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यूएन: संयुक्त राष्ट्र महासचिव की दौड़ में यूएई की नुसेइबेह की एंट्री, सुरक्षा परिषद में क्यों फंसा है चुनाव?

Thu, 22 Oct 2026 10:22 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 22 Oct 2026 10:22 PM IST
सार

संयुक्त अरब अमीरात की लाना नुसेइबेह संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव पद की दौड़ में आठवीं उम्मीदवार बन गई हैं। सुरक्षा परिषद में पहले सात उम्मीदवारों को स्थायी सदस्यों से नकारात्मक वोट मिले। ऐसे में क्या नुसेइबेह पांचों स्थायी सदस्यों का समर्थन जुटा पाएंगी? ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच उनकी उम्मीदवारी कितनी अहम है? क्या संयुक्त राष्ट्र को पहली महिला महासचिव मिल सकती हैं और क्या लैटिन अमेरिका की दावेदारी मजबूत होगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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UN UAE Lana Nusseibeh Enters Race for Secretary-General Why Is the Security Council Election Deadlocked?
यूएन महासचिव पद के लिए आठवीं उम्मीदवार बनीं लाना नुसेइबेह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अगले महासचिव के चुनाव में गतिरोध के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की विदेश मामलों की राज्य मंत्री लाना नुसेइबेह भी मैदान में उतर गई हैं। यूएई ने बुधवार को औपचारिक रूप से उनके नाम का प्रस्ताव रखा। वह मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की जगह लेने के लिए चुनाव लड़ने वाली आठवीं उम्मीदवार हैं। गुटेरेस का कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। इस चुनाव में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की सहमति सबसे अहम है।

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लाना नुसेइबेह ने संयुक्त राष्ट्र के लिए क्या विजन रखा है?
नुसेइबेह ने अपने विजन स्टेटमेंट में कहा कि संयुक्त राष्ट्र को हर प्रक्रिया की अगुवाई करने की जरूरत नहीं है, लेकिन जहां उसकी मौजूदगी उपयोगी हो, वहां उसे मौजूद रहना चाहिए। उनका इशारा उन बातचीत और मध्यस्थता की कोशिशों की ओर है, जो संयुक्त राष्ट्र के बाहर भी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि वह अपना अधिक समय संघर्ष वाले इलाकों के पास और उन जगहों पर बिताएंगी, जहां समझौते की संभावना हो। उनकी उम्मीदवारी ऐसे समय आई है, जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद खुद महासचिव के चुनाव पर सहमति नहीं बना पा रही है।
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महासचिव के चुनाव में गतिरोध क्यों बना हुआ है?
पिछले शुक्रवार को हुई छठी अनौपचारिक वोटिंग में पहले से मैदान में मौजूद सभी सात उम्मीदवारों को सुरक्षा परिषद के कम से कम दो स्थायी सदस्यों से नकारात्मक वोट मिले। इससे उनकी उम्मीदवारी के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। वे तभी आगे बढ़ सकते हैं, जब संबंधित स्थायी सदस्य अपना रुख बदलें। नुसेइबेह को भी पांचों स्थायी सदस्यों का समर्थन हासिल करना होगा। इनमें से किसी स्थायी सदस्य का विरोध चुनाव की राह में बड़ी बाधा बन सकता है। हालांकि, नकारात्मक वोट देने वाले दो स्थायी सदस्यों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
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ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच यूएई की उम्मीदवारी क्यों अहम है?
नुसेइबेह ऐसे देश से आती हैं, जो ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के केंद्र में है। खबर के मुताबिक, अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर बमबारी के बाद शुरू हुए युद्ध के दौरान ईरान ने यूएई को निशाना बनाया है। इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा संकट के रूप में भी सामने आया है। यूएई को अरब देशों में इस्राइल के करीब माना जाता है, लेकिन गाजा में इस्राइल की कार्रवाई की उसने आलोचना भी की है। ऐसे में नुसेइबेह की उम्मीदवारी पर अमेरिका का रुख भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

नुसेइबेह का अनुभव क्या है और चुनाव में दूसरी दावेदार कौन हैं?
नुसेइबेह 11 साल तक संयुक्त राष्ट्र में यूएई की स्थायी प्रतिनिधि रहीं। उनका यह कार्यकाल 2024 में समाप्त हुआ, जिसके बाद वह मंत्री बनीं। 2022 और 2023 में सुरक्षा परिषद के निर्वाचित सदस्य के रूप में यूएई के कार्यकाल के दौरान उन्होंने परिषद की अध्यक्षता भी की। वह योग की शौकीन हैं और संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजनों में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। चुनाव में आगे बढ़ने से पहले उन्हें महासभा की ओर से आयोजित बैठक में अपना विजन बताना होगा और सदस्य देशों तथा नागरिक समाज के सवालों के जवाब देने होंगे।


अन्य उम्मीदवारों में संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की प्रमुख रेबेका ग्रीनस्पैन, गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी शामिल हैं। इन तीनों को भी हालिया मतदान में दो-दो स्थायी सदस्यों से नकारात्मक वोट मिले। संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में अब तक नौ पुरुष महासचिव रह चुके हैं, इसलिए महिला महासचिव चुनने की मांग भी उठ रही है। लैटिन अमेरिकी क्षेत्र से महासचिव चुने जाने की भी मांग है। इस क्षेत्र से आखिरी महासचिव जेवियर पेरेज डी कुएयार थे, जिनका कार्यकाल 1991 में समाप्त हुआ। आखिरी अरब महासचिव मिस्र के बुतरस बुतरस-गाली थे, जिनका एकमात्र कार्यकाल 1996 में समाप्त हुआ था।

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