{"_id":"119-104995","slug":"Badaun-104995-119","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेला ककोड़ा की अाेर दाौड़े अफसर"}
मेला ककोड़ा की अाेर दाौड़े अफसर
Badaun
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:34 AM IST
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कादरचौक/बदायूं। अमर उजाला में सोमवार के अंक में छपी खबर ‘गंगा उफनाई, ककोड़ा मेला क्षेत्र में कटान’ को एडीएम प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव ने गंभीरता से लिया और मेला स्थल का दौरा किया। बाढ़ खंड के जेई दिलशाद को नियमित नरौरा डेम के संपर्क में रहने का निर्देश दिए। वहीं छोड़ने की स्थिति में पत्र लिखने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि कासगंज की ओर की सड़क का काम न होने पर भी वहां के अधिकारियों को फैक्स किया जाएगा।
मेला स्थल पहुंचे बाढ़ खंड के एई गंगासिंह ने बताया कि गंगा में इस समय दस हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे पानी में उतार-चढ़ाव बन रहा है। ढाई हजार क्यूसेक पानी होने पर यह बंद हो जाएंगे। 30 अक्तूबर से 13 नवंबर तक पानी का डिस्चार्ज कम रहेगा। नहरों में सिल्ट के कारण नहरों का पानी रोककर इधर छोड़ दिया गया था। स्नान घाट मुख्य मार्ग से पूरब दिशा की ओर कर दिया गया है।
इस अवसर पर बाढ़ खंड के जेई दिलशाद डीपीआरओ राजेश यादव, एसडीएम प्रदीप कुमार, तहसीलदार राजमणि मिश्रा, एएमए हरिपाल सिंह यादव, कार्य अधिकारी महावीर सिंह यादव, जेई संजय शर्मा, हरिओम, एपी कश्यप, मेला इंचार्ज यशवीर सिंह, सुधीर यादव आदि भी रहे।
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गंगा घाट और बढ़ाने की जरूरत
गंगा स्नान के लिए मुख्य मार्ग से पूरब की ओर घाट की लंबाई रहेगी। पश्चिम में खतरा के कारण स्नान को प्रतिबंध रहेगा। गेट से पूर्व की ओर लगभग 600 मीटर तक स्नान घाट बढ़ाया जा रहा है। भीड़ को देखते हुए पहले कम स्थान को और बढ़ाया जा सकता है।
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मेला की सफाई को लगेंगे 230 सफाईकर्मी
डीपीआरओ राजेश यादव ने बताया कि 230 सफाई कर्मवारी मेला की सफाई व्यवस्था में लगेगे। जिनमें से नगर पालिका और टाउन एरिया से 50 जिला पंचायत से 30 पंचायतीराज विभाग के 150 सफाई कर्मचारी मेला की गंदगी को दूर करने में लगेंगे। जिनको अलग-अलग सेक्टरों की जिम्मेदारी मिलेगी। काम में लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। वहीं मेला परिसर के पास ही शौचालय भी बनवाए जाएंगे।
0000000000 लगाए जाएंगे 30 गोताखोर
मेला के दौरान जिला पंचायत 30 गोताखोंरों को लगाया जाएगा। जो इस क्षेत्र से बाकिफ होंगे और तैरने और डूबते लोगों को बचाने में निपुण होंगे। इसके अलाबा फ्लड पीएसी की प्लाटून अलग से गंगा की निगरानी में लगेगी।
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छिड़काव न होने से एडीएम नाराज
मेला की सड़कों पर पानी का लगातार छिड़काव न होने से फूस पर आधारित सड़के उखड़ रही हैं। एडीएम प्रशासन ने सखानू, कुवरगांव, फैजगंज बेहटा, बदायूं, बिल्सी, उझानी से पानी के टैंकर न पहुंचने पर नोडल अधिकारी को तुरंत संपर्क करके टैंकर मंगाने को कहा।
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मेला स्थल पहुंचे बाढ़ खंड के एई गंगासिंह ने बताया कि गंगा में इस समय दस हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे पानी में उतार-चढ़ाव बन रहा है। ढाई हजार क्यूसेक पानी होने पर यह बंद हो जाएंगे। 30 अक्तूबर से 13 नवंबर तक पानी का डिस्चार्ज कम रहेगा। नहरों में सिल्ट के कारण नहरों का पानी रोककर इधर छोड़ दिया गया था। स्नान घाट मुख्य मार्ग से पूरब दिशा की ओर कर दिया गया है।
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इस अवसर पर बाढ़ खंड के जेई दिलशाद डीपीआरओ राजेश यादव, एसडीएम प्रदीप कुमार, तहसीलदार राजमणि मिश्रा, एएमए हरिपाल सिंह यादव, कार्य अधिकारी महावीर सिंह यादव, जेई संजय शर्मा, हरिओम, एपी कश्यप, मेला इंचार्ज यशवीर सिंह, सुधीर यादव आदि भी रहे।
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गंगा घाट और बढ़ाने की जरूरत
गंगा स्नान के लिए मुख्य मार्ग से पूरब की ओर घाट की लंबाई रहेगी। पश्चिम में खतरा के कारण स्नान को प्रतिबंध रहेगा। गेट से पूर्व की ओर लगभग 600 मीटर तक स्नान घाट बढ़ाया जा रहा है। भीड़ को देखते हुए पहले कम स्थान को और बढ़ाया जा सकता है।
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मेला की सफाई को लगेंगे 230 सफाईकर्मी
डीपीआरओ राजेश यादव ने बताया कि 230 सफाई कर्मवारी मेला की सफाई व्यवस्था में लगेगे। जिनमें से नगर पालिका और टाउन एरिया से 50 जिला पंचायत से 30 पंचायतीराज विभाग के 150 सफाई कर्मचारी मेला की गंदगी को दूर करने में लगेंगे। जिनको अलग-अलग सेक्टरों की जिम्मेदारी मिलेगी। काम में लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। वहीं मेला परिसर के पास ही शौचालय भी बनवाए जाएंगे।
0000000000 लगाए जाएंगे 30 गोताखोर
मेला के दौरान जिला पंचायत 30 गोताखोंरों को लगाया जाएगा। जो इस क्षेत्र से बाकिफ होंगे और तैरने और डूबते लोगों को बचाने में निपुण होंगे। इसके अलाबा फ्लड पीएसी की प्लाटून अलग से गंगा की निगरानी में लगेगी।
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छिड़काव न होने से एडीएम नाराज
मेला की सड़कों पर पानी का लगातार छिड़काव न होने से फूस पर आधारित सड़के उखड़ रही हैं। एडीएम प्रशासन ने सखानू, कुवरगांव, फैजगंज बेहटा, बदायूं, बिल्सी, उझानी से पानी के टैंकर न पहुंचने पर नोडल अधिकारी को तुरंत संपर्क करके टैंकर मंगाने को कहा।