US Indo-Pacific Command: अमेरिका चाहता है कि चीन से मुकाबले का खर्च खुद उठाएं इंडो-पैसिफिक के देश!
US Indo-Pacific Command: अमेरिकी विशेषज्ञों के मुताबिक अगर अमेरिका इंडो-पैसिफिक में अपने साथी देशों की क्षमता निर्मित करने में चूकता रहा, तो उसका फायदा चीन उठा सकता है। इसकी ताजा मिसाल थाईलैंड में देखने को मिली है। वहां साझा सैनिक अभ्यास में भाग लेने के लिए चीन ने अपने लड़ाकू विमानों को भेजा...
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इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने की लामबंदी में जुटा अमेरिका इसके लिए जरूरी धन उपलब्ध कराने में पिछड़ रहा है। इस क्षेत्र के देशों को शिकायत है कि अमेरिका अपने इंडो-पैसिफिक कमांड (इंडोपाकॉम) के लिए बजट में पर्याप्त वृद्धि नहीं कर रहा है। वह इस क्षेत्र में चीन का मुकाबला करने के लिए हुई पहल पैसिफिक डिटरेंस इनिशिएटिव (पीडीआई) को मजबूत करने पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है।
अमेरिका में सीनेट की सशस्त्र सेनाओं से संबंधित कमेटी में पेशेवर कर्मचारी के तौर पर काम कर चुके डस्टिन वॉकर ने कहा है कि अमेरिका ने जितना धन यूरोप की सुरक्षा पर लगाया है, उसी अनुपात में उसने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए संसाधन मुहैया नहीं कराए हैं। हाल के वर्षों में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की कई समितियां भी इस ओर ध्यान खींच चुकी हैं कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी क्षमता बढ़ाने के लिए अमेरिका ने प्रभावी उपाय नहीं किए हैं।
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के सदस्य और सदन की सशस्त्र सेना समिति के सदस्य रॉब विटमैन ने हाल में स्वीकार किया कि चीन ने दुनिया की सबसे बड़ी नौ और थल सेनाएं तैयार कर ली हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी वायु सेना सबसे मजबूत बन गई है। उसके हाइपरसोनिक हथियार ऐसे अमेरिकी हथियारों से आगे निकल गए हैं। वह जहाज भेदी मिसाइलें भी तैनात करने वाला है, जिससे उस क्षेत्र में अमेरिकी बेड़ों के लिए खतरा बढ जाएगा। इसके अलावा चीन 2030 तक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनने के लक्ष्य की तरफ से तेजी से बढ़ रहा है।
अमेरिकी विशेषज्ञों के मुताबिक अगर अमेरिका इंडो-पैसिफिक में अपने साथी देशों की क्षमता निर्मित करने में चूकता रहा, तो उसका फायदा चीन उठा सकता है। इसकी ताजा मिसाल थाईलैंड में देखने को मिली है। वहां साझा सैनिक अभ्यास में भाग लेने के लिए चीन ने अपने लड़ाकू विमानों को भेजा। थाईलैंड को अमेरिका का सहयोगी देश माना जाता रहा है। लेकिन अब उसके चीन के करीब जाने की वजह यह बताई जा रही है कि अमेरिका ने वहां सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में पर्याप्त संसाधन नहीं लगाए।
पैसिफिक एयर फोर्सेज के वायु सलाहकार लेफ्टिनेंट कर्नल माइकल एलिस ने कहा है कि चीन अमेरिका के साथी देशों को तोड़ कर अपने साथ जोड़ने के सघन अभियान में जुटा हुआ है। वेबसाइट यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के पर्याप्त धन का आवंटन न करने के कारण इंडो-पैसिफिक देशों में यह राय गहरा रही है कि अमेरिका उन्हें उनके भरोसे छोड़ देने की नीति पर चल रहा है। या अधिक से अधिक वह यह चाहता है कि चीन का मुकाबला करने के लिए जरूरी रक्षा खर्च ये देश खुद उठाएं।
इस रिपोर्ट के मुताबिक इंडोपाकॉम को 2023 तक 9.1 बिलियन डॉलर के बजट की जरूरत होगी। उसे पूर्ण सक्षम बनाने के लिए 2024 से 2027 तक उसे अतिरिक्त 67 बिलियन डॉलर उपलब्ध कराना जरूरी समझा जा रहा है। जबकि अभी तक अमेरिका ने 6.1 बिलियन डॉलर का बजट ही मंजूर किया है।