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शीत युद्ध के दौरान चांद पर परमाणु विस्फोट करना चाहता था अमेरिका, 'सीक्रेट फ्रॉम द ब्लैक वाल्ट' किताब में दावा

Thu, 25 Jun 2020 12:21 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Tanuja Yadav Updated Thu, 25 Jun 2020 12:21 PM IST
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United States wanted to attack through nuclear bomb during cold war secret from the black vault claimed
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

अमेरिका ने हमेशा खुद को दूसरों से बेहतर बनाने के लिए जोखिम उठाया है और नए-नए आविष्कार किए हैं। वर्तमान में भी चीन और रूस के साथ उसके वर्चस्व की जंग चल रही है। हालांकि पहले भी अमेरिका खुद को शीर्ष पर रखने की होड़ में लगा रहा है। शीत युद्ध के दौरान भी अमेरिका खुद को सबसे ऊपर रखना चाहता था। 

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हाल ही में रिलीज हुई एक किताब में शीत युद्ध से संबंधित महत्वपूर्ण और रोचक जानकारियां धीरे-धीरे सामने निकल आ रही हैं। शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ के बीच रिश्ते बहुत अच्छे नहीं थे लेकिन दोनों ही देश खुद को एक-दूसरे से बेहतर दिखाने की जद्दोजहद में लगे रहते थे। शीत युद्ध के दौरान दोनों देश इतने उत्तेजित थे कि किसी भी तरह का कदम उठा सकते थे, अप्रैल में प्रकाशित एक किताब में ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया गया है।
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जॉन ग्रीनवाल्ड जूनियर की किताब सीक्रेट फ्रॉम द ब्लैक वाल्ट में यह दावा किया गया है कि शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ पर बढ़त दिखाने और खुद का प्रभुत्व साबित करने के लिए अमेरिका ने 1959 में चांद पर परमाणु विस्फोट करने की योजना बनाई थी। इसके अलावा अमेरिकी सरकार की योजना चांद पर सैन्य अड्डा शुरू करने की भी थी।
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जॉन ग्रीनवाल्ड जूनियर 15 साल की उम्र से ही अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में रुचि रखते थे, उन्होंने कहा कि अमेरिका का चांद पर परमाणु विस्फोट करने वाला फैसला सबसे मूर्खतापूर्ण फैसला था। अबतक जॉन ग्रीनवाल्ड तीन हजार खुफिया सूचनाओं को स्वतंत्र कराने की कोशिश कर चुके हैं। 

उन्होंने जानकारी दी कि द ब्लैक वॉल्ट विभिन्न घटनाओं का ऑनलाइन संग्रह करता है, इस पर दो करोड़ से ज्यादा पेज हैं। साल 1959 में अमेरिका के अनुसंधान और विकास प्रमुख लेफ्टिनेंट जी टूडो ने ये मांग रखी कि अगर अमेरिका सोवियत संघ को हराना चाहता है तो उसे चांद पर एक स्थायी बेस बनाना होगा। 

 जी टूडो ने बताया कि इससे अमेरिका की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और देश को मनोवैज्ञानिक लाभ भी मिलेगा। इस रिपोर्ट में बताया गया कि 12 लोगों की चौकी और एक साल तक उसे कार्यशील रखने में छह अरब डॉलर का खर्च आएगा जिसका अब मूल्यांकन करेंगे तो ये 53 अरब डॉलर से भी ज्यादा बैठेगा।


अमेरिका ने इस खुफिया मिशन को प्रोजेक्ट ए-119 नाम दिया। अंतरिक्ष की दौड़ में आगे निकलने के लिए अमेरिका ने मेक्सिको के कीर्टलैंड एयरफोर्स बेस पर स्थित एयरफोर्स डिवीजन में इसे बनाना शुरू किया। साल 1959 में 'ए स्टडी आफ लूनर रिसर्च फ्लाइट्स' शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका ने चंद्रमा के टर्मिनेटर मीटर यानी सतह का वह हिस्सा जो सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होने वाले और अंधेरे वाले हिस्से के मध्य में परमाणु बम के विस्फोट की योजना बनाई थी। साथ ही विस्फोट को इस प्रकार किया जाना था जिससे पृथ्वी से इसे नंगी आंखों से भी देखा जा सके।

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