SCO Samarkand Summit: एससीओ के समरकंद शिखर बैठक पर नजर, कितना बढ़ेगा शी जिनपिंग का प्रोफाइल?
SCO Samarkand Summit: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नौ करोड़ 60 लाख सदस्य हैं। सीपीसी पहले ही शी के खास विचारों को अपने मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में स्वीकार कर चुकी है। इसे ‘शी जिनपिंग थॉट ऑन सोशलिज्म विथ चाइनीज कैरेक्टरिस्टिक्स’ के नाम से जाना जाता है...
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग कोरोना महामारी आने के बाद पहली बार विदेश यात्रा पर गए हैं। बुधवार को कजाखस्तान पहुंचने के बाद गुरुवार को उज्बेकिस्तान के शहर समरकंद पहुंचे, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शिखर बैठक में भाग लेंगे।
कई पर्यवेक्षकों ने कहा है कि शी की यह यात्रा को यहां अगले महीने होने वाले चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस (महाधिवेशन) के लिहाज से अहम है। आम अनुमान है कि शी को इस महाधिवेशन में तीसरे कार्यकाल के लिए पार्टी महासचिव और राष्ट्रपति चुन लिया जाएगा। समझा जाता है कि इस बड़े मौके से पहले शी एससीओ के मंच से कथित नए वैश्विक ढांचे के बारे में अपना नजरिया दुनिया के सामने रखना चाहते हैं।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के नौ करोड़ 60 लाख सदस्य हैं। सीपीसी पहले ही शी के खास विचारों को अपने मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में स्वीकार कर चुकी है। इसे ‘शी जिनपिंग थॉट ऑन सोशलिज्म विथ चाइनीज कैरेक्टरिस्टिक्स’ (चीनी प्रकार के समाजवाद पर शी जिनपिंग के विचार) के नाम से जाना जाता है। अब अनुमान है कि शी के वैश्विक विचारों को भी पार्टी 16 अक्तूबर से होने वाली कांग्रेस में स्वीकार कर लेगी।
शी के विचारों के लिए चीन में खास रिसर्च सेंटर बनाए गए हैं। ये केंद्र कानून के राज (रूल ऑफ लॉ), पर्यावरणीय सभ्यता और अर्थव्यवस्था के बारे में उनके विचारों पर अनुसंधान करते हैं। अब विदेश नीति संबंधी उनके विचारों पर भी खास जोर दिया जा रहा है। बताया जाता है कि पार्टी की 20वीं कांग्रेस में शी के विचारों को सिर्फ ‘शी जिनपिंग थॉट’ का नाम दिया जाएगा। इसके पहले सिर्फ कम्युनिस्ट चीन के संस्थापक माओ जेदुंग के विचारों को ऐसा नाम दिया गया था। यहां तक चीन में आर्थिक सुधारों और खुलेपन की नीति के जनक माने जाने वाले देंग श्याओपिंग के विचारों को भी थॉट नहीं कहा गया है। उसे ‘देंग श्याओपिंग थ्यौरी’ के नाम से जाना जाता है।
यहां ये सवाल चर्चा में है कि क्या पार्टी कांग्रेस में शी को चेयरमैन का दर्जा दिया जाएगा। ये दर्जा अब तक सिर्फ माओ को मिला है। जब देंग ने पार्टी के नेतृत्व संभाला था, तब इस दर्जे को सिर्फ माओ तक सीमित रखने का फैसला हुआ था। लेकिन बीते दस वर्ष में जिस तरह शी जिनपिंग का प्रोफाइल बढ़ा है, उसे देखते हुए उन्हें चेयरमैन का दर्जा दिए जाने का मजबूत अनुमान लगाया जा रहा है।
वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल सितंबर में चीन के स्कूलों में शी जिनपिंग के विचारों को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर माओ से तुलना की जाए, तो शी के विचार अस्पष्ट मालूम पड़ते हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि नए बने कई रिसर्च सेंटर्स पर इस बात का दबाव है कि वे शी के विचारों ठोस रूप दें। बताया जाता है कि सबसे अधिक भ्रम शी के आर्थिक विचारों को लेकर है। इसे शी ने ‘कॉमन प्रोस्परिटी’ (साझा समृद्धि) कहा है। लेकिन इसका व्यावहारिक मतलब क्या है, यह साफ नहीं है।
इसी बीच शी ने बीते अप्रैल में ‘ग्लोबल सिक्योरिटी इनिशिएटिव’ के तहत अभिवाज्य वैश्विक सुरक्षा का विचार पेश किया। लेकिन इसे लेकर भी बहुत स्पष्टता नहीं है। यहां अनुमान लगाया जा रहा है कि एससीओ की समरकंद बैठक के दौरान शी अपनी इस नीति को अधिक स्पष्ट करेंगे।