फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Scientists Working with Large Hadron Collider Observe three Exotic Particles Never Seen Before

Large Hadron Collider: फ्रांस में फिर चलेगी धरती की महामशीन, ‘लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर’ से गॉड पार्टिकल की खोज में जुटे हैं वैज्ञानिक

Wed, 06 Jul 2022 05:10 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, पेरिस।
एजेंसी, पेरिस। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 06 Jul 2022 05:10 AM IST
सार

हिग्स बोसॉन सिद्धांत की खोज 10 वर्ष पूर्व 4 जुलाई 2012 को एडविन हबल नामक वैज्ञानिक ने की थी। अब इस गॉड पार्टिकल की खोज के लिए यह महामशीन ‘लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर’ दोबारा काम करेगी।

विज्ञापन
Scientists Working with Large Hadron Collider Observe three Exotic Particles Never Seen Before
Large Haldron Collider - फोटो : CERN

विस्तार

करीब 15 अरब वर्ष पूर्व हुए बिग बैंग (एक बिंदु पर सिमटे भौतिक पार्टिकल व ऊर्जा का फैलाव) के बाद गॉड पार्टिकल कहे जाने वाले हिग्स बोसॉन की खोज फिर से शुरू होने जा रही है। यूरोपीय परमाणु संस्था ‘सर्न’ के मुताबिक, 4 वर्ष बाद इसे फिर शुरू कर 13.6 ट्रिल्यन इलेक्ट्रोनवोल्ट की ऊर्जा निकाली जाएगी।

विज्ञापन


हिग्स बोसॉन सिद्धांत की खोज 10 वर्ष पूर्व 4 जुलाई 2012 को एडविन हबल नामक वैज्ञानिक ने की थी। अब इस गॉड पार्टिकल की खोज के लिए यह महामशीन ‘लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर’ दोबारा काम करेगी। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस प्रयोग से ब्रह्मांड के काम करने का तरीका और उससे जुड़े कई रहस्य सामने आ सकेंगे। प्रयोग के दौरान प्रोटोन पर विपरीत दिशा से महामशीन दो बीम डालेगी। यह बीम एक 27 किमी लंबी रिंग पर डाली जाएगी जो फ्रांस व  स्विटजरलैंड की सीमा पर धरती से 100 मीटर नीचे है।
विज्ञापन


प्रति सेकंड 1.6 अरब टक्कर
सर्न ने बताया, उसका लक्ष्य प्रोटॉन और प्रोटॉन के बीच प्रति सेकंड 1.6 अरब टक्कर कराना है। इस नई ऊर्जा की दर से वैज्ञानिक हिग्स बोसोन की अधिक बारीकी से जांच कर सकेंगे। इस टक्कर से निकले आंकड़ों का इस्तेमाल भविष्य मं डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और ब्रह्मांड के अन्य मूलभूत रहस्यों की जांच में किया जाएगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


बिग बैंग सिद्धांत का अध्ययन
वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने उस गॉड पार्टिकल को खोज लिया है, जिससे यूनिवर्स का ज्यादातर हिस्सा बना है। इस महामशीन को बनाने में 31 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। नई खोज से वैज्ञानिकों को ब्लैक होल और बिग बैंग के सिद्धांत को समझने में काफी आसानी होगी।

क्या है बिग बैंग?
बिग बैंग उस सिद्धांत को कहा जाता है, जिसके मुताबिक करीब 15 अरब साल पहले सारे फिजिकल पार्टिकल और एनर्जी एक बिंदु में सिमटे हुए थे। फिर इस बिंदु ने फैलना शुरू किया। इसमें ब्रह्मांड के शुरुआती पार्टिकल्स सब तरफ फैल गए और एक-दूसरे से दूर भागने लगे। इन्हीं पार्टिकल से पृथ्वी और जीवन की उत्पत्ति हुई।


प्रयोग में भारतीय वैज्ञानिक भी शामिल
इस मशीन को बनाने में भारत ने भी पैसे दिए हैं और कई वैज्ञानिक इस प्रयोग से जुड़े हैं। इन्हीं में से एक नाम है सत्येंद्र नाथ बोस का जिनका नाम हिग्स बोसॉन नाम ब्रिटिश वैज्ञानिक पीटर हिग्स और सत्येंद्र नाथ बोस के नाम से ही लिया गया है। बोस ने एटम के क्षेत्र में अहम काम किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed