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तमिल अल्पसंख्यक: 'आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं', इशारों में विक्रमसिंघे ने भारत को दी नसीहत

Thu, 10 Nov 2022 08:14 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 10 Nov 2022 08:14 PM IST
सार

राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को कहा कि श्रीलंका को अपने आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। इस दौरान उन्होंने देश के तमिल अल्पसंख्यक दलों को अगले सप्ताह बातचीत के लिए आमंत्रित किया। जिससे कि उनके सामने कुछ लंबित मुद्दों का समाधान हो सके।

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Sri Lanka President Wickremesinghe opposes outside interference on Tamil minority issues
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

श्रीलंका इस समय आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। आलम यह है कि वहां के लोग अपनी प्राथमिक जरूरतों को भी नहीं पूरा कर पा रहे हैं। इस आर्थिक संकट से निपटने में भारत ने श्रीलंका की हर संभव मदद भी की है, लेकिन इस बीच, द्वीप राष्ट्र के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने बिना नाम लिए भारत पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने गुरुवार को बिना नाम लिए भारत की ओर इशारा करते हुए कहा कि श्रीलंका को अपने आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है, हम अपने मसले खुद हल कर सकते हैं। इस दौरान उन्होंने तमिल अल्पसंख्यक मुद्दों  को सुलझाने के लिए उनसे वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। गौरतलब है कि श्रीलंका में तमिल अल्पसंख्यक दलों के मुद्दों के निवारण के लिए भारत कई बार वहां की सरकार से गुजारिश कर चुका है।  

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तमिल पार्टियों को किया वार्ता के लिए आमंत्रित
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपने देश के मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए दूसरों की जरूरत नहीं है। विक्रमसिंघे ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि हम अपने मुद्दों को सुलझा सकते हैं और यही हम हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने तमिल पार्टी के सांसदों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा, 'मैं आप सभी को अगले सप्ताह बातचीत करने और स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ से पहले सभी लंबित मुद्दों को निपटाने के लिए आमंत्रित करता हूं।' बता दें कि 4 फरवरी, 2023 को श्रीलंका ब्रिटेन से अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाएगा। 
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पारित किया जाएगा नया कानून
इस दौरान  राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने कहा कि सरकार पहले ही उन मुद्दों पर चर्चा कर चुकी है, जिनके परिणामस्वरूप कुछ तमिल कैदियों को रिहा किया गया था, जिन्हें लिट्टे के आतंकवादी कृत्यों के संबंध में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि हालांकि अभी कुछ कैदियों को रिहा किया जाना बाकी है। विक्रमसिंघे ने संसद को यह भी बताया कि जनवरी या फरवरी में एक नया आतंकवाद विरोधी अधिनियम और नया भ्रष्टाचार विरोधी कानून पारित किया जाएगा। 
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 तमिल पार्टियों ने नहीं दिया है कोई जवाब
हालांकि, राष्ट्रपति के निमंत्रण पर अब तक तमिल पार्टियों के नेतृत्व की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। बता दें कि लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के साथ युद्ध के बाद से श्रीलंकाई सरकार तमिल समूहों के खिलाफ आक्रामक रही है।  


तमिल मुद्दों के निपटारे के लिए भारत रहा है प्रयासरत  
श्रीलंका में तमिल लोगों के मुद्दों के निपटारे के लिए भारत लगातार प्रयास करता आया है। हाल ही में, श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका के प्रमुख तमिल सांसदों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था।इसमें उन्होंने लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़े तमिलों से जुड़े मुद्दों को सुलझाने में मदद करने की गुजारिश की थी।

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