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Hindi News ›   World ›   South korea ban anti-kim jong un leaflets balloons sent to North korea

उत्तर कोरिया से दोस्ती की तरफ दक्षिण कोरिया का एक ठोस कदम

Wed, 16 Dec 2020 04:20 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिओल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिओल Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 16 Dec 2020 04:20 PM IST
सार

नए कानून के तहत बिना सरकार की इजाजत के गुब्बारे छोड़ने वाले किसी व्यक्ति को तीन साल तक की कैद या तीन करोड़ वोन (लगभग 28 हजार डॉलर) का जुर्माना हो सकेगा...

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South korea ban anti-kim jong un leaflets balloons sent to North korea
Kim and Moon - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

दक्षिण कोरिया की संसद ने एक असाधारण बिल पारित किया है। इसके तहत उत्तर कोरिया में जाकर पर्चे गिराने वाले गुब्बारों को दक्षिण कोरिया से छोड़ने को अपराध बना दिया गया है। इसे उत्तर कोरिया से संबंध सुधारने की दक्षिण कोरिया सरकार की प्रबल इच्छा के रूप में देखा गया है। आलोचकों ने कहा है कि दक्षिण कोरिया की सरकार अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए अपने देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने की हद तक चली गई है।

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संसद में 187 सदस्यों ने इस बिल का समर्थन किया। उनमें ज्यादातर सत्ताधारी पार्टी के हैं। इससे ये जाहिर हुआ कि सत्ताधारी पार्टी में प्रधानमंत्री मून जाये-इन की उत्तर कोरिया से संबंध सुधारने की नीति को भारी समर्थन हासिल है। ज्यादातर विपक्षी सदस्यों ने इस बिल पर मतदान के दौरान संसद का बहिष्कार किया। इसके पहले उन्होंने बिल पर मतदान को टलवाने की कोशिश की। लेकिन सत्ताधारी पार्टी अपने इरादे पर कायम रही।
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यह पहला मौका है, जब दक्षिण कोरिया में उत्तर कोरिया विरोधी पर्चों को सीमा पार भेजने की कोशिश के खिलाफ कानून बनाया गया है। पहले कुछ मौकों पर सरकारी आदेश से गुब्बारों से पर्चे भेजने पर रोक जरूर लगाई गई थी, लेकिन आम तौर पर उत्तर कोरिया विरोधी कार्यकर्ता गुब्बारे भेजते रहे हैं। गुब्बारों में पर्चे भरने के बाद हिलियम गैस से उसे उड़ा कर सीमा पार उत्तर कोरिया भेजा जाता रहा है। इस पर उत्तर कोरिया की सरकारें नाराजगी जताती रही हैं।
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प्रधानमंत्री मून के समर्थक सांसदों ने बहस के दौरान कहा कि ये कानून बेवजह उत्तर कोरिया को भड़काने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए बनाया जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच संबंधों में स्थिरता लाने में मदद मिलेगी। साथ ही सीमाई इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।

नया कानून तमाम औपचारिकताएं पूरी होने के बाद तीन महीने बाद लागू होगा। लेकिन सियोल स्थित वकीलों के एक गुट ने कहा है कि वह इस कानून को कोर्ट में चुनौती देगा। संसद के विपक्षी कंजरवेटिव सदस्यों का कहना है कि ये कानून लोकतंत्र, स्वतंत्रता और समानता की भावना के खिलाफ है। विपक्षी सांसद ने ताए योंग शो ने मीडिया से कहा कि इस कानून का मकसद उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन से हाथ मिलाना है। ऐसा दक्षिण करिया के निवासियों को गुलाम बना कर किया जा रहा है।

नए कानून के तहत बिना सरकार की इजाजत के गुब्बारे छोड़ने वाले किसी व्यक्ति को तीन साल तक की कैद या तीन करोड़ वोन (लगभग 28 हजार डॉलर) का जुर्माना हो सकेगा। यही दंड गुब्बारा भेजने के लिए सामग्रियां रखने वाले या धन देने वाले व्यक्तियों को भी हो सकेगा। साथ ही यही सजा उन लोगों को भी हो सकेगी, जो सीमाई इलाकों में लाउडस्पीकर से उत्तर कोरिया विरोधी प्रचार करेंगे या होर्डिंग लगाएंगे।

मून और किम के बीच अप्रैल 2018 में मुलाकात हुई थी। तब दोनों शीत युद्ध जैसे मनोवैज्ञानिक युद्ध को रोकने पर सहमत हुए थे। प्रधानमंत्री मून का कहना है कि उस सहमति के तहत दक्षिण कोरियाई नागरिकों के गुब्बारा भेजने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना जरूरी है। मून सरकार ने गुब्बारा भेजने के मामलों पर उत्तर कोरिया के नाराजगी जताने के छह महीने बाद ये कानून बनाया है।

तब किम जोंग उन की शक्तिशाली बहन यो जोंग ने इस मामले में दक्षिण कोरियाई सरकार की अक्षमता की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने गुब्बारा भेजने जैसी गतिविधियां तुरंत बंद करने की मांग की थी। तभी मून ने कहा था कि उनकी सरकार इस मामले में कानून बनाएगी। लेकिन उससे उत्तर कोरिया का गुस्सा शांत नहीं हुआ था। उसने इसका इजहार अपने इलाके में बने दक्षिण कोरियाई संपर्क कार्यालय को ध्वस्त करके किया था।


पिछले सितंबर में एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया, जब उत्तर कोरियाई सैनिकों ने एक दक्षिण कोरियाई मछली पालन अधिकारी को गोली मार दी। वो अधिकारी उत्तर कोरिया के जल क्षेत्र में उत्तर कोरिया विरोधी प्रचार सामग्रियां फैला रहा था। बाद में किम जोंग उन ने इस गोलीबारी के लिए माफी मांगी, जिसे असाधारण घटना माना गया। गौरतलब है कि माफी मांगना किम की आम छवि के खिलाफ है। अब उसी भावना को आगे बढ़ाते हुए मून ने वो कानून बनाया है, जिससे उन्हें उम्मीद है कि उत्तर कोरिया में उनके देश के लिए अच्छी भावनाएं पैदा होंगी।

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