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Sri Lanka: श्रीलंका में सामूहिक कब्र की विश्वसनीय जांच की मांग को लेकर तमिलों का प्रदर्शन, बंद का किया आह्वान
Fri, 28 Jul 2023 03:54 PM IST
Jeet Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 28 Jul 2023 03:54 PM IST
सार
श्रीलंका के तमिल बहुल उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में शुक्रवार को बंद रहा और श्रीलंका में अल्पसंख्यक समुदाय तमिल ने उत्तरपूर्वी जिले मुल्लाथिवु में एक कथित सामूहिक कब्र की विश्वसनीय जांच की मांग की।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
श्रीलंका के कई इलाकों में सामूहिक कब्र में दर्जनों नर-कंकाल पाए गए थे। इसके बाद उन कंकालों की जांच की मांग होने लगी। यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। श्रीलंका के तमिल बहुल उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में शुक्रवार को बंद रहा और श्रीलंका में अल्पसंख्यक समुदाय तमिल ने उत्तरपूर्वी जिले मुल्लाथिवु में एक कथित सामूहिक कब्र की विश्वसनीय जांच की मांग की।
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श्रीलंका में गृहयुद्ध और अन्य संघर्षों में जाफना, किलिनोच्ची, मन्नार और मुल्लाथिवु के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में गायब हुए लोगों के रिश्तेदारों ने व्यवसाय बंद करके और घर के अंदर रहकर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। जाफना विश्वविद्यालय के संयुक्त छात्र संगठन ने एक बयान में बंद का आह्वान किया था और हालाँकि, वावुनिया, अमापारा और त्रिंकोमाली जिलों में विरोध प्रदर्शन असफल रहे।
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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2009 में श्रीलंका की सेना और अलगाववादी तमिल टाइगर्स के बीच 26 सालों से चल रहा गृह युद्ध खत्म हुआ था जिसमें 100,000 लोग मारे जाने का दावा किया गया था और श्रीलंकाई सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 20,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।
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जून में, क्षेत्र में एक विकास परियोजना के लिए खुदाई गतिविधियों के समय राष्ट्रीय जल बोर्ड के कार्यकर्ताओं द्वारा गलती से कोक्कुथुडुवई में एक कथित सामूहिक कब्र की खोज की गई थी। छह जुलाई को, मुल्लातिवु मजिस्ट्रेट अदालत ने कथित सामूहिक कब्र की खुदाई की निगरानी की। तमिल राजनीतिक दल के सूत्रों ने कहा कि वहां कम से कम 13 लोगों के मानव अवशेष पाए गए। अलगाववादी सशस्त्र संघर्ष के दौरान लापता लोगों के रिश्तेदारों ने कब्र की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है।
इससे पहले एक रिपोर्ट में कहा गया था कि इन अज्ञात सामूहिक कब्र में अब भी हजारों शव दफन हो सकते हैं जिनका पता नहीं चला है। रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंकाई सरकारों द्वारा स्थापित कई जांच आयोगों में से किसी को भी सामूहिक कब्र की जांच करने का आदेश नहीं दिया गया। इसके बजाय, सच्चाई को उजागर करने के प्रयासों को अवरुद्ध किया गया।