स्विस मतदाताओं ने किया फैसला: देश में अब सार्वजनिक जगहों पर नहीं पहन सकेंगे बुर्का
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स्विट्जरलैंड में बुर्के पर बैन को लेकर चल रही बहस आखिरकार रविवार को खत्म हो गई और स्विस मतदाताओं ने अपने मत देकर यह फैसला कर दिया कि देश में अब सार्वजनिक जगहों पर बुर्का या नकाब नहीं पहन सकेंगे।
दरअसल, बुर्का सार्वजनिक स्थानों पर पहनने की छूट होनी चाहिए या नहीं, इस बात का फैसला करने के लिए जनमत संग्रह का सहारा लिया गया। जिसपर स्विट्जरलैंड की जनता ने सात मार्च को मतदान किया। इसके साथ ही देश के प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कुछ बदलावों को लेकर भी जनता की राय मांगी गई। इन सब मुद्दों पर जनमत संग्रह के दौरान मतदान हुआ।
जनमत संग्रह में सार्वजनिक स्थानों पर बुर्के पर बैन के लिए लोगों ने मतदान किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक के परिणामों के आधार पर 50 फीसदी से ज्यादा लोगों ने बैन के पक्ष में मतदान किया।
हालांकि प्रतिबंध लगाने के पक्ष वालों और प्रतिबंध के विरोध में वोट करने वालों के बीच वोट प्रतिशत का अंतर बेहद कम रहा। ब्रॉडकास्टर एसआरएफ के अनुमान के अनुसार, करीब 54 फीसदी लोगों ने जहां प्रतिबंध लगाने के पक्ष में वोट किया वहीं 46 फीसदी ने प्रतिबंध ना लगाने के लिए मतदान किया।
मास्क पहनने की रहेगी छूट
स्विस मतदाताओं ने दुकानों, रेस्तरां और सड़कों पर अपने चेहरे को पूरी तरह से कवर करने से लोगों को बैन करने की पहल के पक्ष में वोट डाले। हालांकि, धार्मिक स्थलों पर जाते समय चेहरा ढंकने और स्वास्थ्य कारणों, जैसे कि कोविड-19 से बचाव के दौरान मास्क पहनने की छूट रहेगी। हालांकि, स्विट्जरलैंड की संसद और देश की संघीय सरकार का गठन करने वाली सात सदस्यीय कार्यकारी परिषद ने इस जनमत संग्रह प्रस्ताव का विरोध किया।
दक्षिण पंथी स्विस पीपल्स पार्टी ने रविवार को हुए मतदान के दौरान 'अतिवाद बंद करो' जैसे नारे भी लगाए। वहीं एक प्रमुख स्विस इस्लामिक समूह ने कहा कि मुसलमानों के लिए यह एक 'काला दिन' था। कई मुस्लिमों ने आगाह किया है कि इस तरह के बैन से देश में लोगों के बीच मतभेद गहरे हो सकते हैं।
सेंट्रल काउंसिल ऑफ मुस्लिम ने एक बयान जारी कर कहा कि 'आज के फैसले से पुराने जख्म एक बार फिर ताजा हो गए हैं। इससे कानूनी असमानता के सिद्धांत को और बल मिला है और साथ ही मुस्लिम अल्पसंख्यकों को अलग रखे जाने के भी स्पष्ट संकेत मिलते हैं।
स्विस सरकार ने प्रतिबंध के खिलाफ तर्क देते हुए कहा था कि यह तय करना राज्य के अधीन नहीं है कि महिलाओं को क्या पहनना चाहिए। ल्यूसर्न विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार, स्विट्जरलैंड में लगभग कोई भी बुर्का नहीं पहनता है। केवल 30 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जो नकाब पहनती हैं। स्विट्जरलैंड की 86 लाख आबादी में पांच फीसदी आबादी मुस्लिमों की है जिसमें से ज्यादातर तुर्की, बोस्निया और कोसोवो से हैं।
बता दें कि फ्रांस ने साल 2011 में ही चेहरे को पूरी तरह से ढंकने वाले कपड़े पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था। वहीं डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड और बुल्गेरिया में भी सार्वजनिक जगहों पर बुर्का पहनने पर पाबंदियां हैं।