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US: जो बाइडन ने संघीय फंडिंग से चलने वाले स्कूलों में बच्चों की मौत पर मांगी माफी, कहा- इसके लिए लगे 150 साल
Sat, 26 Oct 2024 09:14 AM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: श्वेता महतो
Updated Sat, 26 Oct 2024 09:14 AM IST
सार
राष्ट्रपति बाइडन ने बताया कि जो बच्चे वापस लौटे, उनके शरीर पर चोट के निशान पाए गए। उन्होंने फीनिक्स के बाहर गिला क्रॉसिंग कम्यूनिटी स्कूल में यह टिप्पणी की। अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में आदिवासी भूमि पर यह जो बाइडन की पहली यात्रा थी।
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जो बाइडन
- फोटो : PTI
विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने संघीय फंडिंग से चलने वाले विद्यालयों में स्वदेशी समुदाय के बच्चों के उत्पीड़न के लिए स्थानीय अमेरिकियों से माफी मांगी है। दरअसल, यहां बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें आत्महत्या के लिए भी मजबूर किया गया। एरिजोना में राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि माफी मांगने में 150 साल लग गए। 1819 से लेकर 1969 तक करीब 37 राज्यों (तब केंद्र शासित प्रदेश) के 400 बोर्डिंग स्कूलों में 18,000 बच्चों को उनके परिवार से छीन लिया गया।
साल 2021 में गृह मंत्रालय के सचिव देब हालैंड ने स्वदेशी अमेरिकियों पर स्कूलों के प्रभावों की समीक्षा करने के लिए फेडरल इंडियन बोर्डिंग स्कूल की स्थापना की। उनके द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया कि संघीय फंडिंग से चलने वाले विद्यालयों में पढ़ने वाले 973 स्वदेशी अमेरिकी बच्चों की मौत हो गई।
बाइडन ने मांगी माफी
राष्ट्रपति बाईडन ने माफी मांगते हुए कहा, मेरा मानना है कि यह जरूरी है कि हमें मालूम होना चाहिए कि कई पीढ़ियों के बच्चों को ऐसी जगहों पर ले जाया गया, जिसके बारे में वे नहीं जानते थे। उन्हें ऐसे लोगों से मिलाया गया, जिन्हें वे नहीं जानते थे और उनसे ऐसी भाषाओं में बात की गई, जिन्हें उन्होंने कभी नहीं सुना था। स्वदेशी समुदाय ने अपने बच्चों का खेलना बंद करा दिया था। बच्चों को शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कुछ बच्चों को उनके जन्म देने वाले माता-पिता की अनुमति के बिना ही गोद लेने के लिए रखा गया। कुछ को ऐसे ही मरने के लिए छोड़ दिया गया।
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आदिवासी क्षेत्र में बाइडन की पहली यात्रा
राष्ट्रपति बाइडन ने बताया कि जो बच्चे वापस लौटे, उनके शरीर पर चोट के निशान पाए गए। उन्होंने फीनिक्स के बाहर गिला क्रॉसिंग कम्यूनिटी स्कूल में यह टिप्पणी की। अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में आदिवासी भूमि पर यह जो बाइडन की पहली यात्रा थी। इससे पहले 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आदिवासी क्षेत्र रॉक सिओक्स इंडियन रिजर्वेशन का दौरा किया था।
बाइडन ने स्वीकार किया कि उस समय जो कुछ भी हुआ और हमने जो भी कुछ खोया उसकी भरपाई कोई माफी नहीं कर सकती है। उन्होंने आगे कहा कि हम अब अंधेरे से निकलकर प्रकाश की तरफ बढ़ रहे हैं।
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साल 2021 में गृह मंत्रालय के सचिव देब हालैंड ने स्वदेशी अमेरिकियों पर स्कूलों के प्रभावों की समीक्षा करने के लिए फेडरल इंडियन बोर्डिंग स्कूल की स्थापना की। उनके द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया कि संघीय फंडिंग से चलने वाले विद्यालयों में पढ़ने वाले 973 स्वदेशी अमेरिकी बच्चों की मौत हो गई।
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बाइडन ने मांगी माफी
राष्ट्रपति बाईडन ने माफी मांगते हुए कहा, मेरा मानना है कि यह जरूरी है कि हमें मालूम होना चाहिए कि कई पीढ़ियों के बच्चों को ऐसी जगहों पर ले जाया गया, जिसके बारे में वे नहीं जानते थे। उन्हें ऐसे लोगों से मिलाया गया, जिन्हें वे नहीं जानते थे और उनसे ऐसी भाषाओं में बात की गई, जिन्हें उन्होंने कभी नहीं सुना था। स्वदेशी समुदाय ने अपने बच्चों का खेलना बंद करा दिया था। बच्चों को शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कुछ बच्चों को उनके जन्म देने वाले माता-पिता की अनुमति के बिना ही गोद लेने के लिए रखा गया। कुछ को ऐसे ही मरने के लिए छोड़ दिया गया।
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आदिवासी क्षेत्र में बाइडन की पहली यात्रा
राष्ट्रपति बाइडन ने बताया कि जो बच्चे वापस लौटे, उनके शरीर पर चोट के निशान पाए गए। उन्होंने फीनिक्स के बाहर गिला क्रॉसिंग कम्यूनिटी स्कूल में यह टिप्पणी की। अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में आदिवासी भूमि पर यह जो बाइडन की पहली यात्रा थी। इससे पहले 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आदिवासी क्षेत्र रॉक सिओक्स इंडियन रिजर्वेशन का दौरा किया था।
बाइडन ने स्वीकार किया कि उस समय जो कुछ भी हुआ और हमने जो भी कुछ खोया उसकी भरपाई कोई माफी नहीं कर सकती है। उन्होंने आगे कहा कि हम अब अंधेरे से निकलकर प्रकाश की तरफ बढ़ रहे हैं।