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कश्मीर मुद्दा: अब यूएनएचआरसी में भी हारा पाक, सदस्य देशों ने नहीं दिया साथ

Fri, 20 Sep 2019 12:21 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: देव कश्यप Updated Fri, 20 Sep 2019 12:21 AM IST
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Yet another Pakistan propaganda fails at the international level in UNHRC
इमरान खान

कश्मीर मुद्दे पर दुनियाभर से जलालत मिलने के बाद भी पाकिस्तान नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। बृहस्पतिवार को भी उसे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में भारत के सामने कूटनीतिक हार का सामना करना पड़ा। दरअसल, वह यूनएचआरसी में कश्मीर पर प्रस्ताव पेश करना चाह रहा था लेकिन आखिरी दिन अंतिम वक्त तक वह इसके लिए जरूरी देशों का समर्थन नहीं जुटा सका। ज्यादातर सदस्य देशों ने कश्मीर पर प्रस्ताव लाने के लिए पाक का समर्थन करने से इनकार कर दिया।

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यूएनएचआरसी में किसी प्रस्ताव को पेश करने के लिए 47 सदस्य देशों में से 16 का समर्थन जरूरी है, लेकिन पाक इतने देशों का साथ भी नहीं जुटा सका। जेनेवा में यूएनएचआरसी का 42वां सत्र चल रहा है। पाकिस्तान इस सत्र में कश्मीर पर प्रस्ताव पेश कर इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाना चाह रहा था लेकिन उसके मंसूबे पूरे नहीं हो सके।

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इससे पहले 10 सितंबर को पाक ने यूएनएसआरसी में कश्मीर की स्थिति पर बयान दिया था। इसमें उसने 60 देशों के समर्थन की बात कही थी, लेकिन उन देशों की जानकारी नहीं दे पाया था। भारत और पाक दोनों यूएनएचआरसी के सदस्य हैं। पाक का कार्यकाल इसी साल खत्म हो रहा है जबकि भारत 2021 तक इस वैश्विक संस्था का सदस्य रहेगा।

24 घंटे में दूसरा झटका
पाकिस्तान को 24 घंटे के अंदर दूसरा बड़ा झटका लगा है। इससे पहले बुधवार को यूरोपीय यूनियन की संसद ने जम्मू-कश्मीर मसले पर कहा था कि भारत में चांद से आतंकी नहीं आते। पाकिस्तान क्षेत्र में शांति स्थापित करे और कश्मीर मसले को भारत से बातचीत के जरिये सुलझाए।

   

 

बिसारिया के नेतृत्व में भारत ने भेजा था दल

भारत ने जम्मू-कश्मीर पर पक्ष बताने के लिए पाकिस्तान में पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया के नेतृत्व में राजनयिकों का दल यूएनएचआरसी भेजा था। दल ने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से मिलकर भारत की स्थिति के बारे में बताया। यूएनएचआरसी में चर्चा के दौरान भारत की प्रथम सचिव कुमम मिनी देवी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हमारा फैसला भारत का संप्रभु और आंतरिक मामला है। इसकी गलत व्याख्या कर पाक सच नहीं छिपा सकता। 

क्या कहता है नियम
यूएनएचआरसी के नियम के अनुसार, किसी भी देश के प्रस्ताव पर कार्रवाई से पहले न्यूनतम समर्थन जरूरी है। पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने जेनेवा रवाना होने से पहले कश्मीर पर प्रस्ताव का वादा किया था। यूएनएचआरसी में इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) के 15 देश हैं और उसे उम्मीद थी कि वह इनका समर्थन जुटा लेगा।

पाक के पास थे तीन विकल्प

यूएनएचआरसी में पाकिस्तान के पास तीन विकल्प थे, प्रस्ताव, बहस या विशेष सत्र। प्रस्ताव इस विकल्प से बाहर हो गया। विशेष सत्र सबसे मजबूत विकल्प हो सकता है, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, सामान्य सत्र 27 सितंबर तक चलेगा। इसके बीच विशेष सत्र नहीं हो सकता। बहस के लिए कम से कम 24 देशों के समर्थन की जरूरत होती है जो असंभव है। सूत्रों ने कहा कि कश्मीर मामला आठ सप्ताह बीतने के बाद न तो तत्काल जरूरी है और न गंभीर है। भारत ने परिषद और सदस्य देशों को सूचित किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी।
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