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रोज पांच घंटे की तैयारी से लक्ष्य संभव
Hamirpur
Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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हमीरपुर। मनुष्य को जीवन में कुछ हासिल करने के लिए मेहनत, तपस्या और लगन की जरूरत होती है। एक विद्यार्थी को पढ़ाई के लिए लगातार 10 साल तक 5 घंटे देने पर ही वह लक्ष्य पाने में सफल हो सकता है।
यह बात स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज के प्रतिभा विकास वर्ग के चार दिवसीय कार्यक्रम के समापन पर लोनिवि उरई के सहायक अभियंता अखिलेश चौहान ने कही। उन्होंने कहा कि सफलता की सीढ़ी में चढ़ने के लिए निरंतरता और लगन की जरूरत है। देश सेवा के लिए इंजीनियरिंग एक बेहतर विकल्प है। इस मौके पर सरस्वती शरण द्विवेदी ने कहा कि पुस्तक से हटकर व्यक्तित्व का विकास हो सके। इसलिए ऐसे शिविर लगाने की जरूरत है। उन्होंने बच्चों को सामान्य ज्ञान, भौगोलिक व ऐतिहासिक समाचार पढ़ने की भी सलाह दी। इसके पहले प्रशिक्षण में 109 छात्रों के साथ विद्यालय के शिक्षकों ने सिंह महेश्वर एवं संगम में ध्यान योग साधना की। प्रधानाचार्य रामशंकर ने विद्यालय आख्या के साथ चार दिवसीय शिविर की आख्या प्रस्तुत की। इस मौके पर अरिमर्दन सिंह, वेदप्रकाश शुक्ल, बलराम सिंह, रमेश शुक्ल, मातादीन त्रिपाठी, गजेंद्र सिंह, अरविंद पटेरिया, हरप्रसाद राजपूत, आरपी गुप्ता, राजेश शुक्ला, शिवनाथ साहू, कमलकांत मिश्रा, रामबिहारी शुक्ल, लक्ष्मीशंकर द्विवेदी मौजूद रहे।
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यह बात स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज के प्रतिभा विकास वर्ग के चार दिवसीय कार्यक्रम के समापन पर लोनिवि उरई के सहायक अभियंता अखिलेश चौहान ने कही। उन्होंने कहा कि सफलता की सीढ़ी में चढ़ने के लिए निरंतरता और लगन की जरूरत है। देश सेवा के लिए इंजीनियरिंग एक बेहतर विकल्प है। इस मौके पर सरस्वती शरण द्विवेदी ने कहा कि पुस्तक से हटकर व्यक्तित्व का विकास हो सके। इसलिए ऐसे शिविर लगाने की जरूरत है। उन्होंने बच्चों को सामान्य ज्ञान, भौगोलिक व ऐतिहासिक समाचार पढ़ने की भी सलाह दी। इसके पहले प्रशिक्षण में 109 छात्रों के साथ विद्यालय के शिक्षकों ने सिंह महेश्वर एवं संगम में ध्यान योग साधना की। प्रधानाचार्य रामशंकर ने विद्यालय आख्या के साथ चार दिवसीय शिविर की आख्या प्रस्तुत की। इस मौके पर अरिमर्दन सिंह, वेदप्रकाश शुक्ल, बलराम सिंह, रमेश शुक्ल, मातादीन त्रिपाठी, गजेंद्र सिंह, अरविंद पटेरिया, हरप्रसाद राजपूत, आरपी गुप्ता, राजेश शुक्ला, शिवनाथ साहू, कमलकांत मिश्रा, रामबिहारी शुक्ल, लक्ष्मीशंकर द्विवेदी मौजूद रहे।
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