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जानिए, बरसात के मौसम में बैंगन की फसल के लिए कैसे करें खेत तैयार, चाहिएं तेजधार औजार

Thu, 25 Jul 2019 03:33 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 25 Jul 2019 03:33 PM IST
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Agriculture Experts Tips to prepare farms for crops of brinjal plants
फाइल फोटो
बैंगन की पिछली फसल के कच्चे फलों को तोड़कर बाजार में बेचने के लिए भेज दें। फलों को तोड़ने के लिए किसी चाकू या तेजधार वाले औजार का प्रयोग करें। जिससे तोड़ते समय पौधों को क्षति न हो। आवश्यकता होने पर सिंचाई करें। फल व तना छेदक कीड़े के लगने पर ग्रसित फलों को तोड़कर नष्ट कर दें और इसके बाद 75 ग्राम स्पाइनोसेड (ट्रेसर 45 एससी) को प्रति एकड़ 80 लीटर पानी में घोलकर 15 दिन के अंतर पर तीन छिड़काव करें। दवा प्रयोग करने के बाद फलों को 8 से 10 दिन तक खाने के काम में न लाएं।
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हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मुताबिक वर्षा ऋतु की फसल के लिए खेत की तैयारी करें। इसकी उन्नत किस्मों, बीआर -112, हिसार श्यामल व हिसार प्रगति को प्रयोग में  लाएं। नर्सरी में पौध इस महीने तक तैयार हो जाएगी। खेत को तैयार कर क्यारियों में बांट लें। एक एकड़ खेत में लगभग 10 टन गोबर की खाद बिखेर दें और जुताई कर दें। पौध रोपण से पहले 40 किलोग्राम नाइट्रोजन (87 किलोग्राम यूरिया), 20  किलोग्राम फास्फोरस (125 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट) और 10 किलोग्राम पोटाश (17 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश) प्रति एकड़ दें।
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कतारों का फासला लंबी किस्मों में 60 सेंटीमीटर और गोल किस्मों में 75 सेंटीमीटर रखें। पौधे से पौधे की दूरी 60 सेंटीमीटर रखें। पौधरोपण के बाद सिंचाई अवश्य करें। विषाणु रोग से बचाव के लिए शुरू से ही कीटनाशक दवाएं प्रयोग में लें।
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रोगों से बचाव के लिए ये करें उपाय

हरा तेला, सफेद मक्खी, गोभ व फल छेदक कीड़े आदि बैंगन की फसल में नुकसान पहुंचाते हैं। रस चूसने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए 300 - 400 मिलीलीटर मैलाथियान 50 ईसी को 200 -250 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ पर छिड़कें। फल लगने शुरू होते ही बारी - बारी से सिंथेटिक पाइरेथ्राइड (80 मिलीलीटर फैनवेलरेट) 20 ईसी या 200 मिलीलीटर डेल्टामैथ्रीन 2.8 ईसी को 200 लीटर पानी में प्रति एकड़ छिड़कें ताकि फल छेदक का नियंत्रण भी हो जाए। सिंथेटिक पाइरेथ्राइड का छिड़काव 21 दिन और दूसरे कीटनाशकों का 15 दिन के अंतर पर दोहराएं।

अरबी में खरपतवार निकालें और मिट्टी चढ़ाएं
अरबी की फसल में आवश्यकता पड़ने पर सिंचाई करें, खरपतवार निकालें और मिट्टी चढ़ाएं। खड़ी फसल में नाइट्रोजन वाली खाद (यूरिया) बिजाई के लिए लगभग 7-8 सप्ताह बाद मिट्टी चढ़ा दें। बरसात की फसल की बिजाई का समय जून- जुलाई माह है। एक एकड़ में बिजाई करने के लिए लगभग 300 - 400 किलोग्राम कंदों की आवश्यकता होती है। कंदों की बिजाई करने की दूरी 45 से 60 सेंटीमीटर कतारों में और 30 सेंटीमीटर पौधों में रखते हैं।
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