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US-Iran War: अमेरिकी संसद में ट्रंप की ईरान युद्ध नीति पर टकराव, युद्ध रोकने का प्रस्ताव मामूली अंतर से खारिज

Fri, 06 Mar 2026 04:22 AM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Pavan Updated Fri, 06 Mar 2026 04:22 AM IST
सार

ईरान के साथ युद्ध ने अमेरिका की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है। लेकिन पिछले दो दिनों में दो बार अमेरिकी संसद में इस युद्ध को रोकने के लिए पेश प्रस्ताव वोटिंग के बाद गिर गए हैं। अमेरिका में ट्रंप की ईरान युद्ध नीति पर टकराव तेज होने लगा है।

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US House narrowly rejects Iran war powers resolution in early test of Trump's strategy
अमेरिकी संसद - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका में ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लेकर राजनीति तेज हो गई है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले रोकने के प्रस्ताव को बहुत कम अंतर से खारिज कर दिया। गुरुवार को हुए मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 212 वोट पड़े, जबकि 219 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता, तो ट्रंप प्रशासन को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकनी पड़ती, जब तक कि कांग्रेस इसकी अनुमति न देती। यह लगातार दूसरा दिन है जब अमेरिकी संसद में ऐसा प्रस्ताव गिरा है। इससे पहले सीनेट में भी इसी तरह का प्रस्ताव 47-53 मतों से खारिज हो चुका है।
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कांग्रेस में ट्रंप की रणनीति को लेकर मतभेद
इस वोटिंग से साफ हो गया कि अमेरिका में ईरान युद्ध को लेकर सांसदों के बीच मतभेद गहरे हैं। कई सांसदों का कहना है कि संविधान के अनुसार युद्ध का फैसला करने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप राजा नहीं हैं। अगर उन्हें लगता है कि ईरान से युद्ध अमेरिका के हित में है, तो उन्हें पहले कांग्रेस के सामने आकर इसकी जरूरत साबित करनी चाहिए।
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रिपब्लिकन पार्टी का ट्रंप को समर्थन
अमेरिका की सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी के अधिकतर सांसद ट्रंप के फैसले का समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि ईरान लंबे समय से पश्चिमी देशों के लिए खतरा बना हुआ था और यह सैन्य कार्रवाई उस खतरे को खत्म करने की कोशिश है। रिपब्लिकन सांसद ब्रायन मस्ट ने कहा कि राष्ट्रपति अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका को तत्काल खतरे से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि युद्ध रोकने का प्रस्ताव राष्ट्रपति से कुछ न करने की मांग जैसा था।

डेमोक्रेट्स ने कहा- यह चुनाव का युद्ध
वहीं डेमोक्रेट पार्टी के कई नेताओं ने ट्रंप के फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि यह एक चुनाव का युद्ध है, जिसे बिना कांग्रेस की अनुमति के शुरू किया गया। डेमोक्रेट सांसद जेमी रास्किन ने कहा कि संविधान साफ कहता है कि युद्ध का फैसला कांग्रेस करेगी। उनके मुताबिक अमेरिका को इतने बड़े फैसले से पहले व्यापक बहस और पारदर्शिता की जरूरत थी।


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युद्ध के कारण अमेरिका में बढ़ी चिंताएं
ईरान युद्ध के चलते अमेरिका में चिंता भी बढ़ रही है। कुवैत में ईरानी ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौतहो चुकी है। इसके अलावा मध्य पूर्व में रह रहे हजारों अमेरिकी नागरिक वहां से निकलने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी स्वीकार किया है कि इस युद्ध में आगे और अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार यह युद्ध करीब आठ सप्ताह तक चल सकता है, जो पहले बताए गए समय से दोगुना है। फिलहाल अमेरिका और इस्राइल मुख्य रूप से हवाई हमलों के जरिए ईरान के सैन्य ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक ईरान में 1200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

अमेरिकी सांसदों को सता रहा लंबे युद्ध का डर
अमेरिका में कई सांसदों को डर है कि यह संघर्ष कहीं अफगानिस्तान और इराक की तरह लंबे युद्ध में न बदल जाए। कुछ सांसदों ने सुझाव दिया है कि राष्ट्रपति को सीमित समय के लिए युद्ध जारी रखने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन उसके बाद कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होनी चाहिए। हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी मतदान नहीं हुआ है।

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