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Border Emergency: ट्रंप की सीमा पर आपातकाल की घोषणा, कई सालों की उथल-पुथल के बाद जानें अब कैसी है स्थिति

Sat, 25 Jan 2025 08:46 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सैन डिएगो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सैन डिएगो Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 25 Jan 2025 08:46 PM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर 'आपातकाल की घोषणा' का फैसला उस समय लिया गया है, जब सीमा पर पिछले समय की तुलना में शांति थी। इसका उद्देश्य अवैध प्रवास, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसे मुद्दों से निपटना था। हालांकि, सीमा पर स्थिति पहले के वर्षों जितनी खराब नहीं थी।

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Trump's border emergency declaration comes amid relative calm after years of major turmoil
Donald Trump - फोटो : PTI

विस्तार

अमेरिकी सीमा पर लगे गश्ती स्कैनर पर लंबे समय तक खामोशी बनी रहती है, जिसमें कभी-कभी किसी एक प्रवासी के पीछा करने की खबरें आती हैं। यह रेडियो बातचीत पुराने समय की याद दिलाती है, जब 2017 में अमेरिका शरण मांगने वालों का सबसे बड़ा गंतव्य नहीं बना था।
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'अमेरिका की संप्रभुता पर हमला हो रहा है' का हवाला देते हुए आपातकालीन सीमा स्थिति की घोषणा की। यह कदम तब उठाया गया है जब कई सालों की उथल-पुथल के बाद स्थिति अब शांत है। इसके तहत, 1,500 सैनिक सैन डिएगो और टेक्सास के एल पासो में तैनात किए गए।  
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अवैध सीमा पार मामलों में भारी गिरावट
दिसंबर में अवैध सीमा पार करने वालों की गिरफ्तारियां 80% से ज्यादा घटकर 47,000 हो गईं, जबकि पिछले साल इसी समय 2.5 लाख मामले थे। मेक्सिको की तरफ से अपनी सीमाओं पर सख्ती करने और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की तरफ से जून में कड़े शरण नियम लागू करने से ये गिरावट आई। जबकि, ट्रंप का मानना है कि बाइडन ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए। हालांकि, बाइडन के कार्यकाल के आखिरी महीनों में गिरफ्तारियां पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम थीं।  
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सीमा पर कैसी है मौजूदा स्थिति?
गुरुवार को एसोसिएटेड प्रेस ने सैन डिएगो में गश्ती बलों के साथ 6 घंटे बिताए। इस दौरान, आखिरी आधे घंटे में ही प्रवासियों का सामना हुआ। तीन चीनी नागरिक और एक मलेशियाई नागरिक ने खुद को एजेंटों के हवाले कर दिया। इसके तुरंत बाद, भारत के आठ और नेपाल के एक व्यक्ति ने सीमा पार की। इन सभी को प्रक्रिया के लिए बड़े सफेद टेंटों में ले जाया गया, जो बाइडन के कार्यकाल में बनाए गए थे। हालांकि, आगे उनका क्या हुआ, यह स्पष्ट नहीं है।  

एजेंटों की भूमिका में बदलाव
हाल के महीनों में सीमा गश्ती एजेंटों की भूमिका बदल गई है। पहले वे शरण मांगने वालों को जल्दी-जल्दी प्रक्रिया करके अदालत में पेशी का नोटिस देकर छोड़ देते थे। अब वे छोटे समूहों का पीछा कर उन्हें पकड़ने में ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ट्रंप के कार्यकाल में शरणार्थियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। सैन डिएगो क्षेत्र में गिरफ्तारियों का आंकड़ा अप्रैल में 1,400 प्रतिदिन था, जो अब घटकर 236 हो गया है।  

क्या है चुनौतियां और रणनीति
नए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूरस्थ देशों के प्रवासियों को वापस भेजने की है। जैसे, वेनेजुएला और निकारागुआ जैसे देश, जो अमेरिका के विरोधी हैं, अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार करते हैं। क्यूबा भी केवल सीमित उड़ानों की अनुमति देता है। वहीं ट्रंप ने कहा है कि, 'अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध प्रवास को पूरी तरह रोकना मेरी जिम्मेदारी है।'


शरणार्थी शिविरों का बंद होना जारी
वहीं एरिजोना के पीमा काउंटी ने घोषणा की कि वे टक्सन के दो शरणार्थी शिविर बंद कर रहे हैं, क्योंकि सरकार ने वहां प्रवासियों को भेजना बंद कर दिया है। 2019 से अब तक, काउंटी ने 5 लाख से अधिक प्रवासियों को आश्रय दिया था। सैन डिएगो की यहूदी परिवार सेवा संस्था ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की तरफ से ऑनलाइन सीमा ऐप 'सीबीपी वन' बंद करने के बाद, उनके पास कोई प्रवासी नहीं आया है।
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