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मानव की दुर्दशा से संतों को होती है पीड़

Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
Badaun
Badaun Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। एसके फील्ड में चल रहे सद्भावना समागम में मानव की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए साकार विश्व हरि भाले बाबा ने कहा कि मानव अपने कर्मों के कारण ही दुख भोग रहा है। इंसान सद्कर्मों से दुखों और कष्टों से छुटकारा पा सकता है।
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भक्तों से खचाखच भरे पांडाल में साकार विश्व हरि भोले बाबा ने कहा कि वर्तमान समय में मानव की दुर्दशा देखकर संतों को पीड़ होती है कि मानव अपने कर्मों के आधार पर दुगर्ति को प्राप्त हो रहा है। इस दुगर्ति से बचने के लिए इंसान को अपने कमों को सत्कर्म में बदलना होगा। सत्य का पालन करते हुए सद्संगति करनी होगी। यह क्रिया जब व्यवहार में आती है तो परिणाम स्वयं दिखाई देता है। पूर्व के संस्कारों के आधार पर ही मानव दुखी, सुखी, धनवान या गरीब होता है। वर्तमान से ही भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। वर्तमान में इतना सत्कर्म करना चाहिए कि दुष्कर्म रूपी राक्षस का खात्मा हो जाए। सत्कर्म करने से पाप कर्म स्वयं खत्म हो जाएंगे। यह तभी संभव है जब हम अपने ईष्टदेव साकार विश्व हरि की आज्ञा को मानकर इस सद्संगति का अभ्यास करते रहें। ऐसा करने से आत्मिक जागृति होगी तभी मानव जीवन के लक्ष्य व मूल्यों की महत्ता को जानकर जीवन सार्थक हो जाएगा।
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आज के सत्संग में बंटी बाबू, विनीता सिंह, प्रेमलता सिंह, आकाश, मधु आदि ने भजन प्रस्तुत कर संगत को भक्तिमय कर दिया।
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