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Sri Lanka Economic Crisis: पीएम विक्रमसिंघे ने विश्व बैंक और एडीबी के साथ की बैठक, भारत ने भेजा चार लाख मीट्रिक टन ईंधन
Sun, 15 May 2022 10:20 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 15 May 2022 10:20 PM IST
सार
श्रीलंका के नवनियुक्त प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि बैंकों में डॉलर की कमी के कारण सरकार अब आवश्यक धन जुटाने के लिए अन्य विकल्पों पर विचार कर रही है। प्रधान मंत्री विक्रमसिंघे ने यह भी कहा कि संविधान के 21वें संशोधन पर सोमवार को चर्चा की जाएगी।
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नए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे
- फोटो : Agency
विस्तार
श्रीलंका के नवनियुक्त प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने रविवार को विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के प्रतिनिधियों के साथ देश में मौजूदा आर्थिक संकट पर चर्चा की। प्रधान मंत्री विक्रमसिंघे ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के प्रतिनिधियों के साथ हुई चर्चा दवा, खाद्य और उर्वरक आपूर्ति के मुद्दों के समर्थन पर केंद्रित थी। इस बीच भारत ने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहे द्वीप राष्ट्र को 400,000 मीट्रिक टन (एमटी) ईंधन भेजा है। भारतीय उच्चायोग ने इसको लेकर ट्वीट भी किया।
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प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने दी जानकारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि दो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की बैठक के साथ ही वित्तीय सहायता के लिए एक विदेशी संघ की स्थापना के संबंध में विदेशी प्रतिनिधियों के साथ भी विचार-विमर्श किया गया है। इस दौरान पीएम रानिल विक्रमसिंघे ने इस बात पर जोर दिया कि वार्ता सकारात्मक रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले सप्ताह के लिए ईंधन आवश्यकताओं के भुगतान के लिए आवश्यक धन प्राप्त करना सरकार के लिए प्राथमिक चुनौती है।
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सरकार धन जुटाने के लिए अन्य विकल्पों पर कर रही विचार
उन्होंने कहा कि बैंकों में डॉलर की कमी के कारण सरकार अब आवश्यक धन जुटाने के लिए अन्य विकल्पों पर विचार कर रही है। प्रधान मंत्री विक्रमसिंघे ने यह भी कहा कि संविधान के 21वें संशोधन पर सोमवार को चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि संविधान के 21वें संशोधन पर सोमवार को चर्चा होगी और इसे मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।उन्हें देश के सबसे खराब आर्थिक संकट से निपटने के लिए सरकार के गठन में पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के नेतृत्व वाली एसएलएफपी से समर्थन मिला था।
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सोमवार रात से नौ घंटे का कर्फ्यू
इस बीच खबर आ रही है कि श्रीलंका की सरकार देश में चल रहे विरोध-प्रदर्शन को रोकने की कोशिश करने के लिए सोमवार रात आठ बजे से कर्फ्यू लगाने जा रही है। यह कर्फ्यू मंगलवार सुबह पांच बजे तक चलेगा।
एसएलएफपी के अध्यक्ष ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र
एसएलएफपी के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति सिरिसेना ने प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे को पत्र लिखकर कहा है कि उनकी पार्टी उनकी सरकार के गठन का समर्थन करेगी। विक्रमसिंघे ने मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करने के लिए पिछली सरकार छोड़ने वाले 10 दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया है और कहा है कि वह उनसे मिलने के बाद नियुक्ति करेंगे।
राजपक्षे की श्रीलंका पोदुजाना पेरमुना पार्टी (एसएलपीपी) ने विक्रमसिंघे को अपना समर्थन दिया है। साथ ही 225 सदस्यीय संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग सभी दलों ने कहा है कि हालांकि वे विक्रमसिंघे सरकार के पक्ष नहीं होंगे, लेकिन वे श्रीलंका को मौजूदा आर्थिक संकट से बाहर खींचने के उनके प्रयास में उनका समर्थन करेंगे।
वेसाक पोया दिवस पर राष्ट्रपति गोटबाया ने की अपील
इस दौरान संकट में घिरे राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने सभी सांसदों से एकजुट होने और लोगों की गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए तुरंत काम करने का आह्वान किया।वेसाक पोया दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि हमें वर्तमान स्थिति के प्रति सचेत रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वेसाक पोया दिवस भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान और मृत्यु की याद दिलाता है। कहा जाता है कि उनके जीवन की तीन घटनाएं एक ही तारीख को घटी थीं।
'भगवान बुद्धन ने दिया दुनिया को बेहतर बनाने का संदेश'
प्रधान मंत्री विक्रमसिंघे ने भी इस अवसर पर एक संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि श्रीलंका के भीतर संयम और स्थिरता बहाल की जानी चाहिए। इस मौके पर विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा ने अपने संदेश में कहा कि भगवान बुद्ध ने दुनिया को महत्वाकांक्षा, अवसरवाद और स्वार्थ के बजाय परोपकार के माध्यम से दुनिया को बेहतर बनाने का संदेश दिया। भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को आधुनिक जीवन में व्यवहार में भी लागू किया जा सकता है।
भारतीय उच्चायोग ने दी शुभकामनाएं
भारतीय उच्चायोग ने भी इस अवसर पर सभी श्रीलंकाई नागरिकों को शुभकामनाएं दीं। इस बीच प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने खराब आर्थिक संकट से निपटने के लिए राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को सार्वजनिक समर्थन दिया।