{"_id":"5d2d97888ebc3e6cf90fa95a","slug":"agriculture-jiva-amrit-beneficial-for-farming-and-crops","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं का बढ़िया विकल्प है जीवा अमृत, जानिए ये कैसे करेगा काम","category":{"title":"Agriculture","title_hn":"कृषि","slug":"agriculture"}}
रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं का बढ़िया विकल्प है जीवा अमृत, जानिए ये कैसे करेगा काम
Tue, 16 Jul 2019 02:53 PM IST
खुशबू गोयल
जगवीर शर्मा, अमर उजाला, चरखी दादरी
जगवीर शर्मा, अमर उजाला, चरखी दादरी
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 16 Jul 2019 02:53 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खेत में जीवा अमृत का प्रयोग करने से किसान को खाद और कीटनाशक दवा के छिड़काव की जरूरत नहीं पड़ेगी। जीवा अमृत सभी प्रकार की फसलों, सब्जियों व फलों की खेती में इस्तेमाल किया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो यह सोने पर सुहागा का काम करता है। इसके इस्तेमाल से जमीन में पड़े निष्क्रिय जीवाणु सक्रिय हो जाते हैं और जमीन की प्रकृति में भी बदलाव आने लगता है। वहीं, जमीन की रसायन खाद की आदत भी छूट जाती है।
आमतौर पर किसान खरीफ व रबी की फसलों में यूरिया, डीएपी, जिंक, सल्फेट एवं फास्फोरस का छिड़काव करते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इन ज्यादा रसायनों के इस्तेमाल से जमीन की प्रकृति लगातार खराब हो रही है। औसत पैदावार भी घटती जा रही है। कीट व अन्य बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ने लगता है। जब किसान यह रासायनिक खाद नहीं डालता है तो पैदावार नहीं होती। ऐसे में इन रसायनों के इस्तेमाल से जमीन में मौजूद लाखों सुक्ष्म जीवाणु निष्क्रिय बने रहते हैं जबकि ये फसल के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जीवा अमृत कीटनाशक दवाओं व रसायनों का बढ़िया विकल्प तैयार हो गया है। किसानों को रसायनों व कीटनाशक दवाओं को छोड़कर जीवा अमृत सोल्यूशन का इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी प्रकार के फल, सब्जी व फसल में इसका छिड़काव किया जा सकता है। इसका स्प्रे भी किया जा सकता है। बिजाई करते समय बीज में भी मात्रा अनुसार डाला जा सकता है। प्रति एकड़ 100 ग्राम सोल्यूशन बीज में मिलाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आमतौर पर किसान खरीफ व रबी की फसलों में यूरिया, डीएपी, जिंक, सल्फेट एवं फास्फोरस का छिड़काव करते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इन ज्यादा रसायनों के इस्तेमाल से जमीन की प्रकृति लगातार खराब हो रही है। औसत पैदावार भी घटती जा रही है। कीट व अन्य बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ने लगता है। जब किसान यह रासायनिक खाद नहीं डालता है तो पैदावार नहीं होती। ऐसे में इन रसायनों के इस्तेमाल से जमीन में मौजूद लाखों सुक्ष्म जीवाणु निष्क्रिय बने रहते हैं जबकि ये फसल के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।
विज्ञापन
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जीवा अमृत कीटनाशक दवाओं व रसायनों का बढ़िया विकल्प तैयार हो गया है। किसानों को रसायनों व कीटनाशक दवाओं को छोड़कर जीवा अमृत सोल्यूशन का इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी प्रकार के फल, सब्जी व फसल में इसका छिड़काव किया जा सकता है। इसका स्प्रे भी किया जा सकता है। बिजाई करते समय बीज में भी मात्रा अनुसार डाला जा सकता है। प्रति एकड़ 100 ग्राम सोल्यूशन बीज में मिलाया जा सकता है।
विज्ञापन
क्या है जीवा अमृत सोल्यूशन
जीवा अमृत का प्राकृतिक रूप से सोल्यूशन तैयार किया जाता है। 10 किलोग्राम देशी गाय के गोबर की खाद, 10 लीटर गोमूत्र, 200 लीटर पानी, दो किलोग्राम गुड़ और दो किलोग्राम बेसन के मिश्रण यह तैयार किया जाता है। जिस खेत में यह इस्तेमाल करना है, उस खेत के चारों कोनों से 250 ग्राम प्रति एकड़ मिट्टी लेकर इस मिश्रण में डाल देना चाहिए। इसे एक सप्ताह तक ड्रम या टब में रख दिया जाए। दिन में एक बार डंडा लेकर इसे क्लॉक वाइज घुमाया जाएं जिससे यह ठीक प्रकार से घुलनशील बन जाए। एक सप्ताह में यह जीवा अमृत सोल्यूशन बनकर तैयार हो जाएगा।
यूं करेगा यह जीवामृत काम
यह जीवामृत देशी गाय के गोबर से तैयार होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार देशी गाय के एक किलोग्राम गोबर में तीन लाख जीवाणु होते हैं जबकि भैंस के एक किलोग्राम गोबर में 1.25 लाख जीवाणु होते हैं, इसलिए देशी गाय के गोबर का इसके लिए चयन किया गया है। जीवामृत का इस्तेमाल करने से धीरे-धीरे जमीन प्राकृतिक रूप में आ जाएगी। जमीन को रसायनों व कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ेगी। तीन साल में जमीन की उपजाऊ शक्ति में तेजी से बढ़ोतरी हो सकेगी। इतना ही नहीं भूमि व वायु प्रदूषण भी कम होगा।
मिट्टी की गुणवत्ता व औसत पैदावार में भी बढ़ोतरी होगी। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खेत की मिट्टी में लाखों की संख्या में ऐसे जीवाणु होते हैं जो रासायनिक खाद के इस्तेमाल से निष्क्रिय बने रहते हैं वे भी धीरे-धीरे सक्रिय होकर जमीन की उपजाऊ शक्ति हो बढ़ाने में सहायक होंगे। किसान रसायनिक खाद का इस्तेमाल करने की बजाय खुद ही देशी गाय के गोबर से जीवामृत तैयार कर फल, सब्जी व रबी और खरीफ की सभी प्रकार की फसलों में इसका इस्तेमाल करें। इससे पैदावार भी बढ़ेगी और जमीन की रसायन खाद की आदत भी छूट जाएगी। जमीन के निष्क्रिय जीवाणु सक्रिय हो जाएंगे।
- डॉ. वेदप्रकाश, कृषि वैज्ञानिक
यूं करेगा यह जीवामृत काम
यह जीवामृत देशी गाय के गोबर से तैयार होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार देशी गाय के एक किलोग्राम गोबर में तीन लाख जीवाणु होते हैं जबकि भैंस के एक किलोग्राम गोबर में 1.25 लाख जीवाणु होते हैं, इसलिए देशी गाय के गोबर का इसके लिए चयन किया गया है। जीवामृत का इस्तेमाल करने से धीरे-धीरे जमीन प्राकृतिक रूप में आ जाएगी। जमीन को रसायनों व कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ेगी। तीन साल में जमीन की उपजाऊ शक्ति में तेजी से बढ़ोतरी हो सकेगी। इतना ही नहीं भूमि व वायु प्रदूषण भी कम होगा।
मिट्टी की गुणवत्ता व औसत पैदावार में भी बढ़ोतरी होगी। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खेत की मिट्टी में लाखों की संख्या में ऐसे जीवाणु होते हैं जो रासायनिक खाद के इस्तेमाल से निष्क्रिय बने रहते हैं वे भी धीरे-धीरे सक्रिय होकर जमीन की उपजाऊ शक्ति हो बढ़ाने में सहायक होंगे। किसान रसायनिक खाद का इस्तेमाल करने की बजाय खुद ही देशी गाय के गोबर से जीवामृत तैयार कर फल, सब्जी व रबी और खरीफ की सभी प्रकार की फसलों में इसका इस्तेमाल करें। इससे पैदावार भी बढ़ेगी और जमीन की रसायन खाद की आदत भी छूट जाएगी। जमीन के निष्क्रिय जीवाणु सक्रिय हो जाएंगे।
- डॉ. वेदप्रकाश, कृषि वैज्ञानिक