यूएई का मंगल मिशन ‘होप’ रवाना, सात माह में पहुंचेगा लाल ग्रह पर
- जापान के तानेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से छोड़ा गया, सात महीने में पहुंचेगा मंगल पर
- भारत, रूस, अमेरिका, ईयू, चीन और जापान के बाद दुनिया का सातवां देश बना यूएई
- 49.4 करोड़ किलोमीटर का सफर 1.21 लाख किमी प्रतिघंटे की औसत गति से तय करेगा होप
- 2021 की शुरुआत में ही पहुंचेगा मंगल पर, देश के गठन की 50वीं वर्षगांठ भी इसी दौरान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का मंगल मिशन ‘होप’ उपग्रह सोमवार को जापान के तानेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। यह सात माह बाद यानी अगले साल फरवरी में मंगल ग्रह पर पहुंचेगा। मौसम की गड़बड़ी के चलते इस लांचिंग में कुछ देरी हुई। भारत, रूस, अमेरिका, यूरोपीय संघ, चीन और जापान के बाद यूएई यह उपलब्धि हासिल करने वाला दुनिया का सातवां देश बन गया है।
इस यान में कोई इनसान नहीं गया है। इसे स्थानीय समयानुसार सुबह 6.58 बजे मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज के एच-आईआईए रॉकेट से लांच किया गया। मित्सुबिशी के मुताबिक, अंतरिक्ष यान रॉकेट से अलग हो गया है और सही से काम कर रहा है। यूएई का यह मिशन लाल ग्रह पर जाने वाली तीन परियोजनाओं में से एक है, जिसमें चीन के ताइनवेन-1 और अमेरिका के मार्स-2020 भी शामिल हैं।
ये उस मौके का लाभ उठा रहे हैं जब धरती और मंगल के बीच की दूरी सबसे कम होती है। नासा के मुताबिक अक्तूबर में मंगल की धरती से दूरी अपेक्षाकृत कई करोड़ किलोमीटर कम होगी। इसके फरवरी-2021 तक मंगल पर पहुंचने की संभावना है और इसी समय यूएई के गठन की 50वीं वर्षगांठ भी है। होप पर अरबी भाषा में ‘अल-अमल’ लिखा है जिसका अर्थ है उम्मीद।
वायुमंडल के बदलाव पर रखेंगे नजर
होप मिशन यूएई के लिए अहम है। यूएई के 450 से ज्यादा इंजीनियर्स और टेक्नीशियंस करीब 6 साल से इस प्रोजेक्ट में जुटे थे। अब तक देश ने सिर्फ 3 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे हैं, जिनका मकसद इनका पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाले बदलावों और इसके असर पर नजर रखना है। इनमें से दो दक्षिण कोरिया ने तैयार किए और रूस ने लॉन्च किए थे। पहली बार है जब यूएई ने देश में तैयार ऑर्बिटर अंतरिक्ष में भेजा है।
जलवायु परिवर्तन की जानकारी जुटाएगा
फरवरी 2021 तक मंगल की कक्षा में पहुंचने के बाद यह आर्बिटर कम से कम दो साल तक लाल ग्रह की कक्षा का चक्कर लगाएगा। इसमें तीन उपकरण मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल का अध्ययन करेंगे और जलवायु परिवर्तन के बारे में जानकारी जुटाएंगे। यूएई ने कहा कि यह पहली बार अलग-अलग मौसम में मंगल के वायुमंडल की पूरी तस्वीर सामने रखेगा।
महिला संभाल रही मिशन की कमान
पहली बार यूएई ने अंतरिक्ष मिशन की कमान महिला वैज्ञानिक सारा अल अमीरी को सौंपी है। सारा ने बताया कि इस मिशन की लांचिंग के शुरुआती 24 घंटे में वह खुद इस पर नजर रखेंगी। इसी समय उन्हें मिशन की सफलता से जुड़े शुरुआती नतीजे मिलेंगे। सारा ने शारजाह की अमेरिकन यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में डिग्री ली है।
अमेरिका, रूस, यूरोप, भारत के बाद बड़ा कदम
यूएई के पास अंतरिक्ष यानों को निर्माण और डिजाइनिंग का बेहद ही मामूली अनुभव है लेकिन इसके बावजूद उसने ऐसा संकल्प लिया जिसमें अब तक सिर्फ अमेरिका, रूस, यूरोप और भारत को कामयाबी मिली है। इसका एक बड़ा कारण अरब जगत में प्रेरणा का स्रोत बनना है और दूसरे यह पता लगाना है कि मंगल ग्रह पर आखिर ऐसा क्या हुआ जो वहां हवा और पानी दोनों खत्म हो गए।
भारतीय दूतावास ने दी बधाई
दुबई में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने इस उपलब्धि के लिए यूएई को बधाई दी। दूतावास ने ट्वीट कर कहा, यूएई में रहने वाले भारतीयों की ओर से हम अमीरात के मित्रों को होप के सफल परीक्षण के लिए बधाई देते हैं और कोविड-19 के इस मुश्किल दौर में भी वैज्ञानिकों की अडिग प्रतिबद्धता को सलाम करते हैं।