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चीन को मात देने की तैयारी: जल्द ही सभी को सीखना होगा डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल करना
Fri, 23 Jul 2021 05:02 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 23 Jul 2021 05:02 PM IST
सार
चीन के अलावा 16 और देश हैं, जो इस क्षेत्र में अपने पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर चुके हैं। 15 दूसरे देशों में ऐसा करने की तैयारी चल रही है। जबकि अमेरिका सहित 33 देशों में अभी इस बारे में रिसर्च ही चल रहा है...
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युआन चीन डिजिटल मुद्रा
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
दुनिया में इस समय 81 देश डिजिटल करेंसी लागू करने की संभावना तलाश रहे हैं। दुनिया के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इन देशों का साझा हिस्सा 90 फीसदी से भी ज्यादा है। इसलिए जानकारों का कहना है कि दुनियाभर के उपभोक्ताओं को अभी भले इस बारे में ज्यादा जानकारी ना हो, लेकिन जल्द ही ऐसा समय आ सकता है, जब उनके पास डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल करना सीखने के अलावा कोई और चारा नहीं बचेगा।
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अमेरिकी थिंक टैंक एटलांटिक काउंसिल के भू-अर्थव्यवस्था केंद्र ने इस समय डिजिटल करेंसी को लेकर दुनियाभर में हो रही कोशिशों का एक अनुमान लगाया है। उसके मुताबिक इस कोशिश में अमेरिका काफी पिछड़ा हुआ दिखता है। काउंसिल ने आशंका जताई है कि मुमकिन है कि डिजिटल करेंसी के युग में प्रवेश करने के मामले में दुनिया को नेतृत्व देने के अवसर से अमेरिका वंचित रह जाए।
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काउंसिल के भू-अर्थव्यवस्था केंद्र के निदेशक जॉश लिप्सी ने न्यूज वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘अगर अमेरिका डिजिटल करेंसी के मामले में प्रतिमान तय नहीं करता और वह प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी के बारे में मार्गदर्शन नहीं करता, तो संभव है कि डिजिटल करेंसी का एक विभाजित माहौल बने। उस हाल में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली का डिजिटल दौर में संक्रमण सहजता से हो, इस संभावना के लिए खतरा पैदा हो जाएगा।’
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अटलांटिक काउंसिल अगले 27 जुलाई को अमेरिकी कांग्रेस की संबंधित समिति के सामने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी के बारे में अपना आकलन पेश करेगी। काउंसिल ने अपना ताजा दस्तावेज इसी मकसद से तैयार किया है। गौरतलब है कि डिजिटल करेंसी तभी एक वैध मुद्रा के रूप में दुनिया के सामने होगी, जब उसे किसी देश के केंद्रीय बैंक की तरफ पेश किया जाएगा। बिटकॉइन जैसी मुद्राएं प्राइवेट सेक्टर में विकसित की गई हैं, जिन्हें किसी सेंट्रल बैक का समर्थन हासिल नहीं है।
अब तक सरकारी स्तर पर जो प्रयास हुए हैं, उनमें चीन सबसे आगे निकल गया है। उसने इस साल अप्रैल में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अपनी डिजिटल मुद्रा की शुरुआत की। उसके अलावा 16 और देश हैं, जो इस क्षेत्र में अपने पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर चुके हैं। 15 दूसरे देशों में ऐसा करने की तैयारी चल रही है। जबकि अमेरिका सहित 33 देशों में अभी इस बारे में रिसर्च ही चल रहा है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक- फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरॉम पॉवेल ने कहा है कि जब तक कांग्रेस (अमेरिकी संसद) से हरी झंडी नहीं मिलती, फेडरल रिजर्व अपनी डिजिटल करेंसी जारी नहीं करेगा।
उधर कांग्रेस की कई समितियों ने इस बारे में जांच पड़ताल शुरू कर दी है। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव ने इसी हफ्ते इस करेंसी से जुड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी समस्याओं पर विचार किया। लिप्सी के मुताबिक अमेरिका के लिए तुरंत इस बात की जरूरत नहीं है कि वह अपनी डिजिटल करेंसी जारी कर दे। लेकिन उसे इस बारे में जी-7 और जी-20 देशों के साथ विचार-विमर्श तुरंत शुरू करना चाहिए, ताकि इस बारे में प्रतिमान और सुरक्षा एवं प्राइवेसी के नियम किए जा सकें।