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महीनों पहले भेजा मांग पत्र, अब तक नहीं आई दवाएं
Badaun
Updated Mon, 20 May 2013 05:31 AM IST
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बदायूं। जिला अस्पताल में बिना दवा के मरीजों का इलाज हो रहा है। कई जीवन रक्षक दवाओं की पहले से ही किल्लत थी। अब सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली एंटीबायोटिक दवाएं भी यहां खत्म हो गई हैं। विकल्प के तौर पर डॉक्टर दूसरी दवाओं से काम चला रहे हैं। हालांकि महीनों पहले दवा सप्लाई करने वाली कंपनियों को मांग पत्र भेजा जा चुका है लेकिन अब तक दवाएं नहीं आई हैं। बीमारी से मुक्ति पाने की उम्मीद से जिला अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए पहले तो डॉक्टर नहीं मिलते और अगर मिल भी जाएं तो मर्ज की दवा नहीं मिलती।
जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं को देखकर लगता है कि यहां सुधार की कोशिश ही नहीं हो रही। दूर ग्रामीण क्षेत्रों से उम्मीद के साथ आने वाले मरीजों को यहां दवा नहीं मायूसी मिलती है। कुछ जरूरी दवाओं की स्थानीय स्तर पर खरीद करके काम जरूर चलाया जा रहा है लेकिन यह गरीब की पहुंच से दूर हैं। अस्पताल में दवाओं की किल्लत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां महीनों से कफ सीरप नहीं है। कान की तकलीफों में आई ड्रॉप का इस्तेमाल किया जा रहा है। महीनों से पैरासीटामॉल, जेंटामाइसिन, आयरन टेबलेट, सेप्ट्रॉन, एंपीसिलीन आदि दवाएं नहीं हैं। डायबिटीज की दवा मैकफोरमिन महीनों से स्टाक में नहीं है।
चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चों को दी जाने वाली कोई भी एंटीबायोटिक दवा जिला अस्पताल के स्टाक में नहीं है। इसके बाद भी यहां मरीजों का इलाज हो रहा है। जिला अस्पताल में दवाओं की कमी की यह स्थिति पिछले पांच महीने से कायम है। जिन दवाओं की सबसे ज्यादा बीमारियों में जरूरत होती है वह स्टाक में है ही नहीं। ऐसे में डॉक्टर यहां आने वाले मरीजों को विकल्प के तौर पर दूसरी दवाएं लिख रहे हैं।
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वर्जन-
कुछ दवाओं की कमी जरूर है, लेकिन हम काम चला रहे हैं। रेट कंट्रोल की वजह से दवाओं की सप्लाई में देरी हो रही है। हम कई बार डिमांड भेज चुके हैं। फिलहाल जरूरी दवाओं की स्थानीय स्तर पर खरीद की जा रही है।-डॉ.जे पी भारद्वाज, सीएमएस
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जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं को देखकर लगता है कि यहां सुधार की कोशिश ही नहीं हो रही। दूर ग्रामीण क्षेत्रों से उम्मीद के साथ आने वाले मरीजों को यहां दवा नहीं मायूसी मिलती है। कुछ जरूरी दवाओं की स्थानीय स्तर पर खरीद करके काम जरूर चलाया जा रहा है लेकिन यह गरीब की पहुंच से दूर हैं। अस्पताल में दवाओं की किल्लत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां महीनों से कफ सीरप नहीं है। कान की तकलीफों में आई ड्रॉप का इस्तेमाल किया जा रहा है। महीनों से पैरासीटामॉल, जेंटामाइसिन, आयरन टेबलेट, सेप्ट्रॉन, एंपीसिलीन आदि दवाएं नहीं हैं। डायबिटीज की दवा मैकफोरमिन महीनों से स्टाक में नहीं है।
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चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चों को दी जाने वाली कोई भी एंटीबायोटिक दवा जिला अस्पताल के स्टाक में नहीं है। इसके बाद भी यहां मरीजों का इलाज हो रहा है। जिला अस्पताल में दवाओं की कमी की यह स्थिति पिछले पांच महीने से कायम है। जिन दवाओं की सबसे ज्यादा बीमारियों में जरूरत होती है वह स्टाक में है ही नहीं। ऐसे में डॉक्टर यहां आने वाले मरीजों को विकल्प के तौर पर दूसरी दवाएं लिख रहे हैं।
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कुछ दवाओं की कमी जरूर है, लेकिन हम काम चला रहे हैं। रेट कंट्रोल की वजह से दवाओं की सप्लाई में देरी हो रही है। हम कई बार डिमांड भेज चुके हैं। फिलहाल जरूरी दवाओं की स्थानीय स्तर पर खरीद की जा रही है।-डॉ.जे पी भारद्वाज, सीएमएस