दुनिया का ऐसा गांव जहां चलता है सिर्फ महिलाओं का शासन, पुरुष हैं पूरी तरह प्रतिबंधित
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
आज के समय में हम लोगों को बात करते हुए सुनते हैं कि दुनिया में हर जगह पुरुषों का शासन चल रहा है। ये समाज पुरुष प्रधान है। न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी यही स्थिति है। इसके अलावा कई शोध भी किए गए हैं, जिनमें ऐसे ही नतीजे सामने आते हैं। लेकिन क्या ये सब सौ फीसदी ठीक है।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
आंकड़े अपनेआप में ठीक हो सकते हैं, क्योंकि इनपर शोध भी संबंधित जगहों पर ही किया जाता है। इसका मतलब ये कि जिस जगह पर वो सर्वे होता है, वहां के हिसाब से आंकड़े ठीक होते हैं। लेकिन दुनिया में कई जगह ऐसी भी हैं जहां आज भी महिलाओं का शासन चलता है लेकिन इस तरह के शोध वहां नहीं होते। जिसके चलते लोगों के सामने वहां की तस्वीर कभी आ ही नहीं पाती।
इन्हीं जगहों में से एक है उमोजा गांव। ये गांव अफ्रीकी देश केन्या के संबुरु काउंटी में स्थित है। यह एक ऐसा गांव है जहां केवल महिलाएं रहती हैं और उन्हीं का शासन चलता है। इस गांव की खासियत है कि यहां कोई पुरुष प्रवेश नहीं कर सकता। उत्तरी केन्या के इस गांव में रोजलिना लिआरपोरा भी रहती है। उमोजा गांव में रहने वाली 18 वर्षीय रोजलिना लिआरपोरा घर का काम करती है, लकड़ी जलाती है और रंग-बिरंगे मोतियों की ज्वेलरी बनाती है।
पुरुषों के खिलाफ होती है उचित कार्यवाई
रोजलिना की उम्र उस वक्त महज तीन साल थी जब वह यहां आई। यहां 48 महिलाओं का एक समूह अपने बच्चों के साथ पुआल की झोपड़ियों में रहता है। इस गांव में पुरुषों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। अगर कोई पुरुष यहां प्रवेश करता है तो उसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को दे दी जाती है। उसे (पुरुष) चेतावनी दी जाती है कि वह ऐसा दोबार न करे। अगर वो महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करे या फिर कोई और अपराध करे तो उसके खिलाफ उचित कार्यवाई की जाती है।
कब हुई थी शुरुआत?
इस गांव की शुरुआत साल 1990 से 15 महिलाओं के समूह से हुई थी। संबुरु और इसिओसो के पास स्थित ट्रेडिंग सीमा के आसपास के इलाकों में ब्रिटिश जवानों ने इन महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया था। जिसके बाद इनके समुदाय में इन्हे घृणा की दृष्टि से देखा जाने लगा, जैसे इन्हीं की गलती हो। कई दुष्कर्म पीड़िताएं तो ऐसी भी हैं जिनका कहना है कि उनके साथ हुए अपराध के बाद उनके पति ने उन्हें परिवार के लिए अपमानजनक माना और घर से निकाल दिया। इस जगह पर उन्हें एक भूमि मिली। महिलाएं यहां आकर रहने लगीं और गांव को नाम दिया उमोजा। जो एकता को प्रदर्शित करता है।
धीरे-धीरे यह गांव एक शरणास्थल के रूप में बदल गया। यहां उन सभी महिलाओं का स्वागत किया जाता है, जिन्हें उनके घर से निकाल दिया जाता है। यहां अपनी शादीशुदा जिंदगी में परेशान, फीमेल म्यूटिलेशन से पीड़ित महिलाएं, दुष्कर्म और अन्य अपराधों से पीड़ित महिलाएं आती हैं। कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो अपने पति की मौत के बाद यहां आती हैं।
रोजलिना फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (खतना और ब्रेस्ट आयरिंग जैसी प्रथा) से बचने के लिए यहां आई थी। वह कभी अपने पिता से नहीं मिली। जब उसकी उम्र तीन साल थी तभी उसके पिता का देहांत हो गया। उसका पूरा परिवार उसे म्यूटिलेशन के लिए जोर दे रहा था लेकिन उसकी मां उसे लेकर घर से भाग गई। इन दोनों मां-बेटी को यहां रहते हुए 15 साल हो चुके हैं।
उमोजा में रहने वाली सभी महिलाएं संबुरु संस्कृति की हैं। ये समाज पितृसत्तात्मक है और यहां बहुविवाह की प्रथा प्रचलित है। यहां फीमेल म्यूटिलेशन सबसे अधिक किया जाता है। हर उम्र की महिलाएं यहां आकर रह सकती हैं। यहां रहने वाली महिलाओं में 98 वर्ष की बुजुर्ग से लेकर 6 महीने की बच्ची तक शामिल है। कई महिलाएं तो गर्भवती अवस्था में ही यहां आकर रहने लगती हैं।
कई बार ऐसा होता है कि महिलाओं के साथ उनकी छोटी उम्र के बेटे भी आ जाते हैं। लेकिन उन्हें 18 साल की उम्र का होने के बाद गांव छोड़ना पड़ता है। जिस तरह की झोंपड़ियों में ये लोग रहते हैं, उन्हें मान्यत्तास कहा जाता है। ये घर गाय के गोबर, लकड़ी और टहनियों से बनाए गए हैं।
यहां महिलाएं पूरी स्वतंत्रता के साथ खुशी से रहती हैं। उन्हें यहां किसी काम के लिए इजाजत लेने की जरूरत नहीं पड़ती। यहां महिलाएं रंग-बिरंगे मोतियों की मालाएं बनाती हैं। जिससे उनका जीवनयापन चलता है।