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Hindi News ›   World ›   Sri lanka Crisis: Despite IMF loan announcement, Sri Lanka troubles still not gone away

Sri lanka Crisis: आईएमएफ की कर्ज घोषणा के बावजूद दूर नहीं हुई हैं श्रीलंका की मुश्किलें

Sat, 03 Sep 2022 04:55 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 03 Sep 2022 04:55 PM IST
सार

Sri lanka Crisis: आईएमएफ ने यह साफ कर दिया है कि 2.9 बिलियन डॉलर के कर्ज का भुगतान वह तभी शुरू करेगा, जब कर्जदाता देशों के बीच ऋण रिस्ट्रक्चरिंग पर सहमति बन जाएगी। आईएमएफ अभी सिर्फ शुरुआती तौर पर ही कर्ज देने पर राजी हुआ है। असल भुगतान के रास्ते में अभी रुकावटें हैं...

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विस्तार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) 2.9 बिलियन डॉलर का कर्ज मंजूर कर देने के बावजूद श्रीलंका की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। खुद आईएमएफ ने ये चेतावनी दी है कि अगर कर्ज चुकाने की समयसीमा तय करने (डेट रिस्ट्रक्चरिंग) के फॉर्मूले पर बाकी कर्जदाता देश राजी नहीं हुए, तो श्रीलंका का संकट और गहरा सकता है। समझा जाता है कि इस मामले में पश्चिमी कर्जदाताओं और चीन के बीच सहमति बनाना मुश्किल काम है।

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आईएमएफ ने यह साफ कर दिया है कि 2.9 बिलियन डॉलर के कर्ज का भुगतान वह तभी शुरू करेगा, जब कर्जदाता देशों के बीच ऋण रिस्ट्रक्चरिंग पर सहमति बन जाएगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक आईएमएफ अभी सिर्फ शुरुआती तौर पर ही कर्ज देने पर राजी हुआ है। असल भुगतान के रास्ते में अभी रुकावटें हैं। आईएमएफ की टीम के प्रमुख पीटर ब्रिउअर ने यहां कहा- ‘अगर कोई एक या कई कर्जदाता देश ऐसे आश्वासन देने पर राजी नहीं हुए, तो वास्तव में श्रीलंका का संकट और गहराएगा। उस स्थिति में श्रीलंका की कर्ज भुगतान क्षमता पर शक बना रहेगा।’  

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इस कड़ी चेतावनी को देखते हुए श्रीलंका सरकार ने अपने सभी कर्जदाताओं से अगले कुछ हफ्तों के दौरान संपर्क करने का फैसला किया है। इन बैठकों में आईएमएफ के साथ श्रीलंका की बनी सहमति के बारे में जानकारी दी जाएगी। श्रीलंका के वित्त मंत्रालय ने ये जानकारी दी है। इस बीच श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने कहा है- ‘मेरी सरकार जरूरी सुधार लागू करने के प्रति वचनबद्ध है। इससे आईएमएफ और अन्य कर्जदाता देशों के सहमति बनने का रास्ता खुलना चाहिए, ताकि हम कर्ज चुकाने में सक्षम हो सकें।’

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श्रीलंकाई मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक कर्जदाता देशों के साथ बैठक में श्रीलंका की तरफ से देश की आर्थिक हालत के बारे में प्रेजेंटेशन पेश किया जाएगा। साथ ही उन्हें आईएमएफ के साथ जिन शर्तों पर सहमति बनी है, उनकी जानकारी जाएगी। सरकारी सूत्रों ने कहा है कि सरकार विधि और वित्तीय सलाहकारों के साथ मिल कर ऋण रिस्ट्रक्चरिंग रणनीति तैयार करने में जुटी हुई है।

पीटर ब्रिउअर से यहां पूछा गया कि संकट और गहराने से उनका क्या मतलब है। इसके जवाब में उन्होंने कहा- ‘इसका अर्थ यह है कि कर्ज चुकाने के लिए श्रीलंका के पास जो संसाधन मौजूद हैं, वे और कम हो जाएंगे। इसलिए यह सभी कर्जदाताओं के हित में है कि वे आपस में सहयोग करें और सभी श्रीलंका के साथ सहयोग करें, ताकि श्रीलंका इस संकट से यथाशीघ्र उबर सके। संकट से उबरने का मतलब यह है कि श्रीलंका कर्ज चुकाने की क्षमता वापस हासिल कर सके और नए कर्ज को चुकाने में सक्षम हो।’

वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी कर्जदाता देशों के समूह पेरिस क्लब की डिफॉल्टर देशों के बारे में नीति एक जैसी है। ये नीति आईएमएफ से मेल खाती है। लेकिन चीन की इस मामले में अलग नीति है। श्रीलंकाई अधिकारियों का कहना है कि चीन कर्ज की मात्रा घटाने को तैयार नहीं है। इसीलिए श्रीलंका ने लीगल एडवाइजरी फर्मों- लजार्ड और क्लिफॉर्ड एलएलपी को अनुबंधित किया है। लजार्ड ने जांबिया को कानूनी सलाह दी थी। जांबिया के कर्जदाताओं में चीन भी शामिल था।

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