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भारत में दस साल पहले मिला ‘सुपरबग’ अब आर्कटिक में फैला
Tue, 29 Jan 2019 06:17 AM IST
गौरव द्विवेदी
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Tue, 29 Jan 2019 06:17 AM IST
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भारत में दस वर्ष पूर्व पहली बार पाया गया ‘सुपरबग’ अब आर्कटिक में फैल चुका है। सुपरबग एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीन (एआरजी) होता है, जिस पर कोई एंटीबायोटिक दवा असर नहीं करती है। इस तरह के एआरजी विभिन्न सूक्ष्म जीवों में एक से ज्यादा दवाओं के प्रति प्रतिरोधकता (एमडीआर) पैदा करते हैं।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, पहली बार नई दिल्ली में एनडीएम-1 नामक एआरजी पाया गया था। इसे प्रतिरोधक जीन बीएलएएनडीएम-1 से कोड किया गया था। सुपरबग बीएलएएनडीएम-1 को 2008 में पहली बार भारतीय मूल के स्वीडिश मरीज में पाया गया था, लेकिन 2010 तक यह दिल्ली के पानी में पहुंच चुका था। तब से लेकर अब तक करीब 100 से ज्यादा देशों में यह सुपरबग मिल चुका है। कई जगहों पर इसके नए वैरिएंट भी मिले हैं।
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ब्रिटेन की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड ग्राहम ने कहा कि ध्रुवीय क्षेत्र पृथ्वी पर अंतिम प्रचलित प्राचीन पारिस्थितिक तंत्रों में से एक हैं, जो एंटीबायोटिक युग से पहले की पृष्ठभूमि को चिह्नित करने का मंच प्रदान करता है। इससे हम एंटीबायोटिक प्रतिरोधी प्रदूषण की प्रगति को समझ सकते हैं। आर्कटिक जैसे क्षेत्रों में अतिक्रमण इस बात को पुष्ट करता है कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध का प्रसार कितना तेज और दूरगामी हो गया है।
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इसे स्थानीय स्तर के बजाय वैश्विक रूप से देखा जाना चाहिए। कुछ ऐसे एंटीबायोटिक हैं जो दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो चुके बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम हैं।आर्कटिक पर बीएलएएनडीएम-1 और उससे संबंधित जीन का पाया जाना चिंता का विषय है।
स्वालवार्ड की मिट्टी में मिले 131 सुपरबग
एनवायरमेंटल इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, आर्कटिक के स्वालबार्ड द्वीप के कोंग्सफजॉर्डन क्षेत्र के आठ स्थानों पर मिट्टी के नमूनों का डीएनडी का विश्लेषण करने पर वहां कुल 131 एआरजी पाए गए। वैज्ञानिकों का मानना है कि विभिन्न जीवों और मनुष्यों के पेट में मिलने वाले बीएलएएनडीएम-1 व अन्य एआरजी संभवत: आर्कटिक आने वाले पक्षियों और पर्यटकों के जरिये यहां पहुंचे होंगे।