China Party Congress: अमीरों पर चल सकता है जिनपिंग का डंडा, भाषण के बाद चीन के धनी तबकों में खौफ
शी ने अपने भाषण में बार-बार ‘कॉमन प्रोस्परिटी’ (साझा समृद्धि) का जिक्र किया। उन्होंने कहा- ‘हम धन संग्रह के स्रोतों और आमदनी के वितरण को सख्त नियमों के दायरे में रखेंगे। हम कानूनी ढंग से कमाए गए धन को संरक्षण देंगे।
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बीते रविवार को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 20वीं कांग्रेस (महाधिवेश) के मौके पर दिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भाषण से देश के धनी तबकों में चिंता बैठ गई है। शी ने भाषण में ऐसी बातें कहीं, जिनसे संकेत मिला कि अब धनी लोगों को और भी ज्यादा निशाना बनाया जाएगा। शी जिनपिंग की सरकार इसके पहले हाई टेक सेक्टर, प्रोपर्टी सेक्टर, कोचिंग कारोबार, ऑनलाइन गेमिंग आदि जैसे क्षेत्रों पर अपना डंडा चला चुकी है।
शी ने अपने भाषण में बार-बार ‘कॉमन प्रोस्परिटी’ (साझा समृद्धि) का जिक्र किया। उन्होंने कहा- ‘हम धन संग्रह के स्रोतों और आमदनी के वितरण को सख्त नियमों के दायरे में रखेंगे। हम कानूनी ढंग से कमाए गए धन को संरक्षण देंगे, लेकिन अत्यधिक आय को एडजस्ट करेंगे और गैर कानूनी आमदनी पर रोक लगाई जाएगी।’ जानकारों का कहना है कि चीन में साझा समृद्धि की धारणा नई नहीं है। लेकिन हाल के वर्षों में शी जिनपिंग ने इस पर ज्यादा सख्ती से अमल शुरू कर दिया है।
आगे शी का क्या इरादा है, इस बारे में अभी कोई ब्योरा नहीं दिया गया है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि धनी लोगों पर कई तरह के नए टैक्स लगाए जाएंगे, ताकि उससे हासिल धन से गरीब परिवारों की मदद की जाए, रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा किए जाएं, सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाया जाए, और बेहतर सार्वजनिक सेवाएं प्रदान की जाएं।
कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि आने वाले दिनों में निजी उद्यमियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नेटिक्सिस नाम की एजेंसी की एशिया-प्रशांत क्षेत्र की प्रमुख अर्थशास्त्री एलिसिया गार्सिया हेरेरो ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘धनी लोगों को चेतावनी दी गई है। वैसे अभी चीन को जिन आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, उसे देखते हुए संभावना यही है कि धन के पुनर्वितरण की नीति पर धीमी गति से और सावधानी के साथ अमल किया जाएगा।’
बीसवीं कांग्रेस के अंत में शी को फिर से सीपीसी का महासचिव चुन लिए जाने की संभावना है। शी ने 2049 तक चीन को ‘महान आधुनिक समाजवादी राष्ट्र’ बनाने का लक्ष्य घोषित कर रखा है। इस सिलसिले में आर्थिक गैर-बराबरी से निपटना उनकी मुख्य चुनौती है। हाल के दशकों में चीन में गैर-बराबरी तेजी से बढ़ी है। जानकारों के मुताबिक शी अब इस समस्या का समाधान ढूंढना चाहते हैं।
लेकिन क्या इसके लिए चीन सरकार रॉबिन हुड स्टाइल में धनी लोगों से धन छीन कर गरीबों में बाटेंगी, ये सवाल यहां समृद्ध लोगों को परेशान किए हुए है। अपने पहले के भाषणों में शी कह चुके हैं कि मोनोपॉली कायम कर चुके उद्योगों को निशाना बनाया जाएगा। इसके अलावा भ्रष्टाचार, इनसाइडर ट्रेडिंग, शेयर बाजार में हेरफेर, वित्तीय धोखाधड़ी और कर चोरी से कमाए गए धन को भी हाल में निशाना बनाया गया है।
वित्तीय फर्म साउथ-वेस्ट सिक्युरिटीज के विश्लेषक यी फान और वांग रुनमेंग ने कहा है कि जायदाद और ऊंची आय पर अब अधिक टैक्स लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा- ‘चीन में परिवारों के धन में आवास का बड़ा हिस्सा है। सरकार सस्ते मकान निर्माण को प्राथमिकता देते हुए अब प्रोपर्टी टैक्स बढ़ा सकती है। इनके अलावा कैपिटल गेन्स टैक्स और उत्तराधिकार कर भी लगाए जा सकते हैँ।