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पार्टी अधिवेशन से पहले नेपाली कांग्रेस में उठने लगी देउबा विरोध की आवाजें
Fri, 31 Jul 2020 07:08 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 31 Jul 2020 07:08 PM IST
सार
- अध्यक्ष देउबा पर पक्षपात करने और अपने पसंदीदा लोगों को अहम पद देने का आरोप
- पौडेल और कोइराला ने लिखा देउबा को पत्र, अधिवेशन में पक्षपात की आशंका जताई
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sher bahadur deuba
- फोटो : File Photo
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विस्तार
नेपाल में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के अंदरूनी संकट के बाद अब नेपाली कांग्रेस के भीतर भी विरोध और असंतोष की आवाजें उठने लगी हैं। नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामचंद्र पौडेल और पार्टी के महासचिव शशांक कोइराला ने पार्टी अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा को एक साझा पत्र लिखकर अपनी आशंकाएं जताई हैं और कुछ सवाल उठाए हैं। उन्होंने पत्र में कहा है कि पार्टी के 14वें राष्ट्रीय अधिवेशन को लेकर उन्हें आशंका है कि यह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पक्षपात से अलग रह पाएगा।
दोनों नेताओं ने पार्टी के सदस्यता अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पार्टी इस बात का ध्यान रखे कि जो लोग सही अर्थों में पार्टी के लिए काम करते रहे हैं और वर्षों से सक्रिय रहे हैं उन्हीं को पार्टी में अहमियत मिले, साथ ही बाहरी लोगों को बगैर उनकी योग्यता और निष्ठा को जांचे परखे सदस्यता दी जाए। इन नेताओं ने कहा है कि किसी बाहरी व्यक्ति को पार्टी में शामिल करने से पहले तय नियमों का ध्यान रखा जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा है कि मौजूदा वक्त में पार्टी के अध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारी कार्यवाहक के तौर पर काम कर रहे हैं क्योंकि सभी का कार्यकाल मार्च में ही खत्म हो चुका है। कोरोना की वजह से पार्टी का अधिवेशन नहीं हो पाया, इसलिए नए पदाधिकारी नहीं बनाए जा सके। इन नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष देउबा पर मनमानी करने और अपने पक्ष में फिर से जमीन तैयार करने की तैयारी करने का आरोप लगाया।
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उनका कहना है कि इस दौरान पार्टी कोई भी सांगठनिक इकाई न तो बना सकती है और न ही उसमें नए लोगों को शामिल कर सकती है, लकिन देश तके तमाम हिस्सों में देउबा ने तमाम इकाइयों में अपने समर्थकों को भरना शुरू कर दिया है, ताकि आने वाले वक्त में पार्टी अधिवेशन के दौरान उनकी राह आसान हो जाए।
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दोनों नेताओं ने पार्टी के सदस्यता अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पार्टी इस बात का ध्यान रखे कि जो लोग सही अर्थों में पार्टी के लिए काम करते रहे हैं और वर्षों से सक्रिय रहे हैं उन्हीं को पार्टी में अहमियत मिले, साथ ही बाहरी लोगों को बगैर उनकी योग्यता और निष्ठा को जांचे परखे सदस्यता दी जाए। इन नेताओं ने कहा है कि किसी बाहरी व्यक्ति को पार्टी में शामिल करने से पहले तय नियमों का ध्यान रखा जाना जरूरी है।
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उन्होंने कहा है कि मौजूदा वक्त में पार्टी के अध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारी कार्यवाहक के तौर पर काम कर रहे हैं क्योंकि सभी का कार्यकाल मार्च में ही खत्म हो चुका है। कोरोना की वजह से पार्टी का अधिवेशन नहीं हो पाया, इसलिए नए पदाधिकारी नहीं बनाए जा सके। इन नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष देउबा पर मनमानी करने और अपने पक्ष में फिर से जमीन तैयार करने की तैयारी करने का आरोप लगाया।
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उनका कहना है कि इस दौरान पार्टी कोई भी सांगठनिक इकाई न तो बना सकती है और न ही उसमें नए लोगों को शामिल कर सकती है, लकिन देश तके तमाम हिस्सों में देउबा ने तमाम इकाइयों में अपने समर्थकों को भरना शुरू कर दिया है, ताकि आने वाले वक्त में पार्टी अधिवेशन के दौरान उनकी राह आसान हो जाए।