US: ट्रंप ने 70 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को दी पर्यावरणीय नियमों से छूट, चिंता में स्वास्थ्य विशेषज्ञ
US: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 70 कोयला संयंत्रों को जहरीले प्रदूषण से जुड़े नियमों से 2 साल की छूट दी है, जिससे पारे जैसे हानिकारक तत्वों के उत्सर्जन में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार ने इसे ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा बताया, जबकि पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा करार दिया है।
विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 70 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को जो बाइडन प्रशासन में लागू किए गए पर्यावरणीय नियमों से दो साल की छूट प्रदान की है। इन नियमों के तहत संयंत्रों को पारा, आर्सेनिक जैसे जहरीले प्रदूषकों के उत्सर्जन को सीमित करना था। यह कदम ट्रंप के हालिया कार्यकारी आदेशों का हिस्सा है, जिसका मकसद संकटग्रस्त कोयला उद्योग को पुनर्जीवित करना है।
इस फैसले से जिन बिजली संयंत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, उनमें मोंटाना का कॉलस्ट्रिप जनरेटिंग स्टेशन और नॉर्थ डकोटा का कोल क्रीक स्टेशन शामिल हैं। ये दोनों संयंत्र अणेरिका में सबसे ज्यादा जहरीला धुआं छोड़ने वाले संयंत्रों में गिने जाते हैं। टेलन एनर्जी, डॉमिनिकन एनर्जी, एनआरजी एनर्जी, साउदर्न कंपनी और टेनेसी वैली अथॉरिटी जैसी कंपनियों को भी इन नियमों से छूट दी गई है।
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पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय उर्जा सुरक्षा और ग्रिड विश्वसनीयता को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। हालांकि, पर्यावरणविदों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे पारा जैसे जहरीले प्रदूषकों के उत्सर्जन में वृद्धि होगी, जो बच्चों के मस्तिष्क के विकास और सांस लेने के लिए हानिकारक हैं।
ईपीए ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति की ओर से दी गई ये छूटें कोयला आधारित बिजली उत्पादन को बढ़ावा देंगी, जिससे देश की बिजली व्यवस्था भरोसेमंद बनी रहेगी, आम लोगों को सस्ती बिजली मिलेगी और राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। कोयला संयंत्रों के लिए काम करने वाले एक समूह की अध्यक्ष मिशेल ब्लडवर्थ ने कहा कि ट्रंप यह मानते हैं कि देश के कोयला संयंत्र एक स्वस्थ और सुरक्षित बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए जरूरी हैं, जो हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
ब्लडवर्थ ने कहा, पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में जो नियम बनाए गए थे, वे स्वच्छ वायु अधिनियम (क्लीन एयर एक्ट) के अनुरूप नहीं थे और गलत तरीके से किए गए डाटा विश्लेषण पर आधारित थे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल लागू किया गया मरकरी (पारे) वाला नियम कई कोयला संयंत्रों को समय से पहले बंद करने की वजह बन सकता था। जबकि ये संयंत्र देश की बिजली व्यवस्था को स्थिर और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए जरूरी हैं।
पर्यावरण संगठन सेंटर फॉर बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी की वरिष्ठ वकील माया गोल्डन-क्रैस्नर ने कहा,इन प्रदूषण की छूटों ने हमारे सांस लेने वाली हवा की सुरक्षा को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है।
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उन्होंने आगे कहा, यह कहना कि लोगों को ज्यादा जहरीली गैसें सांस के जरिए अंदर लेना देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है — बहुत ही अपमानजनक बात है। यह साफ दिखाता है कि अमेरिकी नागरिकों और पृथ्वी की सेहत से ज्यादा सरकार प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों के मुनाफे को प्राथमिकता दे रही है। पर्यावरण संगठन और जनस्वास्थ्य से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इस योजना की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे सैकड़ों कंपनियां उन कानूनों से बच निकलेंगी जो पर्यावरण और जनता की सेहत की रक्षा के लिए बनाए गए हैं।
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