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बासमती चावल में बकानी रोग लग जाए तो विशेषज्ञों की सलाह लें और सावधानी बरतें, जानिए क्या है

Tue, 16 Jul 2019 03:08 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 16 Jul 2019 03:08 PM IST
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agriculture, farming, disease in basmati rice crops
फाइल फोटो
बासमती किस्मों में आए बकानी रोग ने किसानों की धड़कन बढ़ा दी है। यह ऐसा रोग है जिसका यदि नियंत्रण नहीं हो पाया तो एक के बाद एक पौधा ग्रसित होता जाता है। कई बार तो पूरा खेत चौपट होने पर जोतना पड़ सकता है। धान की 1401, 1121 व 1509 किस्मों में इसका असर ज्यादा है। हरियाणा के करनाल, यमुनानगर, फतेहाबाद, सिरसा में इस रोग का असर सामने आया है। इसके लिए जरूरी है कृषि वैज्ञानिक की सलाह लेकर उपचार करें।
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क्या है बकानी रोग
बकानी रोग फंगल डिसीज है। इस रोग पर कोई भी केमिकल प्रभावी नहीं। खेत में पौधा बढ़वार करता है। बाद में सूखकर मर जाता है। इस साल तापमान अधिक होने व प्री- मानसून की बारिश नहीं होने तथा किसानों का किस्मों को समय से पहले रोपाई करवा देना भी इस रोग का कारण रहा है।
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ऐसे करें रोकथाम

बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम - मेरठ के प्रधान वैज्ञानिक डा. रितेश ने बताया कि बकानी ग्रस्त पौधे को जड़ से निकाल बाहर जमीन में दबा दें या जला दें। दो से तीन किलो ट्र्राइकोड्रमा बायो पेस्टीसाइड को गोबर की खाद में मिलाकर 24 से 36 घंटे के लिए छाया में रखें, प्रति एकड़ दो किलो मात्रा डाल दें।

बिजाई से पहले ही उपचार
अनुसंधान वैज्ञानिक का कहना है कि जिस खेत में एक पौधे में भी बकानी रोग आया हो उस खेत का अगले वर्ष बीज इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। रोग के इलाज का सबसे प्रभावी तरीका बोने से पहले बीज का उपचार है। उसके बाद दूसरी मुख्य बात है कि सूखे में पौध उखाड़ी तो यह रोग ज्यादा आता है। पानी भरके ही नर्सरी उखाड़ें।

पनीरी का उपचार अवश्य करें जिससे 90 प्रतिशत इस रोग से बचाव हो जाता है। पनीरी के उपचार के लिए जब गुच्छी उखाड़ लेते हैं उसकी जड़ों को आधा घंटा कार्बन्डाजिम अथवा ट्राइकोड्रमा के घोल में डुबोकर रखें। यह तीन काम करें और बीज अच्छा है तो 95 प्रतिशत यह बीमारी फसल में नहीं आएगी।

 
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