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Artificial Human Embryo: वैज्ञानिकों ने कृत्रिम मानव भ्रूण बना कर खड़े कर दिए कई नैतिक और वैधानिक सवाल

Fri, 16 Jun 2023 01:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 16 Jun 2023 01:21 PM IST
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सार
Synthetic human embryos: वैज्ञानिकों का कहना है कि इस कामयाबी से उन्हें जीन संबंधी कई प्रकार की बीमारियों (जेनेटिक डिसऑर्डर्स) को समझने में मदद मिलेगी। मसलन, बार-बार गर्भपात हो जाने जैसी समस्याओं के जीव-वैज्ञानिकों कारणों को इसके जरिए समझा जा सकेगा...
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Synthetic human embryos: Scientists raised many ethical and legal questions by making artificial human embryos
Synthetic human embryos - फोटो : istock

विस्तार

वैज्ञानिकों को बिना पुरुष शुक्राणु और स्त्री अंडाणुओं का इस्तेमाल किए मानव भ्रूण बनाने में मिली सफलता से जहां एक तरफ चिकित्सा संबंधी कई संभावनाएं खुली हैं, वहीं इससे अनेक नैतिक और वैधानिक प्रश्न भी खड़े हुए हैं। वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल (स्टेम कोशिकाओं) के जरिए तीन मॉडल मानव भ्रूण विकसित किए हैं। ये बिल्कुल वैसे हैं, जैसे अपने आरंभिक चरण में मानव भ्रूण होते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस कामयाबी से उन्हें जीन संबंधी कई प्रकार की बीमारियों (जेनेटिक डिसऑर्डर्स) को समझने में मदद मिलेगी। मसलन, बार-बार गर्भपात हो जाने जैसी समस्याओं के जीव-वैज्ञानिकों कारणों को इसके जरिए समझा जा सकेगा। ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर मैगडेलीना जेर्निका-गोएत्ज ने बुधवार को इस सफलता की जानकारी दी। अमेरिका के बॉस्टन में इंटरनेशनल सोसायटी फॉर स्टेम सेल रिसर्च की सालाना बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा- ‘स्टेम सेल्स की रीप्रोग्रामिंग करके हम मानव भ्रूण जैसे मॉडल तैयार कर सकते हैं।’

लेकिन ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि कृत्रिम भ्रूण का चिकित्सीय शोध के लिए तुरंत इस्तेमाल शुरू होने की संभावना नहीं है। ऐसे भ्रूण को किसी महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित करना फिलहाल गैर-कानूनी होगा। इसलिए यह साफ नहीं है कि अभी जो आरंभिक सफलता मिली है, क्या उसे आगे बढ़ाते हुए इस प्रयोग को उन्नत अवस्था तक ले जाया जा सकेगा।

लंदन स्थित स्टेम सेल बायोलॉजी एंड डेवलपमेंटल जेनेटिक्स के प्रमुख रॉबिन लॉवेल-बैज़ ने कहा है- ‘इस प्रयोग के पीछे विचार यह है कि अगर आप स्टेम कोशिकाओं के उपयोग से सामान्य मानव भ्रूण जैसे मॉडल तैयार कर सकें, तो हमें इस मामले में चकित करने वाली जानकारियां मिल सकती हैं कि मानव जीवन के विकास का आरंभ कैसे होता है।’

इसके पहले जेर्निका-गोएत्ज की टीम और इस्राइल स्थित वेइजमैन इंस्टीट्यूट की एक टीम अलग-अलग प्रयोगों में दिखा चुकी हैं कि चूहे के स्टेम सेल से बना भ्रूण सामान्य भ्रूण जैसे ढांचे में विकसित हो सकता है। यह ऐसा ढांचा होता है, जिसमें आंत, मस्तिष्क और धड़कता हुआ दिल होता है। जानकारों के मुताबिक इन प्रयोगों की सफलता के बाद से मानव भ्रूण के मॉडलों में ऐसी प्रक्रिया दिखाने की होड़ अनुसंधानकर्ताओं में लगी रही है।

कैम्ब्रिज-कैलटेक लैब में हुए ताजा प्रयोग के बारे में अभी पूरी रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। लेकिन बॉस्टन सम्मेलन में जेर्निका-गोएत्ज ने बताया कि उनकी टीम ने जो भ्रूण तैयार किया, वह 14 दिन के सामान्य मानव भ्रूण की हद तक विकसित हुआ है। विश्लेषकों के मुताबिक इस शोध की खबर उन बुद्धिजीवियों और समाज शास्त्रियों और धर्म गुरुओं को चिंतित करेगी, जो मानव की प्राकृतिक रचना में हस्तक्षेप को एक खतरनाक कार्य मानते हैं। इसे कृत्रिम मनुष्य तैयार करने की दिशा में एक कदम बताया जाएगा।

जानकारों का कहना है कि इसीलिए ऐसे प्रयोगों को आगे बढ़ाने के कानूनी प्रावधान का होना फिलहाल मुश्किल मालूम पड़ता है। जबकि बिना कानूनी प्रावधान के ऐसे प्रयोगों को आगे बढ़ाने वाले वैज्ञानिकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

 

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