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कोरोना की दूसरी लहर : यूरोप की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, हालात बेकाबू

वर्ल्ड डेस्क, ब्रसेल्स Updated Sun, 15 Nov 2020 07:35 PM IST
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सार

  • कई यूरोपीय देशों में फिर से लॉकडाउन, पर हालात काबू में नहीं
  • इटली में स्थिति बिगड़ी, अस्पतालों में होने लगी बेड की कमी
  • फ्रांस में दूसरे दौर की महामारी के बाद हालत थोड़ी संभली

विस्तार

कोरोना वायरस का प्रकोप दुनिया भर में जारी है। यूरोपीय देशों में कोरोना वायरस की दूसरी लहर आ गई। यूरोप के कई देशों में कोरोना की दूसरी लहर की तीखी मार पड़ी है।इस कारण कुछ देशों में सख्त लॉकडाउन लागू किया गया है। शुक्रवार रात तक के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि जहां सख्त नियम लागू किए गए, वहां संक्रमण के फैलाव में कुछ गिरावट आई है। मगर कई देशों में संक्रमण के मामले अभी भी बढ़ रहे हैं।अलग-अलग यूरोपीय देशों की मीडिया में छप रही रिपोर्टों से ये साफ हुआ है कि संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था अब चरमराने लगी है।
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पहली लहर की तरह ही इटली पर दूसरी लहर की भी तीखी मार पड़ी है। इस हफ्ते वहां संक्रमण के मामलों की संख्या दस लाख को पार कर गई। इटली से मिल रही खबरों के मुताबिक, वहां अस्पतालों में बिस्तरों का अभाव हो गया है। मरीजों को कतार में लगना पड़ रहा है। फॉर्मूला वन कार रेसिंग के लिए मशहूर ट्रैक मोंजा को स्वास्थ्य देखरेख केंद्र के रूप में तब्दील करना पड़ा है।


अस्पतालों में बेड की मारामारी 
इटली के नेपल्स प्रांत के कोतुग्नो शहर में एक अस्पताल के संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख रोदोल्फो पुंजी ने मीडिया से कहा, ''मौजूदा हाल यह है कि कोतुग्नो अस्पताल में कोई बिस्तर उपलब्ध नहीं है। अस्पताल के नर्स और अन्य कर्मचारी कुर्बानी की भावना से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह कर रहे हैं।''

हर तीन मिनट में आईसीयू में जा रहा एक मरीज 
फ्रांस में पिछले दो हफ्तों से लॉकडाउन लागू है। वहां अब धीरे- धीरे संक्रमण के मामलों में गिरावट आ रही है। लेकिन खुद सरकार ने माना है कि वहां हालत अब भी संकटपूर्ण है। फ्रांस के प्रधानमंत्री ज्यां कोस्तेक ने कहा- ''अगर हम सात दिन का औसत निकालें, तो संक्रमण के मामलों में 16 फीसदी गिरावट आई है। यह ट्रेंड सकारात्मक है, लेकिन इसे सतर्क नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में औसतन हर तीस सेंकड में एक व्यक्ति अस्पताल में भर्ती होने के लिए पहुंचा है। हर तीन मिनट पर किसी मरीज को आईसीयू में ले जाने की जरूरत पड़ी है।''
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