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US: फर्जी शादियों और छात्र वीजा का इस्तेमाल कर महिलाओं को काबू में रखता था एपस्टीन, दस्तावेजों में खुलासा
Sun, 15 Feb 2026 01:24 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 15 Feb 2026 01:24 AM IST
सार
US: यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन ने महिलाओं को अपने काबू में रखने के लिए फर्जी शादियों, छात्र वीजा और कानूनी नेटवर्क का इस्तेमाल किया। दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि वह दाखिले, ग्रीन कार्ड और नागरिकता की प्रक्रिया में भी पर्दे के पीछे सक्रिय भूमिका निभाता था। क्या है पूरा मामला, पढ़िए रिपोर्ट-
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एपस्टीन फाइल्स
- फोटो : ANI/PTI
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विस्तार
यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन ने महिलाओं को अपने नियंत्रण में रखने के लिए फर्जी शादियों और छात्र वीजा का इस्तेमाल किया था। 2013 की शुरुआत में उसकी गर्लफ्रेंड कैरीना शुलियाक अपने अमेरिकी वीजा को लेकर परेशान थी। उसी साल उसने एक अमेरिकी नागरिक से शादी कर ली। इसके बाद उसकी वीजा की चिंता खत्म हो गई।
शादी के बाद ग्रीन कार्ड और फिर अमेरिकी नागरिकता मिली
उसे ग्रीन कार्ड मिला। 2018 में उसे अमेरिकी नागरिकता भी मिल गई। फिर शुलियाक ने अपनी जीवनसाथी जेनिफर से तलाक ले लिया। जेनिफर पहले किम्बल मस्क के साथ रिश्ते में थी। दोनों की मुलाकात एपस्टीन ने करवाई थी।
नागरिकता मिलने पर जश्न मनाने की तैयारी का खुलासा
शुलियाक की नागरिकता इंटरव्यू वाले दिन एपस्टीन के एक आव्रजन वकील को संदेश भेजा। उसने लिखा कि अब वह अमेरिकी बन गई है तो उसे बड़ी पार्टी देनी चाहिए। पार्टी में मैकेनिकल बुल रखने की बात कही गई। लाल, सफेद और नीले रंग के गुब्बारे लगाने को कहा गया। स्निकर्स (चॉकलेट) रखने की बात कही गई।
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न्याय विभाग के दस्तावेजों में सामने आया पूरा नेटवर्क
अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी दस्तावेजों में शुलियाक और कई अन्य महिलाओं की कहानियां सामने आईं। इनसे पता चलता है कि एपस्टीन छात्र वीजा, अंग्रेजी भाषा के पाठ्यक्रम और दिखावटी शादियों का इस्तेमाल करता था, ताकि महिलाएं उसके आसपास ही बनी रहें।
कोलंबिया विश्वविद्यालय में दाखिले से शुरू हुआ मामला
एपस्टीन ने शुलियाक का दाखिला कोलंबिया विश्वविद्यालय के डेंटल स्कूल में कराया। वह बेलारूस से अमेरिका पढ़ाई के लिए आई थी। उसने अपनी डिग्री पूरी नहीं की थी। यह पूरा मामला 2011 में शुरू हुआ था। दाखिला मिलने के बाद उसका वीजा और आव्रजन का मामला एक नई समस्या बन गया। जुलाई 2012 में डेंटल स्कूल के एक अधिकारी ने उसे लिखा कि वीजा की चिंता मत करो। अभी सब ठीक है। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।
ऊंचे संपर्कों से छात्र वीजा बहाल कराने की कोशिश
एपस्टीन शुलियाक की वीजा स्थिति को लेकर आश्वस्त होना चाहता था। उसने अपने नेटवर्क से मदद मांगी। वह चाहता था कि उसका छात्र वीजा चुपचाप बहाल हो जाए। उसने ब्रिटिश निवेशक इयान ऑसबोर्न को पत्र लिखा और कहा कि वह नहीं चाहता कि शुलियाक उसका नाम इस्तेमाल करे। उसे याद था कि ऑसबोर्न के पास वॉशिंगटन में अच्छा आव्रजन वकील है।
व्हाइट हाउस से जुड़े वकील का नाम भी आया सामने
ऑसबोर्न ने जवाब दिया कि उसका संपर्क आव्रजन विभाग के उच्च स्तर तक है। उसने ग्रेग क्रेग का नाम लिया। क्रेग उस समय स्कैडेन फर्म (कानूनी कंपनी) में साझेदार थे। वह राष्ट्रपति बराक ओबामा के पूर्व व्हाइट हाउस वकील रह चुके थे। ईमेल के बाद स्कैडेन के वकीलों ने एपस्टीन और ऑसबोर्न के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल की। एक आव्रजन फर्म को भी जोड़ा गया। यह स्पष्ट नहीं है कि क्रेग कॉल में शामिल हुए या नहीं।
वीजा अवधि खत्म होने और शरण आवेदन से बढ़ी मुश्किलें
बाद में वकीलों ने बताया कि शुलियाक ने अपना छात्र वीजा अवधि से ज्यादा समय तक इस्तेमाल किया था। इससे उसे दोबारा बहाल करना मुश्किल था। उसका एक शरण आवेदन भी लंबित था। जो अस्थायी छात्र वीजा से मेल नहीं खाता था।
नई रणनीति के तहत शादी का सुझाव दिया
एपस्टीन ने लिखा कि सुनिश्चित करना होगा कि शरण मामला आगे बढ़ाया जाए या वीजा बहाली की कोशिश की जाए। स्कैडेन ने कहा कि उसने एपस्टीन का औपचारिक प्रतिनिधित्व नहीं किया। अगस्त 2013 तक एपस्टीन सीधे एक अन्य वकील अर्दा बेस्कारदेस से बात कर रहा था। वकील ने ईमेल में शादी की बात जल्द करने को कहा।
न्यूयॉर्क में शादी, फिर परिवार आधारित ग्रीन कार्ड मिला
अक्तूबर 2013 में शुलियाक ने न्यूयॉर्क में शादी कर ली। दोनों का पता 301 ईस्ट 66वीं स्ट्रीट दर्ज था। यह वही जगह थी जहां एपस्टीन से जुड़ी कई महिलाएं और मेहमान ठहरते थे। बाद में शुलियाक ने परिवार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन किया। जनवरी 2015 में उसे ग्रीन कार्ड मिल गया। उसने वकील का धन्यवाद किया।
नागरिकता मिलने के बाद तलाक की प्रक्रिया शुरू
तीन साल बाद वह अमेरिकी नागरिक बनी। उसी साल अक्तूबर में उसने तलाक की प्रक्रिया शुरू कर दी। एक साल से कम समय में तलाक हो गया। करीब एक दशक पहले शुलियाक ने अंग्रेजी भाषा का पाठ्यक्रम शुरू किया था। नवंबर 2010 में उसने मिडटाउन मैनहट्टन के स्पैनिश अमेरिकन इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया।
ये भी पढ़ें: इंडोनेशिया में 23 फीट का दुनिया का सबसे लंबा सांप, वजन 213 पाउंड, इंसान पर हमले के मामले दुर्लभ
अंग्रेजी पाठ्यक्रम के जरिए छात्र वीजा दिलाने की व्यवस्था
ऐसे पाठ्यक्रम विदेशी महिलाओं को छात्र वीजा दिलाने का पहला कदम होते थे। जरूरी कागजात मिलने के बाद वह छात्र वीजा ले सकती थीं। इसके लिए बैंक में पर्याप्त धन दिखाना होता था। कई मामलों में एपस्टीन शुल्क भरता था। 2017 में उसने एक ईमेल में लिखा कि पेरिस में रहने वाली अन्ना को एक अंग्रेजी स्कूल में दाखिला दिलाया जाए। उसे आई-20 फॉर्म जारी कर वीजा दिलाने की बात कही गई।
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शादी के बाद ग्रीन कार्ड और फिर अमेरिकी नागरिकता मिली
उसे ग्रीन कार्ड मिला। 2018 में उसे अमेरिकी नागरिकता भी मिल गई। फिर शुलियाक ने अपनी जीवनसाथी जेनिफर से तलाक ले लिया। जेनिफर पहले किम्बल मस्क के साथ रिश्ते में थी। दोनों की मुलाकात एपस्टीन ने करवाई थी।
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नागरिकता मिलने पर जश्न मनाने की तैयारी का खुलासा
शुलियाक की नागरिकता इंटरव्यू वाले दिन एपस्टीन के एक आव्रजन वकील को संदेश भेजा। उसने लिखा कि अब वह अमेरिकी बन गई है तो उसे बड़ी पार्टी देनी चाहिए। पार्टी में मैकेनिकल बुल रखने की बात कही गई। लाल, सफेद और नीले रंग के गुब्बारे लगाने को कहा गया। स्निकर्स (चॉकलेट) रखने की बात कही गई।
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न्याय विभाग के दस्तावेजों में सामने आया पूरा नेटवर्क
अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी दस्तावेजों में शुलियाक और कई अन्य महिलाओं की कहानियां सामने आईं। इनसे पता चलता है कि एपस्टीन छात्र वीजा, अंग्रेजी भाषा के पाठ्यक्रम और दिखावटी शादियों का इस्तेमाल करता था, ताकि महिलाएं उसके आसपास ही बनी रहें।
कोलंबिया विश्वविद्यालय में दाखिले से शुरू हुआ मामला
एपस्टीन ने शुलियाक का दाखिला कोलंबिया विश्वविद्यालय के डेंटल स्कूल में कराया। वह बेलारूस से अमेरिका पढ़ाई के लिए आई थी। उसने अपनी डिग्री पूरी नहीं की थी। यह पूरा मामला 2011 में शुरू हुआ था। दाखिला मिलने के बाद उसका वीजा और आव्रजन का मामला एक नई समस्या बन गया। जुलाई 2012 में डेंटल स्कूल के एक अधिकारी ने उसे लिखा कि वीजा की चिंता मत करो। अभी सब ठीक है। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।
ऊंचे संपर्कों से छात्र वीजा बहाल कराने की कोशिश
एपस्टीन शुलियाक की वीजा स्थिति को लेकर आश्वस्त होना चाहता था। उसने अपने नेटवर्क से मदद मांगी। वह चाहता था कि उसका छात्र वीजा चुपचाप बहाल हो जाए। उसने ब्रिटिश निवेशक इयान ऑसबोर्न को पत्र लिखा और कहा कि वह नहीं चाहता कि शुलियाक उसका नाम इस्तेमाल करे। उसे याद था कि ऑसबोर्न के पास वॉशिंगटन में अच्छा आव्रजन वकील है।
व्हाइट हाउस से जुड़े वकील का नाम भी आया सामने
ऑसबोर्न ने जवाब दिया कि उसका संपर्क आव्रजन विभाग के उच्च स्तर तक है। उसने ग्रेग क्रेग का नाम लिया। क्रेग उस समय स्कैडेन फर्म (कानूनी कंपनी) में साझेदार थे। वह राष्ट्रपति बराक ओबामा के पूर्व व्हाइट हाउस वकील रह चुके थे। ईमेल के बाद स्कैडेन के वकीलों ने एपस्टीन और ऑसबोर्न के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल की। एक आव्रजन फर्म को भी जोड़ा गया। यह स्पष्ट नहीं है कि क्रेग कॉल में शामिल हुए या नहीं।
वीजा अवधि खत्म होने और शरण आवेदन से बढ़ी मुश्किलें
बाद में वकीलों ने बताया कि शुलियाक ने अपना छात्र वीजा अवधि से ज्यादा समय तक इस्तेमाल किया था। इससे उसे दोबारा बहाल करना मुश्किल था। उसका एक शरण आवेदन भी लंबित था। जो अस्थायी छात्र वीजा से मेल नहीं खाता था।
नई रणनीति के तहत शादी का सुझाव दिया
एपस्टीन ने लिखा कि सुनिश्चित करना होगा कि शरण मामला आगे बढ़ाया जाए या वीजा बहाली की कोशिश की जाए। स्कैडेन ने कहा कि उसने एपस्टीन का औपचारिक प्रतिनिधित्व नहीं किया। अगस्त 2013 तक एपस्टीन सीधे एक अन्य वकील अर्दा बेस्कारदेस से बात कर रहा था। वकील ने ईमेल में शादी की बात जल्द करने को कहा।
न्यूयॉर्क में शादी, फिर परिवार आधारित ग्रीन कार्ड मिला
अक्तूबर 2013 में शुलियाक ने न्यूयॉर्क में शादी कर ली। दोनों का पता 301 ईस्ट 66वीं स्ट्रीट दर्ज था। यह वही जगह थी जहां एपस्टीन से जुड़ी कई महिलाएं और मेहमान ठहरते थे। बाद में शुलियाक ने परिवार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन किया। जनवरी 2015 में उसे ग्रीन कार्ड मिल गया। उसने वकील का धन्यवाद किया।
नागरिकता मिलने के बाद तलाक की प्रक्रिया शुरू
तीन साल बाद वह अमेरिकी नागरिक बनी। उसी साल अक्तूबर में उसने तलाक की प्रक्रिया शुरू कर दी। एक साल से कम समय में तलाक हो गया। करीब एक दशक पहले शुलियाक ने अंग्रेजी भाषा का पाठ्यक्रम शुरू किया था। नवंबर 2010 में उसने मिडटाउन मैनहट्टन के स्पैनिश अमेरिकन इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया।
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अंग्रेजी पाठ्यक्रम के जरिए छात्र वीजा दिलाने की व्यवस्था
ऐसे पाठ्यक्रम विदेशी महिलाओं को छात्र वीजा दिलाने का पहला कदम होते थे। जरूरी कागजात मिलने के बाद वह छात्र वीजा ले सकती थीं। इसके लिए बैंक में पर्याप्त धन दिखाना होता था। कई मामलों में एपस्टीन शुल्क भरता था। 2017 में उसने एक ईमेल में लिखा कि पेरिस में रहने वाली अन्ना को एक अंग्रेजी स्कूल में दाखिला दिलाया जाए। उसे आई-20 फॉर्म जारी कर वीजा दिलाने की बात कही गई।
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