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ताइवान ने दिखाई चीन को आंख, राष्ट्रपति बोलीं-किसी भी तरह की घुसपैठ बीजिंग को पड़ेगी महंगी
Wed, 15 Jan 2020 06:12 PM IST
अमित कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमित कुमार
Updated Wed, 15 Jan 2020 06:12 PM IST
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taiwan president
- फोटो : Twitter
चीन के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले ताइवान ने ड्रैगन को एक बार फिर से चेताया है। ताइवान की नव निर्वाचित राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने बुधवार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह द्वीप पहले से ही स्वतंत्र है और किसी भी तरह की घुसपैठ बीजिंग को 'काफी महंगी' पड़ सकती है।
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हाल ही में साई इंग-वेन दूसरी बार राष्ट्रपति चुनी गई हैं। इस बार उन्होंने रिकॉर्ड 82 लाख वोटों से जीत दर्ज की है। चीन का नेतृत्व राष्ट्रपति साई इंग-वेन को कतई पसंद नहीं करता है और वह उन्हें चुनाव में हारते देखना चाहता था। साई इंग-वेन और उनकी पार्टी ने बीजिंग के इस दावे को मानने से इनकार कर दिया था कि यह द्वीप चीन का हिस्सा है।
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स्वशासित ताइवान को चीन अपना हिस्सा होने का दावा करता रहा है। साथ ही वह जरूरत पड़ने पर ताइवान पर कब्जा करने की भी धमकी देता रहा है। खासतौर से अगर वह खुद को आजाद घोषित करता है, तो। मगर दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद अपने पहले इंटरव्यू में ही साई ने स्वतंत्रता घोषित करने की कोई औपचारिकता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह द्वीप पहले से ही स्वशासित है। उन्होंने कहा, 'हमें खुद को स्वतंत्र घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है। हम पहले से ही स्वतंत्र देश हैं और हम खुद को रिपब्लिक आफ चाइना, ताइवान कहते हैं।' आधुनिक ताइवान में पिछले 70 साल से अलग शासन चल रहा है।
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कई दशकों तक यहां चियांग काई शेक की तानाशाही थी, लेकिन 1949 में चीन के गृह युद्ध में वामपंथियों के हाथों उसे हार झेलनी पड़ी थी। मगर 1980 के दशक में यह एशिया का सबसे उभरता लोकतांत्रिक देश बन गया। हालांकि सिर्फ कुछ देशों ने ही ताइवान को मान्यता दी थी।
कई पोल यह दावा कर रहे हैं कि ताइवान ने चीन का हिस्सा बनने के आइडिए को खारिज कर दिया है। साई ने कहा, 'हमारी अलग पहचान है और हम अपना देश खुद चला रहे हैं।' उनके दोबारा राष्ट्रपति बनने से चीन काफी नाराज है और उसने देश के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।