TTP in Pakistan: तालिबान ने नाकों चने चबवाए पाकिस्तान से, महंगा पड़ रहा है साथ देना
TTP in Pakistan: इस महीने टीटीपी ने पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों की बौछार कर दी है। इस संगठन ने पिछले महीने पाकिस्तान सरकार के साथ चल रही अपनी वार्ता को तोड़ने का एकतरफा एलान कर दिया था। ये बातचीत अफगान तालिबान की मध्यस्थता में चल रही थी...
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अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान को लाने में पाकिस्तान ने जो भूमिका निभाई थी, वह अब उसे बहुत भारी पड़ रही है। तालिबान सरकार के संरक्षण में काम कर रहे आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के हमलों से पाकिस्तान हिला हुआ है। अब इस लड़ाई में उसने अपनी सेना की पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है। इस सिलसिले में सेना के सर्वोच्च कमांडरों की एक बैठक हुई है। उसके बाद जारी बयान में कहा गया- ‘देश में नए हमलों की लहर के साथ आतंकवाद की बुराई ने फिर अपना गंदा सिर उठा लिया है। हम संकल्प लेते हैं कि आतंकवादियों के बीच बिना कोई फर्क किए इस बुराई से संघर्ष करेंगे।’
खबरों के मुताबिक कमांडरों की ये बैठक अचानक मंगलवार को बुलाई गई, जो बुधवार तक चली। बैठक सेना मुख्यालय में हुई, जिसकी अध्यक्षता सेनाध्यक्ष जनरल सईद असीम मुनीर ने की। जनरल मुनीर ने पिछले महीने सेनाध्यक्ष पद संभाला था। उसके बाद टॉप कमांडरों की हुई यह दूसरी बैठक थी। बैठक के बाद बताया गया कि कमांडरों ने आतंकवाद का जड़ से खात्मा करने का संकल्प लिया है।
इस महीने टीटीपी ने पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों की बौछार कर दी है। इस संगठन ने पिछले महीने पाकिस्तान सरकार के साथ चल रही अपनी वार्ता को तोड़ने का एकतरफा एलान कर दिया था। ये बातचीत अफगान तालिबान की मध्यस्थता में चल रही थी। टीपीपी के अड्डे अफगानिस्तान में हैं। पाकिस्तान सरकार ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से इन अड्डों को खत्म करने को कहा है। लेकिन तालिबान ने उसकी सिरे से अनदेखी कर दी है।
अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार ने अफगानिस्तान में मौजूद टीटीपी के अड्डों को अफगानिस्तान सरकार से अपने रिश्ते के बीच ‘रेड लाइन’ करार दिया है। पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि अगर तालिबान इन अड्डों को खत्म नहीं करता, तो उसका असर अफगानिस्तान से उसके रिश्तों पर पड़ेगा। अखबार ने पाकिस्तान के सुरक्षा विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि इस मामले में पाकिस्तान का सब्र अब जवाब दे रहा है।
गैर-सरकारी संस्थाओं के आंकड़ों के मुताबिक 15 अगस्त 2021 से 14 अगस्त 2022 के बीच पाकिस्तान पर हुए आतंकवादी हमलों में 51 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इन हमलों में 433 लोग मारे गए और 250 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए। 15 अगस्त 2021 को ही तालिबान ने काबुल की सत्ता पर कब्जा जमाया था। इस वर्ष अगस्त के बाद हमलों की संख्या और बढ़ी है। इन घटनाओं के कारण यहां यह अहसास गहराता जा रहा है कि अफगानिस्तान में तालिबान की मदद करना अब पाकिस्तान को बहुत महंगा पड़ रहा है।
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की जल्द ही बैठक होगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल में कहा था कि एनएससी आतंकवाद के खिलाफ अपनाई जाने वाली रणनीति की व्यापक समीक्षा करेगी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक जल्द ही खैबर पख्तूनवा प्रांत में आतंकवादियों के खिलाफ एक बड़ा सैनिक अभियान छेड़ सकता है।