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इस तरह विज्ञापन प्रतिबंध को धता बता रहा है तंबाकू उद्योग

Sun, 21 Feb 2021 04:07 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 21 Feb 2021 04:07 PM IST
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Tobacco industry is defying advertising ban
tobacco, Cigarette - फोटो : पिक्साबे

तंबाकू का विज्ञापन प्रतिबंधित होने के बाद सिगरेट उत्पादक कंपनियां सोशल मीडिया के जरिए अपना इश्तेहार कर रही हैं। वे टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए इस तरह के वीडियो बनवा रही हैं, जिनमें धूम्रपान को ग्लैमराइज किया जाता है। खासकर ऐसा करने का आरोप ब्रिटिश अमेरिकन टूबैको (बीएटी) कंपनी पर लगा है। यहां के अखबार ‘द गार्जियन’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बीएटी सोशल मीडिया इन्फुएन्सर्स, पॉप स्टार्स और खेल आयोजनों की लोकप्रियता का लाभ उठाते हुए अपना विज्ञापन करने पर एक अरब पाउंड खर्च कर रही है।

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खोजी पत्रकारों के संगठन ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म ने ये रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट क मुताबिक ऐसे इश्तहारों से नौजवान, धूम्रपान ना करने वाले लोग और यहां तक कि बच्चे भी आकर्षित हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस कंपनी के इस तौर- तरीके से कंपनी का विज्ञापन कर रही एक एजेंसी के कर्मचारी भी खासे परेशान हैं। केन्या में उस एजेंसी के एक कर्मचारी ने एक संवाददाता को अंदरूनी सूचनाएं उपलब्ध कराई। ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म को उपलब्ध जानकारियों क मुताबिक बीएटी ई-सिगरेट और वेप्स की मार्केटिंग कर इस क्षेत्र में अपनी आमदनी बढ़ाने की कोशिश में है। इसके लिए सीधे विज्ञापन की राह बंद होने के कारण उसने सोशल मीडिया पर ध्यान केंद्रित किया है।

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ये कंपनी उन लोगों ने अपने नए उत्पाद बेचना चाहती है, जो धूम्रपान छोड़ने की इच्छा रखते हैँ। उनके सामने वह विकल्प के रूप में ई-सिगरेट और वेप्स पेश कर रही है। इसके लिए उसने ‘ए बेटर टूमौरा’ का स्लोगन भी बाजार में उछाला है। दुनिया भर में नए उत्पादों का सेवन करने वाले लोगों की संख्या अब 30 लाख तक पहुंच चुकी है। उत्पादकों का आकलन है कि ये संख्या 2023 तक पांच करोड़ तक पहुंच सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये नए उत्पाद भी कम खतरनाक नहीं हैं। इसलिए इनका सोशल मीडिया के जरिए विज्ञापन चिंता की बात है। इन पदार्थों का विज्ञापन करने वाले वीडियो पाकिस्तान से लेकर स्वीडन और अफ्रीकी देशों तक में देखे जा रहे हैं।

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2012 के बाद धूम्रपान करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी

अमेरिका और यूरोप में बीएटी ने वहां के रेगुलेटर्स (विनियामकों) के सामने दावा किया है कि नए निकोटीन उत्पादों से उन लोगों को मदद मिलती है, जो सिगरेट छोड़ना चाहते हैं। लेकिन इस कंपनी ने 2019 में अपने निवेशकों के सामने जो प्रजेंटेशन किया था, उसमें दिए गए तथ्य कुछ और कहानी बताते हैं। उसमें कहा गया था कि निकोटीन सेवन करने वाले लोगों की संख्या 2012 तक गिर रही थी। लेकिन उसके बाद इसमें बढ़ोतरी शुरू हो गई। 2017 में धूम्रपान करने वाले नई पीढ़ी के लोगों की संख्या 80 लाख बढ़ी।

जानकारों का कहना है कि साफ तौर पर बीएटी की दिलचस्पी लोगों से सिगरेट छुड़वाने के बजाय निकोटीन सेवन कर सकने वाले नए लोगों की तलाश करने में है। पाकिस्तान में नए उत्पाद वेलो की मार्केटिंग के लिए बीएटी ने जो विज्ञापन अभियान चलाया, उसमें 40 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का इस्तेमाल किया गया। उस वीडियो को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक करोड़ 30 लाख लोगों ने देखा। स्पेन में बीएटी ने अपने तंबाकू उत्पाद ग्लो के विज्ञापन के लिए लोकप्रिय बॉय म्यूजीक बैंड- दविसियो का सहारा लिया है। पाकिस्तान में इस कंपनी ने अपने उत्पाद मॉल्स, चाय की दुकान आदि जैसी जगहों पर मुफ्त में भी बांटे हैं।

ताजा मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि खासकर टिकटॉक पर डाले गए वीडियोज का 14 से 23 उम्र के नौजवानों पर खास प्रभाव पड़ा है। स्वीडन में इस उम्र वर्ग के युवाओं में नए निकोटीन उत्पादों के इस्तेमाल की लत हाल में तेजी से बढ़ी है। जबकि बीएटी का दावा रहा है कि उसके उत्पाद सिर्फ बालिग लोगों के लिए हैं और नौजवानों को निकोटीन उत्पादों का सेवन कभी नहीं करना चाहिए। गैर सरकारी संस्था कॉरपोरेट एकाउंटेबिलिटी के कार्यकर्ता टेलर बिलिंग्स ने द गार्जियन से कहा- ‘सोशल मीडिया पर चलाए गए अभियानों का युवाओं तक पहुंचना लाजिमी है। तंबाकू उद्योग संसाधनों के मामले में इतना समृद्ध है कि वह प्रभाव उत्पन्न कर सकती है। यह उद्योग कोई संयोगवश उन प्लैटफॉर्म्स का इस्तेमाल नहीं कर रही है, जहां नव युवा बड़ी संख्या में मौजूद हैं।’

जाहिर है, ये तंबाकू उद्योग की नई रणनीति है। इसे एक तरह की सरोगेट यानी छिप कर की गई मार्केटिंग कहा जा सकता है।

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