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पाक सेना प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाने को संसद ने किया मंजूर, एफएटीएफ पर भी बिल पारित

Tue, 07 Jan 2020 09:28 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 07 Jan 2020 09:28 PM IST
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Three bills passed unanimously in Pakistan, General Bajwa term may increase
कमर जावेद बाजवा

पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली के निचले सदन में सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को तीन और वर्ष तक कार्यकाल बढ़ाने संबंधी तीन अहम विधेयक पारित कर दिए गए। इमरान खान के करीबी विश्वासपात्र बाजवा को मूल कार्यकाल के हिसाब से 29 नवंबर 2019 को ही सेवानिवृत्त होना था लेकिन प्रधानमंत्री खान ने क्षेत्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए 19 अगस्त को ही एक अधिसूचना के जरिए कार्यकाल बढ़ा दिया था।

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इसे पाक सुप्रीम कोर्ट ने 28 नवंबर को एक आदेश के बाद स्थगित कर दिया जिसके बाद सरकार के आश्वासन देने पर उनके कार्यकाल को छह माह तक विस्तार दिया। इसके बाद सरकार ने बाजवा का कार्यकाल बढ़ाने के लिए मुख्य विपक्षी दलों का समर्थन हासिल किया और सेना, नौसेना तथा वायुसेना प्रमुखों व संयुक्त प्रमुख अध्यक्ष की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 64 साल करने के लिए तीन विधेयक पेश किए। सोमवार को रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने इन विधेयकों को मंजूरी दी थी।
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विरोध भी किया गया

बाजवा का कार्यकाल बढ़ाने का जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल और जमात-ए-इस्लामी ने विरोध किया और सत्र का बहिष्कार किया। वे नए कानूनों से खुश नहीं थे। अब नेशनल असेंबली द्वारा अनुमोदन के बाद, बिलों को सीनेट (उच्च सदन) में पेश किया जाएगा, जहां बिना किसी समस्या के पारित होने की उम्मीद है। अंतिम मंजूरी के लिए यह राष्ट्रपति के  पास जाएगा।
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एफएटीएफ पर विधेयक पारित

भारत द्वारा अपनाई गई रणनीति के हिसाब से पाकिस्तान पर पूरी दुनिया से पड़े दबाव के बाद आखिरकार वहां की संसद ने वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के मापदंडों को पूरा करने वाला विधेयक पारित कर दिया है। यह विधेयक दुनिया के देशों के साथ सूचना और अपराधियों के आदान-प्रदान से जुड़ा हुआ है। पाक संसद में कार्रवाई बाधित करने की कोशिशों के बीच यह विधेयक पारित हो गया।

बता दें कि पाकिस्तान को अभी भी एफएटीएफ ने फरवरी 2020 तक विस्तारित अवधि के लिए ग्रे सूची में डाला हुआ है। एफएटीएफ ने अक्तूबर 2019 में पाक को चेतावनी देते हुए पूछा था कि उसने 27 में से 22 बिंदुओं का पालन नहीं किया है, ऐसे में क्यों न पाकिस्तान को काली सूची में डाल दिया जाए। हालांकि पाकिस्तानी अखबार डॉन न्यूज के मुताबिक विपक्षी दलों ने संसद के अध्यक्ष असद कैसर द्वारा ध्वनि मत पर दिए उस आदेश को चुनौती देकर बाधित करने की कोशिश भी की गई जिसमें उन्होंने संसदीय मामलों के राज्यमंत्री को विधेयक पेश करने की अनुमति दी थी। लेकिन 87 के मुकाबले 83 मतों से गिरने के बाद विपक्षी पार्टियों ने प्रक्रिया में हिस्सा लिया और चार मामूली

संशोधन किए। पाकिस्तान ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि उस पर एफएटीएफ से ब्लैक लिस्ट होने का खतरा बढ़ गया है।

नेशनल एसेंबली में हुई नोंकझोंक

पाक नेशनल एसेंबली में जैसे ही सदन में म्युचुअल लीगल असिस्टेंट (क्रिमिनल मैटर) विधेयक, 2019 रखा गया, पीपीपी के संसदीय दल के नेता सईद नवीद कमर ने इसे देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया। इस दौरान संसद में तीखी नोंकझोंक भी हुई। उन्होंने कहा, बिल पास हो जाने के बाद सरकार दूसरे देशों से सूचना पा सकेगी और उन देशों की मांग पर बिना किसी संधि पर हस्ताक्षर किए ही अपने नागरिकों को उनके यहां प्रत्यर्पित कर देगी। हालांकि सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने इस पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया और एफएटीएफ के जाल में फंसने के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार बताया।

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