भारत, नेपाल, बांग्लादेश के शिशु जन्म पंजीकरण में वैश्विक प्रगति, यूएन की रिपोर्ट आई सामने
- कुछ दक्षिण एशियाई देशों में हुई है वैश्विक प्रगति
- विशेष रूप से भारत, बांग्लादेश और नेपाल हैं शामिल
- संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने जारी की नई रिपोर्ट
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संयुक्त राष्ट्र के बच्चों की एजेंसी ने कहा है कि पिछले एक दशक में शिशुओं के जन्म के पंजीकरण की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। दक्षिण एशियाई देशों जैसे भारत, बांग्लादेश और नेपाल के किए गए महान प्रयासों ने इस क्षेत्र में वैश्विक प्रगति में योगदान दिया है।
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट ‘2030 तक हर बच्चे के लिए जन्म पंजीकरण: क्या हम सही दिशा में है?’ में कहा कि वर्ष 2000 तक पांच वर्ष की उम्र के 10 शिशुओं में से छह शिशुओं का पंजीकरण हुआ था। अब वर्तमान में यह संख्या बढ़कर प्रति चार में से तीन शिशुओं तक पहुंच गई है।
यह प्रगति विशेषकर पिछले 10 वर्षों में हासिल की गई है।’ 174 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर पंजीकृत पांच से कम शिशुओं का अनुपात पिछले 10 वर्षों के 20 फीसदी के आसपास है। यह आंकड़ा 63 फीसदी से बढ़कर 75 फीसदी पर पहुंच गया है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दिशा में वैश्विक प्रगति का नेतृत्व दक्षिण एशिया देशों विशेष रूप से भारत, बांग्लादेश और नेपाल ने की है। पूरे क्षेत्र में जन्म पंजीकरण स्तर लगभग पिछले दो दशक के 23 फीसदी से अब 70 फीसदी मतलब तीन गुना तक हो गया है।
भारत में 80 फीसदी हो गई पंजीकृत बच्चों की संख्या
अकेले भारत में, 2005-2006 में पंजीकृत बच्चों की संख्या 41 फीसदी से बढ़कर एक दशक बाद 80 फीसदी हो गई। जन्म पंजीकरण को प्राथमिकता देने के लिए यूनिसेफ अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसके तहत सामुदायिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देकर संवेदनशील क्षेत्रों में जन जागरूकता कार्यक्रम शुरू करना शामिल है।
दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में अमीरों और गरीबों के बीच न्यायसंगत अंतराल बंद होना शुरू हो गया है। उदाहरण के लिए, भारत में जन्म के पंजीकरण का स्तर जनसंख्या के सबसे अमीर और गरीब दोनों वर्गों के लिए बढ़ गया है। अब इन दोनों वर्गों के बीच का अंतर कम हो गया है।