{"_id":"60a015f18ebc3e8d3a6eee9d","slug":"world-leaders-are-worried-about-the-internet-becoming-a-weapon-of-hate","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोशल मीडिया: घृणा फैलाने का हथियार बन रहे इंटरनेट को लेकर चिंता","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
सोशल मीडिया: घृणा फैलाने का हथियार बन रहे इंटरनेट को लेकर चिंता
Sun, 16 May 2021 12:11 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, वेलिंगटन।
एजेंसी, वेलिंगटन।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 16 May 2021 12:11 AM IST
सार
- ऑनलाइन कट्टरपंथ के खिलाफ शुरू वैश्विक पहल में अमेरिका पहली बार शामिल
- दुनियाभर में चरमपंथी हिंसा के ऑनलाइन प्रसार की घटनाएं बढ़ रही हैं
विज्ञापन
सोशल मीडिया
- फोटो : ट्विटर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिका शनिवार को पहली बार दुनिया भर में प्रौद्योगिकी कंपनियों और सरकारों के नेताओं के साथ वर्चुअल रूप से जुड़ा ताकि चरमपंथी हिंसा के ऑनलाइन प्रसार को रोकने के बेहतर तरीके तलाश किए जा सकें।
विज्ञापन
इस बैठक में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी शामिल हुए जिन्होंने आतंकियों द्वारा नफरत फैलाने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में करने को लेकर चिंता जताई।
विज्ञापन
न्यूजीलैंड में श्वेत वर्चस्व की विचारधारा रखने वाले एक शख्स द्वारा 51 मुस्लिम श्रद्धालुओं की हत्या को फेसबुक पर लाइव स्ट्रीमिंग करने के दो साल बाद मैक्रों ने कहा कि आतंकवादी इंटरनेट का इस्तेमाल नफरत फैलाने के लिए एक हथियार के रूप में कर रहे हैं।
विज्ञापन
अपने-अपने देशों में जानलेवा हमलों के बाद मैक्रों व न्यूजीलैंड की पीएम जेसिंडा अर्डर्न ने इस वैश्विक पहल की शुरुआत की। ‘क्राइस्टचर्च कॉल’ नामक इस पहल में इस साल पहली बार अमेरिका व चार अन्य देश शामिल हुए।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा, लोगों को कट्टर बनाने और आतंकी संगठनों में भर्ती करने के लिए हिंसक चरमपंथियों द्वारा इंटरनेट के इस्तेमाल को रोकना अमेरिका की अहम प्राथमिकता है। इसमें गूगल, फेसबुक, ट्विटर और अमेजन समेत 50 से अधिक देशों की प्रौद्योगिकी कंपनियां शामिल हैं।
ब्रिटेन ने हटाई 3 लाख से अधिक आतंकी सामग्री
ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने एक वीडियो में कहा कि अकेले उनके देश में इंटरनेट से पिछले एक दशक में तीन लाख से अधिक आतंकी सामग्री हटाई गई जिसे उन्होंने नफरत की सुनामी बताया। अर्डर्न ने कहा कि इस पहल की शुरुआत के बाद से सरकारों और प्रौद्योगिकी कंपनियों ने हिंसक चरमपंथी सामग्री ऑनलाइन चिन्हित करने के कुछ मामलों में सहयोग किया है।