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बूचा नरसंहार: हकीकत की कसौटी पर खरे नहीं रूस के दावे, जानें कितने सही और कितने गलत

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 05 Apr 2022 07:54 PM IST
सार

यूक्रेन के बूचा में रूसी सेना की ओर से किए गए कथित नरसंहार को लेकर इस समय रूस की खासी आलोचना हो रही है। लेकिन, रूस ने अपना बचाव करते हुए इन आरोपों को गलत करार दिया है और कई दावे किए हैं। पढ़िए रूस के इन दावों को लेकर सबूत क्या कहते हैं।

Ukraine Russia Conflict
Ukraine Russia Conflict - फोटो : iStock
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विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध के बीच कीव के पास स्थित बूचा से दिल दहला देने वाली तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जो यहां पर भीषण नरसंहार होने की ओर इशारा कर रहे हैं। इस नरसंहार का आरोप रूसी सेना पर लग रहा है।



19 मार्च को एक तस्वीरआई थी जो रूस के विदेश मंत्री के उस दावे को गलत बताती है जिसमें उन्होंने बूचा में शवों को दिखाते वीडियो व तस्वीरों को फर्जी बताया है। इस तस्वीर में कथित शव उन्हीं स्थानों पर दिख रहे हैं जहां उन्हें यूक्रेन के बलों ने पाया था।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना कर रहे रूस ने इन्हें खारिज किया है और यूक्रेन पर आरोप लगाने के साथ अपने रुख के समर्थन में कुछ वीडियो जारी किए हैं। हालांकि, रूस के ये दावे हकीकत की कसौटी पर कहीं खरे नहीं उतर रहे हैं।  

बूचा में शवों को फर्जी बताने वाला दावा
बूचा से रूसी सैनिकों की वापसी के बाद एक वीडियो सामने आया जिसमें सड़कों के दोनों और शव दिखाई दे रहे हैं। कनाडा में रूस के दूतावास ने इस वीडियो का एक धीमा वर्जन जारी किया है और इस वीडियो और शवों को फर्जी करार दिया है। 

रूस समर्थक सोशल मीडिया अकाउंट से दावा किया जा रहा है कि इन शवों में से एक की बांह हिलती नजर आ रही है। लेकिन, वीडियो को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि यह असल में वाहन की विंडस्क्रीन के दाहिए कोने पर एक निशान है। 

चार दिन बाद भी शव अकड़े क्यों नहीं?
इसके साथ ही रूस के विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि अगर ये शव असली हैं तो कम से कम चार दिन बाद भी ये अकड़े क्यों नहीं हैं। यूक्रेन सेना के अनुसार रूसी सैनिक 31 मार्च को बूचा से वापस हुए थे वहीं, रूस इसकी तारीख 30 मार्च बताता है।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार एक फॉरेंसिक पैथोलॉजिस्ट का कहना है कि चार दिन के बाद आम तौर पर शव की अकड़न घटने लगती है। मौत के रकुछ घंटों के बाद शव अकड़ना शुरू हो जाता है। लेकिन चार दिन बाद कठोरता कम हो सकती है।

कोई नागरिक हिंसा का शिकार नहीं?
रूसी रक्षा मंत्रालय ने यह दावा भी किया है कि जब तक बूचा पर रूसी सेना का नियंत्रण रहा, कोई भी स्थानीय नागरिक किसी हिंसक कार्रवाई का शिकार नहीं हुआ। हालांकि, चश्मदीदों ने यहां का जो हाल बताया है रूस का दावा उससे एकदम उलट है।

स्थानीय लोगों के अनुसार रूसी सेना ने यहां बारी-बारी से घरों के दरवाजे तोड़े और लूटपाट की। कीमती सामान और भोजन चोरी किया। एक महिला के अनुसार चार मार्च को रूसी सैनिकों ने पांच लोगों को जमा किया था और एक की हत्या कर दी थी।

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