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India China News: श्रीलंका की आड़ में अपना एजेंडा ना चलाए चीन, चीनी राजदूत पर बरसा भारत, जमकर सुनाई खरी खोटी

Sun, 28 Aug 2022 09:25 PM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 28 Aug 2022 09:25 PM IST
सार

श्रीलंका में भारतीय दूतावास ने ट्वीट कर कहा कि हमने चीनी राजदूत की टिप्पणियों को देखा है। बुनियादी राजनयिक शिष्टाचार का उनका उल्लंघन एक व्यक्तिगत विशेषता हो सकती है या एक बड़े राष्ट्रीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। श्रीलंका के उत्तरी पड़ोसी के बारे में उनका दृष्टिकोण उनके देश के व्यवहार से प्रभावित हो सकता है।

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Sri Lanka Indian Embassy on Chinese envoy Lanka remarks Reflecting national attitude
भारत-चीन (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

श्रीलंका को लेकर भारत और चीन में तकरार सामने आ गई है। श्रीलंका के आंतरिक मामलों में ‘‘हस्तक्षेप’’ करने के चीन के आरोप पर भारत ने पलटवार करते हुए उससे दृढ़ता से कहा कि कोलंबो को अब ‘‘सहयोग’’ की आवश्यकता है न कि किसी अन्य देश के एजेंडे को पूरा करने के लिए ‘‘अवांछित दबाव या अनावश्यक विवादों’’ की जरूरत है। भारतीय हाई कमिशन ने शनिवार को कोलंबो में चीनी राजदूत को संकटग्रस्त देश पर अनुचित दबाव बनाने और श्रीलंका के हंबनटोटा में चीनी जासूसी जहाज तैनात करने के मामले में विवाद भड़काने के लिए फटकार लगाई।

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भारत ने चीनी राजदूत के बयान को चीन के रवैये से जोड़ दिया है। भारत ने कहा है कि श्रीलंका को मदद और समर्थन की जरूरत है। चीन अपना एजेंडा चलाने के लिए अवांछित दबाव या अनावश्यक विवादों में न लपेटें।
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चीनी राजदूत ने क्या कहा था
चीन के बैलिस्टिक मिसाइल और उपग्रह निगरानी पोत ‘युआन वांग-5’ के हंबनटोटा बंदरगाह पर लंगर डालने पर भारत की आपत्ति की ओर इशारा करते हुए श्रीलंका में चीन के राजदूत की झेनहोंग ने शुक्रवार को कहा था कि बिना किसी साक्ष्य के तथाकथित सुरक्षा चिंताओं पर आधारित ‘बाहरी अवरोध’ श्रीलंका की संप्रभुता और स्वतंत्रता में पूरी तरह हस्तक्षेप है।
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श्रीलंका में चीन के राजदूत की झेनहोंग ने एक बयान में कहा था कि "चीन इस बात से खुश है कि श्रीलंका ने चीनी जहाज को आखिरकार हंबनटोटा में तैनात करने की इजाजत दी। बीजिंग और कोलंबो संयुक्त रूप से एक दूसरे की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा करते हैं। भारत का नाम लिए बिना चीनी राजदूत ने कहा था कि “बिना किसी साक्ष्य के तथाकथित सुरक्षा चिंताओं पर आधारित ‘बाहरी अवरोध’ श्रीलंका की संप्रभुता और स्वतंत्रता में पूरी तरह हस्तक्षेप है।” चीनी राजदूत ने यह भी कहा था कि श्रीलंका ने चीनी जहाज को हंबनटोटा में आने की इजाजत देकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का उदाहरण दिया है।” 
 

भारत ने चीन को जमकर सुनाई खरी खोटी
इसपर श्रीलंका में भारतीय दूतावास ने ट्वीट कर कहा कि "हमने चीन के राजदूत की टिप्पणियों पर गौर किया है। यह बयान बुनियादी राजनयिक शिष्टाचार का उनका उल्लंघन है।" भारत ने कहा कि यह निजी विशेषता हो सकती है या एक राष्ट्रीय रवैये को दर्शाती है। श्रीलंका के उत्तरी पड़ोसी के बारे में उनका दृष्टिकोण उनके अपने देश के व्यवहार से प्रभावित हो सकता है। हम उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि भारत का नजरिया बहुत अलग है। चीन का कथित वैज्ञानिक अनुसंधान पोत की यात्रा के लिए एक भू-राजनीतिक संदर्भ थोपना एक सस्ता बहाना है।

भारत ने चीनी कर्ज को लेकर दुनिया को चेतावनी दी
भारत ने चीनी कर्ज को लेकर श्रीलंका का उदाहरण देकर पूरी दुनिया को चेतावनी भी दी। भारत ने कहा कि अस्पष्टता और कर्ज से प्रेरित एजेंडा अब एक बड़ी चुनौती है। खासकर छोटे देशों के लिए हालिया घटनाक्रम एक चेतावनी है। चीनी दूत ने श्रीलंका के संबंधित दूर या निकटवर्ती देशों की निंदा की थी। भारत ने कहा कि श्रीलंका को किसी दूसरे देश के एजेंडे को पूरा करने के लिए अवांछित दबाव या अनावश्यक विवादों की नहीं बल्कि समर्थन की जरूरत है।

श्रीलंका ने जहाज को 16 अगस्त से 22 अगस्त तक बंदरगाह पर रहने की अनुमति इस शर्त के साथ दी थी कि वह श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्वचालित पहचान प्रणाली चालू रखेगा और श्रीलंकाई जलक्षेत्र में कोई वैज्ञानिक अनुसंधान नहीं किया जाएगा। नई दिल्ली में इस बात की आशंका जताई गई थी कि चीन के जहाज की निगरानी प्रणाली श्रीलंकाई बंदरगाह जाने के मार्ग में भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों की जासूसी की कोशिश कर सकती है।

चीन को रोकने में भारत बड़ा सहयोगी : माइक गिल्डे
अमेरिकी नौसेना के एडमिरल माइक गिल्डे ने कहा है कि चीन को रोकने में अमेरिका के लिए भारत एक बड़ा सहयोगी होगा। वॉशिंगटन में एक सेमिनार में उन्होंने कहा कि चीन को रोकने के लिए जापान और भारत के रूप में दो अहम प्रतिरोध मौजूद हैं। चीन की नीयत ताइवान को लेकर खराब होती है तो भारत और जापान उसे रोकने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा, मैंने किसी अन्य देश की तुलना में भारत की ज्यादा यात्रा की है। हाल में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा को लेकर चीन ने इसे अपनी संप्रभुता पर सवाल माना था।

एलएसी पर तनाव बढ़ने  की संभावना : केविन रूड
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केविन रूड ने शनिवार को कहा कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के तेजी से बढ़ते आक्रामक रवैये से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत के साथ सैन्य गतिरोध की संभावना बढ़ जाती है। रूड ने कहा, एलएसी के पास चीनी कार्रवाई जमीन पर वास्तविकता को बदलने की प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है।

देखना होगा कि भारत चीन पर कितना भरोसा करता है...
2007-10 के दौरान और 2013 में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री रहे रूड ने कहा कि शी जिनपिंग भारत के साथ सीमा विवाद का हल सुधारने की पहल करते भी हैं तो क्या भारतीय पक्ष चीन पर भरोसा कर सकता है। वह भी तब, जब दो अनौपचारिक शिखर सम्मेलनों के बाद भी एलएसी पर गतिरोध देखने को मिल चुका है।

 


श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने श्रीलंका में चीनी राजदूत क्यूई जेनहोंग की हालिया टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस मामले में जेएनयू के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने कहा कि चीन बुल्फ वॉरियर डिप्लोमैसी अपना रहा है। वहीं, भारत के पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन ने कहा कि भारत ने पहले ही चीन के इस दावे को खारिज कर दिया था कि उसने कोलंबो पर एक उच्च तकनीक वाले चीनी अनुसंधान पोत युआन वांग 5 की यात्रा को हंबनटोटा बंदरगाह तक स्थगित करने का दबाव डाला था। भारत ने कहा था कि श्रीलंका एक संप्रभु देश है और अपने स्वतंत्र निर्णय लेता है। 

भारत के पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन ने कहा कि विकासशील दुनिया के लिए या छोटे देशों के लिए चीनी आर्थिक मॉडल शायद ही ऐसा मॉडल हो, जिस पर किसी को गर्व हो। वहीं, भारत का चरित्र बहुत इससे बहुत अलग है। भारत के चरित्र को वैश्विक समुदाय द्वारा तेजी से पहचाना जा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन के मुकाबले अपने पड़ोसियों से निपटने के लिए हमारा एक बहुत अलग दृष्टिकोण है। 
 
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