Russia-Ukraine War: खेरसोन मोर्चे पर अपनी हार क्यों मंजूर कर ली रूस ने?
Russia-Ukraine War: पश्चिमी मीडिया में खेरसोन से सेना हटाने के फैसले को राष्ट्रपति पुतिन की अपमानजनक हार के रूप में पेश किया गया है। खेरसोन का महत्त्व इसलिए है, क्योंकि फरवरी में शुरू हुई रूस की विशेष सैनिक कार्रवाई के बाद यह एकमात्र क्षेत्रीय राजधानी है, जिस पर रूसी सेना ने पूरा कब्जा जमा लिया था...
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यूक्रेन में खेरसोन से रूसी सेना हटाने के राष्ट्रपति व्लादfमीर पुतिन के फैसले के बाद रूसी विश्लेषक ने भी राय जताई है कि यह रूस की फौरी हार है। खेरसोन उन इलाकों में शामिल है, जिन्हें रूस ने जनमत संग्रह कराने के बाद खुद में मिला लिया था। कुछ रोज पहले रूसी सूत्रों ने संकेत दिया था कि वहां से रूस अपनी फौज हटाने पर विचार कर रहा है। हालांकि यूक्रेन की सेना ने इस इलाके में हमले लगातार जारी रखे हैं, लेकिन सेना हटाने की रूसी घोषणा को यूक्रेन के रणनीतिकार समझ नहीं पाए हैं। पहले उन्होंने कहा था कि यह रूस की धोखा देने की चाल हो सकती है।
पश्चिमी मीडिया में खेरसोन से सेना हटाने के फैसले को राष्ट्रपति पुतिन की अपमानजनक हार के रूप में पेश किया गया है। खेरसोन का महत्त्व इसलिए है, क्योंकि फरवरी में शुरू हुई रूस की विशेष सैनिक कार्रवाई के बाद यह एकमात्र क्षेत्रीय राजधानी है, जिस पर रूसी सेना ने पूरा कब्जा जमा लिया था। फिर सितंबर में जिन चार इलाकों में रूस ने खुद में मिलाया, यह उनमें एक है। उस समय पुतिन ने कहा था कि इस इलाके के बाशिंदे ‘हमेशा के लिए हमारे नागरिक बन गए हैं।’
लेकिन बुधवार को यूक्रेन में रूसी सेना के कमांडर जनरल सर्गेई सुरोविकिन ने साफ-साफ कहा कि अब ड्निप्रो नदी के किनारे बसे खेरसोन में तैनात रूसी सैनिकों को जरूरी चीजों की आपूर्ति संभव नहीं रह गई है। उधर रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि रूस यूक्रेन से बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा- ‘बातचीत के लिए हमारे दरवाजे खुले हुए हैं। हमने कभी इससे इनकार नहीं किया। इस वक्त जो यथार्थ स्थिति है, उसे ध्यान में रखते हुए हम बातचीत करने को तैयार हैं।’ विश्लेषकों ने जखारोवा के इस बयान को रूसी रणनीति में आ रहे बिखराव का संकेत माना है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेन्स्की के सलाहकार मिखाइलो पोडोलयाक ने बुधवार को कहा- ‘रूस के पास सीमित संसाधन हैं। इसलिए अब उसने युद्ध रोकने की रणनीति अपनाई है।’ इसके पहले पिछले हफ्ते जेलेन्स्की ने रूस से बातचीत के लिए अपनी शर्ते बताई थीं। उन्होंने कहा था कि बातचीत सभी हो सकती है, जब रूस यूक्रेन के इलाके लौटाने, संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र का सम्मान करने, युद्ध में यूक्रेन को हुए नुकसान की भरपाई करने, हर ‘युद्ध अपराधी’ को सजा देने और यह गारंटी देने को तैयार हो कि अब दोबारा कभी यूक्रेन पर वह हमला नहीं करेगा।
खबरों के मुताबिक खेरसोन में तैनात सेना को ड्निप्रो नदी से पार ले आने का आदेश रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू ने दिया। उन्होंने इस बारे में अपना आदेश जनरल सुरोविकिन को भेजा। इसके पहले रूसी सेना को खारकीव शहर से भी वापस आना पड़ा था।
विश्लेषकों के मुताबिक हाल में यूक्रेन ने पश्चिमी देशों से मिले रॉकेट और तोपखानों से खेरसोन स्थित रूसी सेना पर हमले तेज कर रखे थे। इन हमलों में ड्निप्रो नदी पर बने तमाम पुल ध्वस्त हो गए। इसकी वजह से रूसी सेना को जरूरी सामग्रियों की आपूर्ति बेहद मुश्किल हो गई। इसी कारण रूस को वहां से अपनी सेना लौटाने का निर्णय लेना पड़ा है।