अमेरिका: सिरदर्द बन गया है शिनजियांग में उत्पादित वस्तुओं का आयात रोकना
अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी के मुताबिक शिनजियांग में बनी वस्तुओं का आयात या तस्करी रोकने के लिए अमेरिका में पिछले एक साल में इंतजाम मजबूत किए गए हैं। लेकिन अभी भी शक है कि बड़ी मात्रा में यहां जबरिया मजदूरी से तैयार हुई वस्तुएं यहां आ रही हैं, जिनका लाखों अमेरिकी इस्तेमाल कर रहे हैं...
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‘जबरिया मजदूरी’ के उत्पादित चीजों का आयात रोकना अमेरिकी एजेंसियों के लिए लगातार बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले महीने अमेरिका के अटलांटा शहर में बाहर से लाए गए दर्जनों बक्से विमान से उतारे गए। उनमें शर्ट, ब्लाउज और दूसरे उत्पाद भरे हुए थे। इन चीजों को अमेरिका में बेचने के लिए लाया गया था। इन बक्सों को संबंधित एजेंसी कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीपीबी) ने पकड़ लिया। लेकिन उसके साथ ही इस तरह हो रहे आयात पर नए सिरे से रोशनी पड़ी है।
जो बक्से पकड़े गए, उन पर लिखा था कि उन्हें वस्तुएं वियतनाम में बनी हैं। लेकिन तब कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन के अधिकारियों को शक हुआ कि ये असल में चीन के शिनजियांग प्रांत में उत्पादित हुई हैं। आरोप है कि शिनजियांग में उइगर मुसलमानों से जबरिया मजदूरी करवाई जाती है। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक वहां दस लाख से ज्यादा उइगर मुसलमानों को लेबर कैंप में रखा गया है। वहां से उनकी मेहनत से तैयार वस्तुओं का निर्यात किया जाता है।
अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी के मुताबिक शिनजियांग में बनी वस्तुओं का आयात या तस्करी रोकने के लिए अमेरिका में पिछले एक साल में इंतजाम मजबूत किए गए हैं। लेकिन अभी भी शक है कि बड़ी मात्रा में यहां जबरिया मजदूरी से तैयार हुई वस्तुएं यहां आ रही हैं, जिनका लाखों अमेरिकी इस्तेमाल कर रहे हैं। इन वस्तुओं में कपड़ों से लेकर पाम ऑयल, टमाटर, रबर ग्लव्स और कृत्रिम बाल भी शामिल हैं।
एनबीसी के मुताबिक अमेरिका में बीते एक साल में लागू हुई निगरानी की व्यवस्था में मुख्य ध्यान चीन से आने वाले कपड़ों पर रहा है। सिर्फ इस वर्ष चीन से आए लगभग एक हजार जहाजों में से 75 फीसदी को रोक कर अधिकारियों ने जांच पड़ताल की। उन्हें इसी शक में रोका गया कि उन पर शिनजियांग में उत्पादित चीजें हैं। चीन में होने वाले कपड़े के उत्पादन में से 20 फीसदी शिनजियांग में तैयार होता है। जानकारों के मुताबिक अमेरिकी एजेंसियों को 1930 में बने एक कानून के तहत जबरिया मजदूरी से तैयार चीजों को रोकने का अधिकार मिला हुआ है। लेकिन 85 साल पुराने इस कानून में कई कमियां हैं, जिनका फायदा ऐसी चीजें लाने वाले लोग उठाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि दुनिया भर में लगभग ढाई करोड़ लोग जबरिया मजदूरी के शिकार हैं। जो लोग ऐसे मजदूरों से काम लेते हैं, वे अकसर उन्हें वेतन नहीं देते, या उनका पासपोर्ट जब्त कर लेते हैं। उन मजदूरों के साथ मार-पिटाई भी की जाती है और कई बार उन्हें जेल मे डाल दिया जाता है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा आयात देश है। इसलिए उससे ये उम्मीद की जाती है कि वह जबरिया मजदूरी के खिलाफ कड़े कदम उठाए।
जानकारों के मुताबिक अमेरिका में पहले इस मामले में ढिलाई बरती जाती थी। लेकिन चीन से उसका टकराव बढ़ने के बाद अब अमेरिकी हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर कड़ी निगरानी की जा रही है। लेकिन यह तय करना बड़ी चुनौती बना हुआ है कि आयातित कपड़ा असल में किस स्थान का है। बताया जाता है कि शिनजियांग में तैयार हुए कपड़ा उत्पादों में दूसरे क्षेत्रों के कपास का भी मिलाया जाता है। फिर मुमकिन है कि उसकी प्रोसेसिंग किसी दूसरे देशों में हुई हो। ऐसे में उत्पाद जहां अंतिम रूप से तैयार होता है, वहीं का ठप्पा उस पर लगा दिया जाता है।
जानकारों के मुताबिक सीबीपी अभी भी एक छोटी एजेंसी है। इसलिए अकसर उसे उन गैर-सरकारी संगठनों से मिली सूचना पर निर्भर रहना पड़ता है, जो जबरिया मजदूरी के खिलाफ मुहिम चलाते हैं। इसीलिए तमाम चौकसी के बावजूद शक है कि अभी भी जबरिया मजदूरी से तैयार चीजों का अमेरिका में खूब उपभोग हो रहा है।