ने धान की रोपाई विधि के बजाय वर्तमान वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई सीधी बिजाई विधि अपनाकर 40 प्रतिशत तक पानी की बचत की है तथा धान की बिजाई पर लगने वाले खर्च को बचाया है, उत्पादन भी बढ़ गया। किसान राम कुमार पिछले पांच साल से धान की सीधी बिजाई करके पानी का खर्च तो बचा ही रहा है व अन्य किसानों ने भी राम कुमार का अनुसरण कर सीधी बिजाई में जुट गए हैं। 
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कृषि विकास अधिकारी डॉ. बहादर राम गोदारा ने बताया कि मोचीवाली के किसान राम कुमार ने परंपरागत रोपाई विधि को दरकिनार कर सीधी बिजाई विधि को अपना रखा है। इसके अलावा कई अन्य किसानों ने भी सीधी बिजाई विधि को अपनाया है। उन्होंने बताया कि सीधी बिजाई से खेत की जुताई का खर्च व डीजल बचेगा। 30 से 40 प्रतिशत पानी की बचत होगी। धान में बकानी रोग भी नहीं लगता।
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रोपई विधि के बजाय सीधी बिजाई करने वाली फसल दस दिन पहले पक जाती है। सूखे की स्थिति में 15 जुलाई तक इस विधि से बिजाई कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मक्का एंव गेहूं अनुसंधान केंद्र मेक्सिको क्लाईमेंट चेंज एंड एग्रीकल्चर फूड सिक्योरिटी परियोजना के तहत करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान स्थित प्लेटफार्म से धान की सीधी बिजाई करने पर पूरा जोर दिया जा रहा है।

कृषि अधिकारियों की प्रेरणा से धान की सीधी बिजाई शुरू की

गांव मोचावाली के किसान राम कुमार  ने बताया कि बारिश की अनिश्चितता, नहरी पानी की कमी व भूमिगत जल के लगातार दोहन के कारण धान की फसल अक्सर  सिंचाई पानी के अभाव में नष्ट हो जाती थी, उत्पादन घट जाता था तो खेती घाटे का सौदा बनती जा रही थी। तथी तत्कालिन कृषि विकास अधिकारी ने उन्हें धान की परंपरागत रोपई विधि के बजाय धान की सीधी बिजाई विधि के बारे में बताया तथा एक दो जगह कृषि विभाग द्वारा बिजाई करवाने वाले स्थानों पर सीधी बिजाई वाले धान दिखाए व इस विधि के  बारें में विस्तार से जानकारी दी।

तब उसने पांच एकड़ भूमि मे मशीन द्वारा रोपन विधि के बजाय सीधी बिजाई की । जिससे उसे धान की पनीरी लगवाने के लिए आने वाले खर्च 3000 रूपये बच गए। तथा इसके अलावा जमीन में सिंचाई का पानी बच गया। किसान राम कुमार ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई सीधी बिजाई विधि से प्रति एकड़ आठ से दस किलोग्राम धान का बीज लगता है। बिना जुताई किए ही खेत में जीरो ड्रील मशीन से बिजाई की जा सकती है । इसके अलावा दूसरे तरीके नमी वाली जमीन में भी बिजाई की जा सकती है। बीज की गहराई दो या तीन सेंटीमीटर रखी जाती है।

बिजाई के बाद पहले सात दिन तक सिंचाई की जाती है। इसके बाद तीसरे दिन जब तक पूरे बीज का जमाव ना हो जाए। उसके बाद  हर सात दिन के बाद पानी दिया जाता है। इस प्रकार बिजाई से धान की बिजाई में 40 प्रतिशत पानी की बचत हो जाती है इसके अलावा पंजीरी लगवाने के लिए मजदूरी भी नहीं लगी व उत्पादन भी ज्यादा हुआ। इन्होंने बताया कि उसने गांव में सबसे पहले धान की बिजाई सीधी बिजाई विधि से की उसके बाद अन्य किसानों ने भी सीधी बिजाई का प्रयोग शुरू कर दिया जिसके परीणाम काफी सकारात्मक आए।
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